पता नहीं एपस्टीन फ़ाइल्स आपको कितना डराती है मगर अपनी तो रूह कांप रही है। छोटी छोटी बच्चियों के यौन शोषण में लिप्त दुनिया के तमाम बड़े लोगों की लंबी सूची हमारी सभ्यता का एक्स-रे सा नजर आ रही है जो न केवल डरावनी है अपितु शर्मनाक है और गुस्से से भर देने वाली है। मुझे नहीं मालूम यह कितना सच है मगर कहा तो यह भी जा रहा है कि पिशाची आनंद के लिए बच्चियों की अंतड़ियां निकाल कर उनका मल तक खाया जाता था । वीभत्सता से भरी इन तमाम खबरों के बीच नोयडा का निठारी कांड आँखों के सामने आ जाता है जिसमें 19 बच्चियों के कंकाल मिले थे। देश कांप उठा था । मीडिया उबल पड़ा था। अदालतें बैठ गईं थीं मगर हुआ क्या ? कुछ नहीं । आरोपी साफ बच निकले। यही तो हो रहा है पूरी दुनिया में । निठारी की कोठी संख्या डी 5 ही तो बनती जा रही है दुनिया, जहाँ घृणित अपराध होते हैं, कंकाल मिलते हैं, पीड़ितों की चीखें इतिहास में दर्ज हो जाती हैं मगर अपराधी कानून की भूल-भुलैया में बेदाग निकल जाते हैं। क्षमा करें, यदि आप बहुत आशावादी न हों तो यकीन जानिए एपस्टीन फ़ाइल्स के मामले में भी यही सब होने जा रहा है।
एपस्टीन अमेरिका का ही नहीं वरन् पूरी दुनिया का निठारी है ।बस फर्क इतना है कि निठारी एक कोठी तक सीमित था और एपस्टीन पूरी दुनिया में फैला हुआ नेटवर्क था। निठारी में बच्चों के कंकाल ज़मीन से बाहर आए थे। एपस्टीन में बच्चों की ज़िंदगी के कंकाल फ़ाइलों से बाहर आ रहे हैं। और दोनों ही मामलों में अपराधियों को बचाने वाली चीज़ एक ही है सत्ता, पैसा और व्यवस्था की सड़ांध। एपस्टीन फ़ाइल्स यह साबित कर चुकी हैं कि यह कोई “एक आदमी” का अपराध नहीं था। यह एक पूरा तंत्र था राजनीति, कॉरपोरेट, मीडिया और तथाकथित एलीट वर्ग की मिलीभगत का तंत्र। नाबालिग लड़कियों को वस्तु की तरह इस्तेमाल किया गया, निजी द्वीपों पर सप्लाई किया गया और अपराध को गोपनीयता और रसूख के पर्दे में ढक दिया गया। फिर एपस्टीन “मर” गया और उसके साथ ही न्याय को भी दफना दिया गया। अब दुनिया को बताया जा रहा है कि जांच चल रही है, प्रक्रिया जारी है, कानून अपना काम करेगा। ठीक वही जुमले, जो निठारी के वक्त दोहराए गए थे।
आज एपस्टीन फ़ाइल्स में नाम, दस्तावेज़, गवाहियाँ, ट्रैवल रिकॉर्ड सब मौजूद हैं। फिर भी संकेत साफ हैं कि बड़े नामों को शायद ही कोई हाथ लगाए। तो सवाल उठता है कि क्या अपराध की भयावहता अब मायने नहीं रखती, अगर अपराधी ताक़तवर हो ? एपस्टीन फ़ाइल्स का सबसे खतरनाक पहलू यह नहीं है कि अपराध हुए। खतरनाक यह है कि दुनिया यह सब जानते हुए भी लगभग निश्चिंत है कि दोषियों को सजा नहीं मिलेगी। यह निश्चिंतता यूँ ही नहीं आती, यह वर्षों की दंडहीनता से पैदा होती है। यही दंडहीनता निठारी में देखी गई थी और यही दंडहीनता आज एपस्टीन में दिख रही है।
दशकों पहले मैने एक पत्रिका के लिए डार्क वेब पर शोध किया था । इंटरनेट के उस काले कोने पर जहाँ कानून, नैतिकता और इंसानियत तीनों को जानबूझकर बाहर छोड़ दिया जाता है। इंटरनेट की वह दुनिया जो बच्चों के यौन शोषण और तस्करी का सबसे घिनौना और सबसे बड़ा “बाज़ार” है।
नाबालिगों के यौन शोषण के वीडियो और तस्वीरें, लाइव स्ट्रीमिंग के ज़रिए शोषण, बच्चों की “ऑर्डर के मुताबिक” सप्लाई, अमीर ग्राहकों के लिए गोपनीय नेटवर्क और क्या कुछ नहीं होता उस दुनिया में। सच कहूं तो एपस्टीन फ़ाइल्स से जुड़ी जानकारियां बाहर आने से पहले यकीन करना कठिन होता था कि दुनिया में कहीं ऐसा भी होता होगा जहां ऑन डिमांड सब कुछ होता है। मानव तस्करी, सेक्स स्लेवरी, लड़कियों की खरीद फरोख्त , ब्लैकमेलिंग और हिंसा, ड्रग्स व नशे का अवैध व्यापार और हथियारों की अवैध बिक्री तक सब कुछ । इस बात पर भी विश्वास नहीं होता था कि दुनिया में कहीं ऐसा भी होता होगा जहां हिंसा और विकृति से जुड़ा कंटेंट, रियल मर्डर वीडियो, यातना के फुटेज, पशुओं और इंसानों पर अत्याचार तथा “रेड रूम” जैसे कथित लाइव शो आयोजित होते हैं। मगर अब एपस्टीन फ़ाइल्स के खुलासे के बाद शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बची।
क्या अब भी आपको शक है कि पूरी दुनिया निठारी की कोठी नहीं बनती जा रही ? तहखानों में बच्चे हैं, ऊपर ड्रॉइंग रूम में ताक़तवर लोग हैं और बाहर न्याय का बोर्ड टंगा है, जो कभी नहीं मिलता । गलियों में होते जघन्य अपराधों पर तो शायद कभी काबू पाया भी जा सके मगर सुदूर द्वीपों और साइबर दुनिया के अंधेरों का क्या किया जाए ? और वह भी तब जब कातिल ही मुद्दई और मुंसिफ भी हों।
साभार – रवि अरोड़ा जी की वाल से