Skip to content
17 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर की संपूर्ण जानकारी । About Bhimashankar Jyotirling

admin 11 November 2021
Bhimashankar Jyotirling
Spread the love

अजय सिंह चौहान || महाराष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्र और संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में छठे स्थान पर माना जाने वाला भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्राकृतिक नजारा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इतना आकर्षित करता है कि ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद श्रद्धालुजन इस बेहद सुंदर और आकर्षक प्राकृतिक वातावरण में आकर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटक भी बन जाते हैं और आस-पास के पहाड़ों और जंगलों में भी कुछ समय बिताना पसंद करते हैं। इसीलिए पुराणों में इस ज्योतिर्लिंग मंदिर और इसके क्षेत्र का संदर्भ स्वर्ग के रूप में भी दिया जाता है।

दरअसल, मंदिर के आस-पास लाल वन क्षेत्र नामक एक विशाल संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य है, जिसमें कई तरह के सुंदर पक्षी, पेड़-पौधे, फल-फूल और वन्य जीवों को देखा जा सकता है। इसी वन क्षेत्र में ‘शेकरु’ नाम की एक ऐसी दुर्लभ गिलहरी भी पाई जाती है जो आकार में बहुत बड़ी होती है।

यहां भगवान शिव के साक्षात् दर्शन करने, प्रकृति के सौंदर्य को नजदीक से निहारने और जंगल सफारी के लिए देश के ही नहीं बल्कि दुनियाभर के कई श्रद्धालु और पर्यटकों की विशेष भीड़ साल भर लगी रहती है। इसीलिए, यहां आने वाले श्रद्धालुओं में से अधिकतर लोग कम से कम तीन दिनों तक जरूर रुकते हैं और धर्म के साथ-साथ यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए और इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए कोई भी श्रद्धालु यह मौका खोना नहीं चाहता।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र में पुणे से लगभग 100 किलोमीटर और खेड़ से 50 किलोमीटर की दूरी पर भोरगिरि नामक एक छोटे से कस्बे में सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। मंदिर क्षेत्र के आस-पास ही में पर्यटन के लिहास से बहुत ही सुंदर और आकर्षक स्थानों में बाॅम्बे प्वाइंट, गुप्त भीमाशंकर, साक्षी विनायक और नागफनी प्वाइंट जैसे कुछ स्थान हैं जहां पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती है।

यहां भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मुख्य मंदिर के आस-पास कई ऐसे मंदिर और कुंड हैं जो पौराणिक काल के माने जाते हैं। उनमें से मोक्ष कुंड के नाम से एक ऐसा पवित्र कुंड भी है जिसको महर्षि कौशिक से जुड़ा हुआ माना जाता है। एक अन्य कुंड जो कुशारण्य के नाम से है उसे भीम नदी का उद्गम माना जाता है। भीमाशंकर मंदिर से कुछ दूरी पर गुप्त भीमाशंकर नाम का एक अन्य मंदिर भी स्थित है। इसके अलावा भीमाशंकर मंदिर से कुछ ही दूरी पर हनुमान तालाब नामक एक अन्य स्थान भी है।

भीमाशंकर मंदिर बहुत ही प्राचीन है, लेकिन इसके कुछ हिस्सों का निर्माण ज्यादा पुराना नहीं है। जानकारों के अनुसार इस मंदिर का वास्तुशिल्प बहुत ही प्राचीन है और इसे विश्वकर्मा की कौशल श्रेष्ठता के बराबर कहा जा सकता है। विशाल आकार वाले काले पत्थरों के इस्तेमाल से बनाये गए इस मंदिर के शिखर को बनाने में अन्य कई प्रकार के पत्थरों का भी इस्तेमाल किया गया है।

इसे भी पढ़े: अमरनाथ जी की गुफा के कण-कण में छुपे हुए हैं अमर होने के रहस्य

नागरा शैली में बने इस भीमाशंकर मंदिर के कुछ हिस्सों में इंडो-आर्यन शैली भी देखी जा सकती है। इसीलिए इस मंदिर की संरचना बताती है कि यह नागरा शैली की वास्तुकला से बनी एक प्राचीन और नई संरचनाओं का बेहद सुंदर उदाहरण है। महान शासक शिवाजी महाराज ने भी इस मंदिर की पूजा-अर्चना के लिए कई तरह की सुविधाएं प्रदान की थी। पेशवा काल के प्रसिद्ध राजनेता नाना फड़नवीस के द्वारा 18वीं सदी में इस मंदिर के सभामंडप और इसके शिखर को बनवाकर इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया बताया जाता है।

इस प्रसिद्ध भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर की एक और विशेषता इसके प्रांगण में लगा एक विशालकाय ऐतिहासिक घंटा है जो मंदिर के गर्भग्रह के ठीक सामने एक छोटे से शनि मंदिर पर लगा हुआ है। इस घंटे पर 1729 अंकित है और इसको हिंदुत्व के पराक्रम का प्रतिक माना जाता है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की महिमा और इसके नाम के विषय में शिवपुराण में वर्णन मिलता है किसी समय में भीम नाम के एक राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर बहुत ही आतंक मचा रखा था। वह राक्षस इतना निरंकुश हो गया था कि उसके आतंक से मनुष्यों के साथ-साथ देवता भी भयभीत रहने लगे थे। उस राक्षस से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए।

इसे भी पढ़े: त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर- तेजस्वी प्रकाश का साक्षी है यह स्थान | Trimbakeshwar Jyotirling Darshan

देवताओं की पुकार सुन कर भगवान शिव ने भीम नाम के उस राक्षस का वध कर दिया। इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से आग्रह किया कि जिस स्थान पर आप ने उस राक्षस को मारा है आप इसी स्थान पर शिवलिंग के रूप में सदा-सदा के लिए विराजित हो जाएं। उनकी इस प्रार्थना को भगवान शिव ने स्वीकार कर लिया और वे ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां विराजित हो गए। और क्योंकि उन्होंने इस स्थान पर भीम नाम के राक्षस को मारा था इसलिए सभी देवी-देवताओं ने इसे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग नाम दे दिया।

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में छठे स्थान पर माना जाने वाला यह ज्योतिर्लिंग मंदिर, महाराष्ट्र में पुणे से करीब 100 किलोमीटर दूर सह्याद्रि नाम के पर्वत की 3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भीमाशंकर के इस ज्योतिर्लिंग के बारे में पुराणों में ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्वा से प्रतिदिन सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ ही 12 ज्योतिर्लिगों का नाम जपते हुए इस मंदिर के दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।

हालांकि, इसके अलावा एक भीमाशंकर महादेव का मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के काशीपुर में भी है जिसका वर्णन पुराणों में मिलता है। यह भी भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ स्थान है। इसलिए काशीपुर के इस मंदिर को भी उन्हीं का रूप बताया जाता है। लेकिन, महाराष्ट्र के इस भीमाशंकर मंदिर को बारह ज्योतिर्लिंगों में छठे स्थान पर माना जाता है।

भीमाशंकर मंदिर से पहले इसी शिखर पर देवी पार्वती का भी एक मंदिर है जो कमलजा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि देवी पार्वती ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस से युद्ध करने में भगवान शिव की सहायता की थी। उस युद्ध की समाप्ती के बाद ब्रह्मा जी ने इसी स्थान पर देवी पार्वती की पूजा कमल के फूलों से की थी।

यहां पहुंचने के लिए सड़क और रेल दोनों ही मार्ग की अच्छी सुविधा है। यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे में हैं जो यहां से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। सड़क के रास्ते यहां आने के लिए मुंबई से 214 किलोमीटर, मंचर से 58 किलोमीटर, सलगांव से 42 किलोमीटर, भोरवाड़ी से 61 किलोमीटर, पेथ से 67 किलोमीटर है। जबकि नासिक से इसकी दूरी लगभग 200 किलोमीटर है।

महाराष्ट्र परिवहन की सरकारी बसें और टैक्सी की सुविधा से भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर तक आने के लिए आसानी से मिल जाती हैं। महाशिवरात्रि के खास अवसर पर यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि के खास अवसर पर और हर महीने में आने वाली शिवरात्रि पर भी यहां पहुंचने के लिए विशेष बसों का प्रबन्ध भी किया जाता है।

परिवार के साथ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां बजट के अनुसार कई धर्मशालाएं और होटल खुले हुए हैं। इसके अलावा बहुत से पर्यटक और श्रद्धालु पास के शिनोली और घोड़ेगांव में भी रुकना पसंद करते हैं।

यदि आप लोग भी भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो उसके लिए अगस्त से मार्च महीने के बीच का समय यहां के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जो लोग ट्रैकिंग को पसंद करते हैं उन्हें मानसून के दौरान यहां ट्रेकिंग से बचने की सलाह दी जाती है।

About The Author

admin

See author's posts

4,208

Post navigation

Previous: राजा भर्तृहरि से देवराज इन्द्र को भी लगता था डर | Bharthari Cave in Ujjain
Next: क्या आप भी जाते हैं धार्मिक यात्रा में पाप करने?

Related Stories

Sri Ayyappa Swami Temple in Kerala
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

अय्यप्पा स्वामी के नियम : आत्म संयम, समर्पण और भक्ति के प्रतीक

admin 14 January 2026
Sheetla Mata Temple in Gurugram_Ancient and Mughal history
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम की पौराणिक, प्राचीन और मुगलकालीन यात्रा

admin 26 September 2025
MARGHAT WALE HANUMAN MANDIR ka prachin itihas
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

मरघट वाले हनुमान मंदिर का पौराणिक, प्राचीन और मुग़लकालीन इतिहास

admin 19 September 2025

Trending News

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 1
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 2
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 3
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 4
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 5
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026

Total Visitor

093059
Total views : 170780

Recent Posts

  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.