Skip to content
18 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • भाषा-साहित्य
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति
  • हिन्दू राष्ट्र

शंकराचार्य परंपरा का उल्लेख भविष्यमहापुराण में

admin 15 December 2025
kurukshetr dharmaanlankaran 2025 award
Spread the love

भविष्यमहापुराण के चौथे खण्ड के दसवें अध्याय के कलियुगीय इतिहाससमुच्चय के अनुसार, माता सती के द्वारा यज्ञस्थल पर देह त्यागने के बाद राजा दक्ष प्रजापति के उसी यज्ञ को नष्ट करने के लिए क्रोधित होकर भगवान शिव ने “वीरभद्र” का रुद्र रूप धारण किया, जिसमें वीरभद्र के उस रुद्र रूप के अनुसार उनके तीन मस्तक, तीन नेत्र तथा तीन चरण थे। यज्ञ भंग होने के पश्चात ब्रह्मा जी ने रुद्र की स्तुति कर उनको शांत किया और सूर्य के तुलाराशि में होने पर स्वयं ब्रह्मा जी ने रुद्र को 17 दिनात्मक चन्द्रमण्डल में स्थापित कर दिया। उसके पश्चात वे अपने सप्तलोक अर्थात सातवें लोक को प्रस्थान कर गए। तब चन्द्ररूपी रुद्र ने सातों लोकों पर (भूः, भुवः, स्वः महः, जनः, तपः व सत्यलोक) अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

kurukshetr dharmaanlankaran 2025 awardब्रह्मा जी द्वारा दिए गये इस सम्मान को देखकर वीरभद्र अर्थात भगवान शिव के अंश अवतार रुद्र अत्यन्त हर्षित हो गये और अपनी देह का एक अंश भैरवदत्त के यहाँ भेज दिया। वह उनके यहाँ पुत्र रूप से अवतार लेकर घोर कलिकाल में “शंकराचार्य” के नाम से पृथिवी पर प्रसिद्ध हो गया।

शंकराचार्य नाम वाले उस गुणी और ज्ञानी बालक ने ब्रह्मचारी होकर शांकरभाष्य की रचना की तथा शैवमार्ग का प्रदर्शन किया। वह मार्ग त्रिपुण्ड्र, चन्दन, रुद्राक्षमाला तथा पंचाक्षर मन्त्र के रूप में शैवगण के लिये मंगलकारी शंकराचार्य निर्मित है। इस प्रकार शंकराचार्य जी वीरभद्र अर्थात भगवान शिव के अंश अवतार हुए।

कुछ लोगों को लग रहा होगा कि माता सती के द्वारा यज्ञस्थल पर देह त्यागने और वीरभद्र के अंश अवतार की घटना के समय और आधुनिक समय में बहुत अधिक अंतर है और इस परंपरा में तो करीब ढाई हजार वर्षों का ही इतिहास बताया जाता है। तो उनको ये जान लेना चाहिए कि मात्र चतुर्युग की घटनाओं, मन्वन्तरों की घटनाओं को ही नहीं बल्कि कल्पों की घटनाओं को भी अधिकतर सनातन के पुराण ग्रंथों में आजतक जस की तस संजो कर रखा है और आज भिन्न कथाओं की कड़ियां एक दूसरे से जस की तस जुड़ती हैं।

यहां यह आवश्यक नहीं है कि हर एक घटना जिनका उल्लेख हम अभी के युग में पढ़ रहे हैं वे केवल अभी के अथवा इसके पिछले युग में ही घटित हुई होती हैं। असल में तो कई पौराणिक घटनाएं ऐसी हैं जो युगों ही नहीं बल्कि मन्वन्तरों और कल्पों तक से ली गई हैं। अर्थात हर एक चतुर्युग, मन्वंतर और कल्पों में घटने वाली घटनाएं लगभग समान होती है।

इस आधार पर शंकराचार्य परंपरा मात्र इसी कलयुग की नहीं बल्कि पिछले कई कलियुगों, चतुर्युगों, मन्वन्तरों और कल्पों से लगातार चली आ रही है। और वीरभद्र के रूप में अर्थात भगवान शिव के अंश अवतार रुद्र का हम साक्षात दर्शन कर पा रहे हैं। ठीक उसी प्रकार से जिस प्रकार साक्षात सूर्य देवता हर किसी को, हर युग में अपनी रोशनी के रूप में ऊर्जा देते आ रहे हैं।

इसके अलावा वायु पुराण में भी लिखा है कि त्रिकालदर्शी वह माना जाता है जो किसी भी चतुर्युगी, मन्वंतर अथवा कल्प की घटना को अगले मन्वंतर अथवा अगले चतुर्युग के लिए जस की तस मानकर चलता है और उनका उल्लेख करता है। जैसे भविष्य पुराण की घटनाएं जो पिछले कलियुग में अथवा पिछले से भी पिछले चतुर्युग में घटित हो चुकी है वही घटनाएं जस की तस वर्तमान में भी घटित होती है और इन सब को जानने वाला अथवा विस्तार से बताने वाला ही त्रिकालदर्शी माना जाता है।

#kgf #शंकराचार्य #dharmwani #Ajaychauhan72 #भविष्यपुराण

About The Author

admin

See author's posts

109

Post navigation

Previous: संतान चाहने वाले पुरूष को…
Next: मुंबई टीवी सीरियल के कलाकारों ने किया शंकराचार्य जी का दर्शन व लिया आशीष

Related Stories

National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

admin 15 March 2026
Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026

Trending News

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 1
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 2
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 3
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 4
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 5
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026

Total Visitor

093175
Total views : 171004

Recent Posts

  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.