यहां एक फोटो दर्शाई जा रही है, इसको गोरक्षपीठ के औपचारिक हैंडल से पोस्ट किया गया था। तिथि थी 2 अप्रैल 2024. यह वह पीठ है जिसके वर्तमान महंत योगी आदित्यनाथ की पुलिस और प्रशासन ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामीश्री जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी से शंकराचार्य होने का सर्टिफिकेट मांग रही है!
गोरक्षपीठ के इस पोस्ट में देखिए कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को किस तरह संबोधित किया है। उन्होंने लिखा है “श्री ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम, हिमालय के पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज।”
आखिर दो साल में ऐसा क्या बदला कि जो पीठ अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को जगतगुरु शंकराचार्य कह कर संबंधित कर रहा है, उस पीठ के महंत की सरकार अब अचानक से उनके शंकराचार्य होने का सर्टिफिकेट मांग रही है?
इस दो वर्ष में केवल दो चीज बदला है:-
१) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने ‘गो माता-राष्ट्र माता’ के अभियान को तेज करते हुए 3000 किमी से अधिक की यात्रा की है। वह आंकड़ों से लोगों को बता रहे हैं कि भाजपा के शासन काल में गो हत्या बढ़ गई है और सबसे अधिक गो हत्या उप्र में हो रही है।
२) पिछले वर्ष कुंभ-2025 में मची भगदड़ में मारे गये हिंदुओं की पीड़ा से आहत शंकराचार्य जी ने उप्र के मुख्यमंत्री पर जवाबदेही डाली थी।
बस इन दो घटनाओं के बाद सरकार शंकराचार्य जी और उनके संन्यासियों को अपमानित करने, मारने-पीटने और उनसे शंकराचार्य का सर्टिफिकेट मांगने पर उतारू हो गई है! यही सच है!
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