Wednesday, July 15, 2026
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“मिलते हैं एक ब्रेक के बाद”: स्वास्थ्य मंत्री जी

समाज को चलाने वाले शासकवर्ग के लोग आजकल इतने निर्दय कैसे होते जा रहे हैं? क्या कारण है कि आज के शासक समाधान की वजह समस्याएं खड़ी करते जा रहे हैं? इस विषय में कोई सोचना ही नहीं चाह रहा है। एक समय था जब शासको को भगवान विष्णु के तौर पर सम्मान दिया जाता था। और एक आज का दौर है जब उनको यह सम्मान दिया जाता है तो वे उसे हजम नहीं कर पाते और उल्टा उसी समाज को प्रताड़ित करने में लग जाते हैं।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान के कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में अब तक 18 प्रसूताओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। लगातार उठ रहे सवालों के बीच स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? लोग पूछ रहे हैं कि, क्या खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाही ने इन महिलाओं की जान ले ली है या यह कोई अकाल मृत्यु है? इन्हीं सब सवालों के जवाब जानने के लिए जब स्थानीय लोगों के साथ-साथ मीडिया ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से जवाब मांगा तो सब दंग रह गए।

दरअसल, विषय से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो हुआ, उसने लोगों को न केवल और ज्यादा नाराज़ कर दिया बल्कि भगवान भरोसे भी छोड़ दिया। पत्रकार वहां लगातार इन मौतों के कारण, जांच की स्थिति और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल पूछते रहे, लेकिन मंत्री महोदय अपनी सीट से उठे, मुस्कुराते हुए कैमरे की तरफ देखा और कहा— “मिलते हैं एक ब्रेक के बाद।”

हालांकि होना-जाना तो कुछ भी नहीं है, लेकिन, इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वहां उपस्थित कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब 18 परिवार अपने अपनों को खो चुके हैं, तब क्या सरकार का सिर्फ यही जवाब होना चाहिए? हालांकि, विपक्ष ने भी इस बयान को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है लेकिन ऐसे हमले का मतलब क्या होता है ये बात सभी जानते हैं।

कांग्रेस के द्वारा अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा गया है कि मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान “दांत फाड़कर हंस रहे थे”, जबकि पूरा प्रदेश माताओं की मौत पर जवाब मांग रहा है। सोच कर देखिए कि क्या यही हमला और विरोध है? हालांकि, कांग्रेस ने आरोप भी लगाया है कि यह सरकार की संवेदनहीनता और जवाबदेही से बचने की कोशिश है। लेकिन ऐसे आरोप लगाने से किसी को क्या घण्टा फर्क पड़ने वाला है?

हालांकि, विपक्ष ने अपनी भूमिका की खाना-पूर्ति करते हुए आगे कहा कि जिन परिवारों ने अपनी बेटियों, बहुओं और पत्नियों को खोया है, उनके लिए यह दृश्य बेहद पीड़ादायक है। साथ ही विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं का जवाबदेही से बचने का आजकल यही आसान तरीका बन गया है। हालांकि, सभी जानते हैं कि यह तो विपक्ष का मात्र एक राजनीतिक आरोप है। बाकी हमाम में तो सारे एक जैसे ही हैं।

यहां यह बात भी जान लेनी चाहिए कि, यह केवल पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य मंत्री अपने बयान को लेकर विवादों में आए हों। क्योंकि इससे पहले जून में बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी उन्होंने अस्पताल प्रशासन का बचाव करते हुए संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को पार करते हुए कहा था कि मरीज “पैदल चलकर, नाचती हुई आई थीं या बीमार होकर?” इस पर मौके पर मौजूद पत्रकारों ने भी सवाल दाग़ दिए थे कि भला “कोई गर्भवती महिला नाचते हुए कैसे आ सकती है?” वैसे तो उस बयान की भी काफी आलोचना हुई थी, लेकिन सोच कर देखिए की उससे भी किसी मंत्री या सरकार को घंटा फर्क पड़ा था? यानी अगर फर्क पड़ता तो यहां दोबारा ऐसी हरकत नहीं होती।

सबसे बड़ा सवाल तो अब यहां फिर से यही उठ खड़ा हुआ है कि उन 18 प्रसूताओं की मौत के बाद जवाबदेही किसकी तय होगी? क्या सिर्फ बयानबाज़ी ही होती रहेगी, या फिर जांच के बाद उन सभी को दो-दो, चार-चार लाख रुपए देकर मामले को निपटा दिया जाएगा और क्या उसके बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होगी?

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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