अजय चौहान | सरकार या Goverment क्या है? इस विषय पर आप ने कई बार मीडिया में अलग प्रकार से बहस होती देखी होगी, लेकिन वास्तविकता क्या है ये नहीं बताई जाती। दरअसल, उदहारण के लिए जब हम स्वयं को और अपनी भेड़-बकरियों को शत्रु से बचाने के लिए कानून या सरकार के पास सुरक्षा और संरक्षण के लिए गुहार लगाते हैं, गिड़गिड़ाते हैं, तो वही सरकार यानी वही कानून चुपके से हमारी गायों को भी उन भेड़ बकरियों की ही तरह मरवा देता है। क्योंकि कानून ये जानता है और कहता है की जो समुदाय या धर्म अपनी ही भेड़-बकरियों की रक्षा स्वयं से नहीं कर सकता वो अपनी गाय क्या ख़ाक बचा पायेगा! बस इसी को सरकार या Goverment कहते हैं। इस सरकार का मुख्यालय और कार्यालय World Economic Forum यानी WEF के नाम से स्विट्जरलैंड के जिनेवा है जो “One world, one religion & One economy” के स्लोगन को लागू करवाने के लिए काम करना है।
मैं ये कोई नई बात नहीं कह रहा हूं। बल्कि हमारे प्रधानमंत्री जी स्वयं कई बार और कई मंचों से ये बात कह चुके हैं। बस हमारे मीडिया के पास समय नहीं है इसको कहने का या इसका सत्य बताने का। असल में अंग्रेजों के लिए काम करने वाली व्यवस्था World Economic Forum यानी WEF) को ही Goverment या सरकार कहते हैं, और आज इस दुनिया में जितने भी लोकतान्त्रिक देश हैं वे सभी उसी WEF के नीचे काम कर रहे हैं। बेशक़ भारत की हिन्दू जनता के लिए शुरुआत में यह एकदम नया और अजीब था लेकिन अब इसकी आदत लग चुकी है। क्योंकि भारत में तो ऐसी कोई व्यवस्था पहले कभी थी ही नहीं। भारत में तो प्रारम्भ से ही राजा और राजतंत्र का शासन हुआ करता था।
अंग्रेजों के लिए काम करने वाली इस आधुनिक शासन व्यवस्था ने जब से यहां अपने पैर पैसारे हैं तभी से भारत को नर्क की तरह बनाकर रख दिया है। भारत से हर साल WEF में शामिल होने और नई-नई योजनाएं तथा अपने पिछले कामों का लेखा-जोखा देने के लिए हमारे कई बड़े नेता, अभिनेता, नौकरशाह और उद्योगपतियों सहित कई धार्मिक गुरु भी वहाँ जाते रहते हैं और वहाँ से मिले निर्देशों के अनुसार ही अपनी गतिविधियों को लागू करते हैं।
WEF न तो कोई धार्मिक, राजनैतिक और न ही UN से जुडी कोई ऐसी संस्था या संगठन है जो आमजन के हित में काम करती हो। लेकिन, इसी के इशारे पर आज की दुनिया की लगभग सभी देशों की सरकारें चल रहीं हैं। हाँ केवल चीन रूस और उत्तर कोरिया जैसे कुछ ही देश हैं जिनकी सरकारें सीधे WEF के इशारे पर नहीं चल रहीं हैं। लेकिन फिर भी इनका असर वहाँ किसी न किसी तरह दिख ही जाता है।
वैसे तो यह एक विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum या WEF) है और वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना इसका काम है। क्योंकि इसकी घृणित मानसिकता और वास्तविकता कुछ और ही है। न तो यह वास्तविकता आसानी से समझाई जा सकती है और न ही हर किसी को स्वयं से समझ आने वाली है की यह WEF असल में है क्या?
कहने के लिए तो विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum या WEF) पूरी तरह से एक गैर-लाभकारी संस्था है। यानी किसी भी सरकार या देश से इसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इसके बाद भी यह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हर साल अपने वार्षिक सम्मेलन में दुनिया भर के बड़े से बड़े नेताओं, उच्चस्तरीय नौकरशाहों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों को एक साथ इसलिए बुलाता है ताकी उनके जरिये वो दुनियाभर की सरकारों को अपनी उंगलियों पर नचा सके और हर देश की अपनी-अपनी मूल संस्कृति, सभ्यता, धर्म, भाषा आदि को जड़ से ख़त्म करके “One world, one religion” को लागू करवा सके।
कहने के लिए तो विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum या WEF) पूरी तरह से एक गैर-लाभकारी संस्था है। यानी किसी भी सरकार या देश से इसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इसके बाद भी यह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हर साल अपने वार्षिक सम्मेलन में दुनिया भर के बड़े से बड़े नेताओं, उच्चस्तरीय नौकरशाहों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों को एक साथ इसलिए बुलाता है ताकी उनके जरिये वो दुनियाभर की सरकारों को अपनी उंगलियों पर नचा सके और हर देश की अपनी-अपनी मूल संस्कृति, सभ्यता, धर्म, भाषा आदि को जड़ से ख़त्म करके “One world, one religion” को लागू करवा सके।
भारत में तो इसका असर अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक गहरा चुका है। खासकर पिछले एक दशक से हमारे कई हिंदू धर्मगुरु इसके चुंगल में इतने फंस चुके हैं कि वे अपना धर्म और अपना कर्म तक भूलते जा रहे हैं। ध्यान रखना की भारत सहित दुनियाभर में जो कोई भी आज इनके प्रति जागरूक होकर बैठे हुए हैं तभी तक सुरक्षित हैं. लेकिन, जब भारत पूरी तरह से इन शक्तियों के शिकंजे में कस जाएगा तब इनसे बचने के बारे में सोचेंगे या फिर हमें कुछ नहीं होने वाला है तो वे ये जान लें की तब तक तो हाथ में कुछ भी बचने वाला नहीं है।