Saturday, July 18, 2026
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भारत के आर्थिक ढांचे पर चाबहार के बहाने भीषण हमला

भले ही दुनिया की नजर में अमेरिका ने ईरान में स्थित उसके चाबहार पोर्ट को ध्वस्त कर दिया। लेकिन, देखा जाय तो यहां सीधे-सीधे पर भारत के आर्थिक ढांचे को एक भीषण हमले में ध्वस्त किया है। यानी भारत द्वारा किए गए एक बड़े निवेश के आधार पर बने इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर ध्वस्त हो गया है जिसके कारण भारत को सीधे-सीधे एक बड़ी आर्थिक क्षति पहुंची है।

प्राप्त खबरों के अनुसार, इस टावर को गिराने के लिए अमेरिकी ने अलग-अलग एक नहीं तीन बल्कि तीन बार हमले किए हैं। पहला हमला 8 जुलाई को हुआ, दूसरा 15 जुलाई को और फिर 16 जुलाई के तीसरे हमले में इसपर मिसाइल दागे हैं, और रात को हुए इस भीषण हमले के बाद आखिरकार ये टावर ध्वस्त हो गया।

चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे कहा जाता है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरता है। चाबहार का ट्रैफिक कंट्रोल तबाह होने से शिपिंग गतिविधियों में बड़ी रुकावट आ सकती है, लागत बढ़ सकती है और खाड़ी के बाहर ईरान की बची हुई कुछ आर्थिक जीवनरेखाओं में से एक पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।

ईरान की फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार चाबहार फ्री जोन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद सईद अरबाबी ने इस हमले की पुष्टि की हेनर बताया है की जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाला टावर नष्ट हो चुका है। ईरान के सरकारी मीडिया ने भी चाबहार से जुड़ी खबरों में बताया है कि हमलों में बंदरगाह पर दो समुद्री पियर्स (घाट) को भी नुकसान पहुंचा है, जिनमें शहीद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है। यह समुद्र के किनारे विकसित एक समुद्री परिवहन सुविधा है जिसे भारत की आर्थिक भागीदारी से विकसित किया गया था।

ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों के कारण चाबहार के लगभग आधे हिस्से में बिजली चली गई है। अमेरिकी हमले में केवल एक चाबहार ही नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस स्टेशन के डॉक को भी भारी नुकसान पहुंचा है। चाबहार पोर्ट ईरान का वो क्षेत्र है, जहां भारत का तगड़ा निवेश हुआ है। यहां भारत 120 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग साढ़े 11 अरब रुपये निवेश कर चुका है और अब अमेरिका के इस हमले में भारत का वो निवेश भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। 16 जुलाई के इस अमेरिकी हमले में जो मैरीटाइम ट्रैफिक टावर गिरा है, वो शाहिद कलंतरी टर्मिनल पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चाबहार पोर्ट में दो अलग-अलग पोर्ट कॉम्प्लेक्स है जिनमें से एक शाहिद कलंतरी पोर्ट और दूसरा शाहिद बेहेशती पोर्ट। शाहिद कलंतरी को आम तौर पर पुराना पोर्ट कॉम्प्लेक्स माना जाता है, जिसे 1980 के दशक में विकसित किया गया था, जबकि शाहिद बेहेश्ती नया और रणनीतिक रूप से ज़्यादा विकसित टर्मिनल है। बेहेश्ती को भारत ने विकसित करवाया था।

भारत ने चाबहार परियोजना में पिछले कई वर्षों से बड़ा निवेश किया है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2024 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड ने ईरान के साथ 10 वर्ष का संचालन समझौता किया था और इसके तहत लगभग 37 करोड़ डॉलर (370 मिलियन डॉलर) तक के निवेश और विकास की योजना बनाई गई थी। यह बंदरगाह भारत के लिए इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को दरकिनार कर व्यापारिक पहुंच मिलती है।

दरअसल, आपको बता दें कि चाबहार ईरान का एक मात्र ऐसा पोर्ट है जो हिंद महासागर से जुड़ा है, इसीलिए भारत ने इसमें एक बड़ा निवेश किया था। यदि यह हमला नहीं होता और भारत यहां से अपना व्यापार नियंत्रित करता तो इससे भारत को एक बड़े आर्थिक लाभ का अवसर प्राप्त हो सकता था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह स्थिति दोबारा आने वाली नहीं है। भारत के तमाम आर्थिक सलाहकार और जानकार यह मान रहे हैं कि अमेरिका ने चाबहार के बहाने भारत के आर्थिक ढांचे पर भीषण हमला किया है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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