Skip to content
18 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • आधुनिक इतिहास
  • विशेष

भारत माता प्राचीन ग्रंथों में क्यों नहीं है?

admin 31 January 2026
Bharat Mata Mandir Ujjain
Spread the love

अजय चौहान । ​प्राचीन शास्त्रों या प्राचीन ग्रंथों में ‘भारत माता’ शब्द है ही नहीं, क्योंकि इस संपूर्ण धरती को माँ मानने की परंपरा है और धरती को आप और हम सीमाओं से बांध कर नहीं पूज सकते। इसीलिए हमारे प्राचीन ग्रंथों में सम्पूर्ण पृथ्वी को छोड़कर उसके किसी भी एक टुकड़े को ही माता माना जाय या सम्मान दिया जाय ऐसा नहीं हो कसता। इसलिए केवल भारत माता कहना मूर्खता है। और आज जिसे हम भारत माता के नाम से पूजते हैं वह एक ऐसा षड्यंत्र है हमें अपनी मूल और सनातन की देवियों से दूर करता है। तभी तो हमारे आधुनिक सभी नेता कहते हैं की मूर्तियों को नदी में डुबो दो और “केवल भारत माता की पूजा करो।”

यानी सच तो ये है कि ये केवल भारत माता नहीं बल्कि भूमि माता होना चाहिए। और जब इसी एक भूमि पर दुनिया के सभी देश हैं तो फिर भारत में ही इसकी पूजा क्यों? इसी विषय पर जब मैने पूछा कि – “हेलो जेमिनी, क्या भारत माता हिंदू धर्म के किसी शास्त्र में दी गई है? अगर है तो उसको विस्तार से समझाइए।” तो उसने मुझे ये जानकारी दी है।

Gemini ने कहा कि – ​अथर्ववेद (भूमि सूक्त): इसमें एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है: “माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः” जिसका अर्थ है— ‘भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।’ अर्थात जेमिनी के अनुसार भी यहाँ इस पूरी पृथ्वी को ही माँ माना गया है न की केवल इसके किसी एक ही भाग को।

​पुराणों में वर्णन: विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में ‘भारतवर्ष’ की भौगोलिक स्थिति का वर्णन मिलता है, जहाँ इसे “कर्मभूमि” कहकर सम्मान दिया गया है लेकिन “भारत माता” जैसी कोई व्याख्या नहीं है।

​Bharat Mata Mandir Kashi‘भारत माता’ का आधुनिक उदय कब हुआ –
​’भारत माता’ का यह स्वरूप जिसे हम आज जानते हैं, वह मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उभरा था जिसमें ​बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में ‘वंदे मातरम्’ शीर्षक से एक गीत लिखा। इस गीत में उन्होंने बंगाल की धरती और अंततः भारत की भूमि को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में चित्रित किया। अर्थात यहीं से ‘देश को माँ मानना’ एक आध्यात्मिक आंदोलन बन गया।

लेकिन उनके बाद के षड्यंत्रकारी शासको ने माता के हाथ में एक निर्जीव झंडा थामकर अस्त्र-शास्त्र छीन लिए। यहां भी न केवल षड्यंत्र हुआ बल्कि सनातन धर्म का अपमान भी किया गया है। अब यदि बंगाल में भी ममता बनर्जी दुर्गा पांडालों में माता के हाथ में केवल झंडा ही थाम दे रही तो उसको आप क्या कहेंगे? कल को यदि ममता स्वयं अपने पुतले खड़ी करवा देगी तो क्या कर लोगे?

​रवीन्द्रनाथ टैगोर की पेंटिंग: 1905 में उन्होंने पहली बार ‘भारत माता’ का चित्र बनाया। इसमें उन्हें एक तपस्विनी के रूप में दिखाया गया था, जिनके चार हाथ थे और वे अन्न, वस्त्र, ज्ञान और दीक्षा का प्रतीक वस्तुएं पकड़े हुए थीं। और यहीं से शुरू होती है भारत माता की असली कहानी।

​शास्त्रों से जुड़ाव या सांस्कृतिक दृष्टिकोण –
​भले ही ‘भारत माता’ नाम का उल्लेख शास्त्रों में न हो, लेकिन उन्हें देवी का स्वरूप मानने के पीछे हमारे शास्त्रों के ये तर्क दिए जाते हैं: ​शक्ति का रूप: हिंदू धर्म में ‘शक्ति’ को सृजन का आधार माना जाता है। चूंकि भूमि हमें अन्न और जीवन देती है, इसलिए उसे शक्ति का अवतार माना गया। लेकिन सच तो ये है कि केवल भारत के लिए ही माता हो यह भी तो गलत है। और भूमि माता है तो यह तो हम आज भी जानते हैं और मानते हैं।

​तीर्थ और नदियां भी तो माता हैं –
अब आप कहेंगे कि भारत में ऐसे कई तीर्थ और नदियां भी तो हैं जिनको माता का दर्जा दिया गया है तो फिर भारत माता क्यों नहीं हो सकती? तो इस पर मैं यह कहना चाहूंगा कि शास्त्रों में गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी और अन्य सभी नदियों को माँ कहा गया है। इन सबको मिलाकर जो अखंड भू-भाग बनता है, उसे कालांतर में ‘एक भौगोलिक स्थिति के रूप में’ पूजनीय माना जाने लगा। लेकिन उन सभी माताओं के हाथ में कम से कम एक पुस्तक तो होती ही है। लेकिन यहां तो आरएसएस वाला एक ऐसा निर्जीव झंडा थाम दिया है जिसका कोई अस्तित्व भी नहीं है।

सन 1947 के बाद से ही हमारी राजनीति और राजनेता विदेशी षडयंत्रों के हाथों की कठपुतलियां रहीं हैं। और क्योंकि हमारी राजनीति और हमारा संविधान मूल रूप से भारतीय मानसिकतावादी नहीं है, भारतीय विचारधारा पर आधारित नहीं है, और न ही मूल रूप से भारतीय मानसिकता के आधार पर रचा गया है, इसलिए इसके नियम और कानून में प्रकृति पर आधारित धर्म की कमी है। इसीलिए इसमें अध्यात्म नहीं है और नहीं इसमें मोक्ष के विषय में कुछ कहा गया है। इसमें मानसिक शांति और संतुलन अथवा भौगोलिक स्थिति के आधार पर मूलधर्म की राजनीति तो बिल्कुल नहीं है। ऐसे में यह केवल एक शारीरिक तौर पर समाज को हांकने का दंड पर आधारित नियम कानून का प्रावधान है। ऐसे में हम इस संविधान को भारत से जुड़ा कैसे मान सकते हैं?

सच तो यह है कि भारत भूमि के अलावा दुनिया के लगभग 90% या इससे भी अधिक देशों में उनके अपने नियम, अपने धर्म और अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर चलते हैं और वही उनके संविधान भी हैं। यही कारण है कि उन देशों के अधिकतर संविधान तो लिखित भी नहीं है। और यदि लिखित हैं भी तो भी वे बहुत छोटे या मात्र कुछ पन्नों के ही हैं। लेकिन इसके ठीक विपरीत भारत का संविधान सबसे बड़ा और लिखित संविधान है। यानी इससे यह सत्य साबित होता है कि भारत में भारत की मूल भौगोलिक स्थिति के अनुसार नियम कानून नहीं बनाए गए हैं बल्कि विदेशी कानून को जबरन भारत पर थोपा गया है।
​

About The Author

admin

See author's posts

79

Post navigation

Previous: प्राचीन लोक-कथाओं और लोक-कलाओं में मोर
Next: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को हम संत रहने दें!

Related Stories

National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

admin 15 March 2026
Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026

Trending News

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 1
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 2
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 3
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 4
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 5
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026

Total Visitor

093146
Total views : 170945

Recent Posts

  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.