इटावा–आगरा–सैफई। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ ने जिला इटावा, आगरा एवं सैफई में जनसभाओं को विस्तृत उद्बोधन दिया। साथ ही प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
’पाप का बाप है लोभ — पंडित और वेश्या की कथा’ –
महाराजश्री ने एक शास्त्रीय कथा सुनाई जिसने आज के समय की केंद्रीय समस्या को उद्घाटित किया। एक विद्वान और सदाचारी पंडित गर्व से कहते थे: ‘पाप का बाप भी मुझे नहीं छू सकता।’ एक दिन एक वेश्या ने कहा कि वह पाप के बाप का नाम जानती है। उसने पंडित जी को अपने घर बुलाया — उन्होंने मना किया। वह मोटे लिफाफे के साथ आई। धीरे-धीरे लोभ के लिफाफे ने उन्हें खींचा: पहले उससे बात, फिर उसके दरवाजे पर, फिर घर के अंदर, फिर चरण धुलवाना, फिर खाना खाने की तैयारी ! उसी क्षण वेश्या ने एक थप्पड़ मारा और बोली: ‘पंडित जी, मैंने थप्पड़ नहीं मारा — मैंने आपको पाप के बाप का नाम बताया है। आप घर में आए, आसन पर बैठे, चरण धुलवाए, खाना खाने को तैयार हो गए — किसने यहां तक लाया? लोभ ! पाप का बाप है लोभ!’
महाराजश्री ने सीधा संदर्भ दिया: ‘आज यही हुआ है। गौभक्त सरकार, गौभक्त नेता, गौभक्त मुख्यमंत्री! फिर भी गाय को माता घोषित नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि मोटा लिफाफा आया — बूचड़खाने का चंदा — और उसने उनके साथ वही किया जो पंडित जी के साथ हुआ था। एक-एक कदम करके वहां ले गया जहां वे अपने सिद्धांतों पर कभी नहीं पहुंचते!’
’28 फरवरी 2016, जंतर-मंतर — योगी जी ने स्वयं गौ राष्ट्र माता की मांग की थी’ –
महाराजश्री ने दस्तावेजी प्रमाण उद्धृत किया: 28 फरवरी 2016 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर गौ रक्षा आंदोलन में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे। उन्होंने भाषण देते हुए गहरी पीड़ा व्यक्त की कि सरकार गाय को राष्ट्र माता घोषित नहीं कर रही और मांग की कि यह शीघ्र हो! यह थी उनकी स्थिति 2016 में। आज वे कह रहे हैं: ‘माँ-बेटे के बीच घोषणा की जरूरत है क्या?’ ‘क्या बदला 2016 से आज तक? सत्ता बदली ! मोटा लिफाफा आया। लोभ — पाप का बाप — घर में आ गया। इसके अलावा कोई और स्पष्ट कारण नहीं है।’
’अवैध संबंध ही छुपाए जाते हैं ! — पवित्र माँ-बेटे का संबंध तो गर्व से घोषित होता है’ –
महाराजश्री ने एक तीक्ष्ण तर्क रखा: ‘सोचिए — इस संसार में कौन-से संबंध कभी घोषित नहीं किए जाते? जिसका कोई अवैध संबंध है — वह उसे निभाता है, पोसता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से कभी घोषित नहीं करेगा क्योंकि वह प्रकाश में नहीं आ सकता। इसके विपरीत माँ-बेटे का संबंध — सृष्टि का सबसे पवित्र बंधन। एक गर्वित पुत्र इसे छुपाता नहीं, पूरे जहान को बताता है: यह मेरी माँ है।’
उन्होंने कहा: ‘आप कहते हैं कि गाय माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। तो फिर इस नाते में क्या छुपा है? आप इसे घोषित क्यों नहीं करेंगे? उस सवाल का ईमानदारी से जवाब दीजिए — और आपने हमें सब बता दिया। पुण्य कभी नहीं छुपाया जाता। केवल पाप छुपाया जाता है।’
’कृष्ण ने यादव कुल को क्यों चुना? क्योंकि यदु में धर्म का सूक्ष्म विचार था’ –
महाराजश्री ने यादव वंश की मूल कथा सुनाई। राजा ययाति ने अपने पुत्रों से अपनी जवानी मांगी ! सबसे बड़े पुत्र यदु ने कहा: ‘देने को तैयार हूं — लेकिन पहले बताइए, इसका उपयोग कहां होगा?’ जब उत्तर अधर्मपूर्ण निकला तो यदु ने मना कर दिया — राज्य का उत्तराधिकार गंवाने की कीमत पर। ‘पिताजी, राज्य दे सकता हूं — लेकिन अधर्म के लिए यंत्र नहीं बनूंगा।’

महाराजश्री ने समझाया: ‘इसीलिए भगवान ने यदु कुल को अपने अवतार के लिए चुना। जब भगवान अवतार लेते हैं तो वह कुल चुनते हैं जहां धर्म का सूक्ष्म विचार हो ! जहां लोग पहले पूछते हों: अगर मैं अपना vote, अपनी शक्ति, अपना परिश्रम दे रहा हूं — तो इसका उपयोग क्या होगा? आज हर मतदाता को यदु बनना है। पूछो नेता से, पार्टी से: मेरा vote लेकर क्या करोगे? अगर जवाब है — विधानसभा जाकर बूचड़खाने को लाइसेंस दूंगा, तुम्हारी गाय को पशु कहता रहूंगा — तो वही करो जो यदु ने किया। कहो: मेरा vote नहीं !’
’30 वर्षों में गाय की तस्करी में केवल 1 यादव मिला — 30 साल के RSS अनुभवी की गवाही’ –
महाराजश्री ने कानपुर में हुई एक उल्लेखनीय मुलाकात साझा की ! एक बुजुर्ग RSS कार्यकर्ता — 40 साल RSS में, 10 साल VHP में, 5 साल BJP में — पार्टी की चेतावनी के बावजूद उनसे मिलने आए। उन्होंने बताया: ’30 साल तक मेरा काम गायों को ले जाने वाले ट्रकों को पकड़ना था। उन 30 वर्षों में ब्राह्मण भी मिले, क्षत्रिय भी मिले, कई जातियों के लोग गाय की तस्करी में लगे मिले। यादव? पूरे 30 साल में केवल एक यादव मिला — बस एक। यादव समाज ने कभी अपनी गाय से नाता नहीं तोड़ा! उनकी परंपरा आज भी उन्हें सुरक्षित कर रही है।’
’डिंपल यादव ने उस गलती के लिए माफी मांगी जो उन्होंने की ही नहीं !’ –
महाराजश्री ने यादव परिवार के साथ अपने दशकों के संबंध की पूरी गाथा सुनाई — मुलायम सिंह जी द्वारा उनके गुरुजी की गिरफ्तारी (सुरक्षा की दृष्टि से, अपमान की नहीं, जैसा बाद में प्रमाणित हुआ), अखिलेश जी की हरिद्वार कुंभ में व्यक्तिगत क्षमा-याचना, और मैनपुरी में डिंपल यादव की उपस्थिति तक। कन्नौज का कार्यक्रम — डिंपल यादव के अपने संसदीय क्षेत्र में — प्रशासन ने बुलडोजर की धमकी देकर ध्वस्त किया। इसमें न अखिलेश का दोष था, न डिंपल का। फिर भी डिंपल जी स्वयं आईं और क्षमा-याचना की !
‘जो व्यक्ति अपनी गलती नहीं थी उसके लिए माफी मांगे — यह सबसे बड़ी संवेदनशीलता और दिल की बड़ाई है। पुण्य नहीं छुपाया जाता — तो इनकी इस बड़ाई को भी घोषित करना हमारा धर्म है।’
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा –
सभा स्थल पर भगवान कृष्ण की वह छवि प्रदर्शित थी जिसमें वे अपने भक्त की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र उठाए हुए हैं — वही चक्रधारी मुद्रा जो महाराजश्री पूरी यात्रा में करवाते हैं। उन्होंने जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
“मैं आज सार्वजनिक रूप से घोषणा करता/करती हूं — सारा जहान सुन ले — कि गाय मेरी माता है। जो उन्हें पशु कहे, चोट पहुंचाए, या ऐसे लोगों से साथ-गांठ रखे — आज से उनसे मेरा सम्बन्ध टूटा। मेरा vote केवल उसे जो माता घोषित करके — खुलकर, गर्व से — मेरे दरवाजे आए।”
तत्पश्चात् चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने स्मरण दिलाया: ‘आपका vote आपका यदु-क्षण है। पहले पूछो — फिर दो!’
श्री गोपाल जी जसवंत नगर विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त –
जसवंत नगर विधानसभा की सभा में श्री गोपाल जी को एक नोट अभियान एवं अभिनव गौधाम निर्माण के लिए सर्वसम्मति से प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। महाराजश्री ने कहा: ‘गोपाल — गौ का पालन करने वाला — यह नाम ही इस कार्य का आमंत्रण है। हर निवासी ₹1 से ₹500 का एक नोट देगा। गौधाम बनेगा। और गौ माता सजी-धजी, प्रसन्न होकर विराजमान होंगी और पूरे विधानसभा क्षेत्र को आशीर्वाद देंगी!’
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प –
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों! के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी!
मीडिया टीम
‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’
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