Monday, June 22, 2026
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Global Warming: बहुत ही जल्द पृथ्वी पर होने वाली है विनाश लीला

अशोक सिंह || ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming & Climate Change) के चलते संपूर्ण धरती पर बहुत ही जल्द विनाश लीला शुरू होने वाली है, जिसमें न सिर्फ मनुष्य बल्कि तमाम पशु, पक्षी, वनस्पति और जल में रहने वाले तमाम प्रकार के जीवन का भी अस्तित्व खतरे में आ चुका है।

जी हां, ये सच है। और ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इस बात को लेकर उन वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है जो इस विषय के बड़े और खास विशेषज्ञ हैं। इन विशेषज्ञों ने तो यहां तक कह दिया है कि आने वाला वह खतरा हमसे कोई एक या दो हजार वर्ष दूर नहीं बल्कि मात्र कुछ ही वर्षों की दूरी पर एक दम साफ-साफ दिख रहा है।

इन वैज्ञानिकों ने संपूर्ण दुनिया के सामने अपनी ग्लोबल वार्मिंग से जुडी उस चेतावनी को रख दिया है जिसमें उन्होंने उस भयानक खतरे को अपने अध्ययनों के दौरान साक्षात देखा है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने अपनी एक रिसर्च के दौरान पाया है कि पृथ्वी पर मौजूद वह सिस्‍टम जिसकी वजह से हमारी पृथ्वी पर जीवन संभव है बहुत ज्‍यादा क्षतिग्रस्त हो चुका है और यह क्रम आगे भी लगातार जारी है। प्रकृति के उस सिस्टम को इतना ज्‍यादा नुकसान पहुंचाया जा चुका है कि हमारा यह ग्रह अब मानवता के लिए सुरक्षित जगह बनने से काफी बाहर हो गया है।

वैज्ञानिकों ने अपनी ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming & Climate Change) से जुडी रिसर्च के दौरान पाया है कि न सिर्फ पृथ्वी पर, बल्कि हमारे इस सौर मंडल के नौ में से छह ग्रहीय सीमाएं भी इंसानों द्वारा फैलाये जा रहे बढ़े प्रदूषण और प्राकृतिक दुनिया के विनाश की वजह से खत्‍म हो गई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये सीमाएं दरअसल प्रमुख ग्‍लोबल सिस्‍टम की सीमाएं होती हैं, जैसे कि जलवायु, जल और वन्यजीव में विविधता को बनाए रखना। लेकिन अब न सिर्फ पृथ्वी बल्कि सौर मंडल के अन्य स्वस्थ ग्रहों को भी स्वस्थ बनाए रखने की क्षमता के असफल होने का खतरा बढ़ गया है।

दरअसल, वर्ष 2009 में, स्टाॅकहोम रेजिलिएशन सेंटर यानी एस.आर.सी. के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक समूह ने कुल नौ ग्रहों की उन सीमाओं की पहचान की थी जो पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित सीमाएँ हैं और जिनके भीतर पर्यावरण के अपरिवर्तनीय प्रभावों के बिना मानवता विकसित हो सकती है। लेकिन, उसके बाद से अब तक के करीब 10 वर्षों में तापमान में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई है और यह वृद्धि औसत से ऊपर या नीचे भिन्नता के साथ आश्चर्यजनक रूप से बदल रहा है। यह वही काल है जिसमें मानव इतिहास का महान विकास हुआ। यानी इसी दौरान यह अस्थिरता देखी जा रही है जो कि पृथ्वी पर मौजूद मानव सही अन्य जीवों के लिए ही नहीं बल्कि अन्य ग्रहों के पर्यावरण के लिए भी खतरनाक साबित होता जा रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन अन्य ग्रहों की टूटी हुई सीमाओं का मतलब यही बताता है कि सिस्टम एक सुरक्षित और स्थिर स्थिति से बहुत दूर जा चुका है। हालांकि, यह सिस्‍टम आज से करीब 10,000 (दस हजार वर्ष) वर्षं पहले यानी हिमयुग के अंतिम वर्षों से लेकर आधुनिक काल की औद्योगिक क्रांति की शुरुआत तक भी मौजूद हुआ कररता था। जबकि संपूर्ण आधुनिक सभ्यता की शुरुआत इसी दोर में हुई है, और औद्योगिक क्रांति के बाद से तो यह सबसे अधिक भयानक काल रहा है।

वैज्ञानिकों के कहना है कि हमार यह परिक्षण, मूल्यांकन सौर मंडल के उस सभी नौ ग्रहों की सीमाओं में से पहला था और संपूर्ण पृथ्वी के लिए पहली वैज्ञानिक स्वास्थ्य जांच का था। वैज्ञानिकों का कहना है कि सौर मंडल के छह ग्रहों की सीमाएं लगभग-लगभग टूट चुकी हैं, जबकि अन्य दो ग्रहों की सीमाए भी टूटने के एक दम करीब ही हैं। और इसके पीछे का जो सबसे प्रमुख कारण है वो है वायु प्रदूषण और महासागरों में एसिड का लगातार बढ़ते जाना।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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