अजय चौहान | आज भारत में और खासकार हिन्दुओं के साथ जहां भी जो भी घटनायें हो रही हैं जिनमें हिन्दू महिलाओं के खिलाफ या हिन्दू बाल यौन शोषण, लव जिहाद, एकाएक हिन्दू परिवारों के विवाहिक संबंधों अजीब सी लड़ाईयां, तलाक, बैंक घोटाले, फसल घोटाले, मिलावती भोजन, गो हत्या, जात-पात की बिदाई, कथा वाचकों के शुद्ध सनातनी प्रवचनों में एकाएक अलि मौला घोटाले, मंदिरों का धन चोरी होना, बेतहाशा महंगाई, करनी सेना का बेवजह आंदोलन, एकाएक इंटरनेट पर अश्लील सामग्री की भरमार, मंदिरों और धार्मिक जुलूसों पर हमले, अचानक भारत के नार्थ ईस्ट के राज्यों के टूटने का खतरा, 80 करोड़ लोगों को बिना कारण लम्बे समय तक मुफ्त राशन, बेरोजगारी का सैलाब, मीडिया में फेक न्यूज़, चुनावों में मुफ्त के वादे, कोरोना वैक्सीन का मुफ्त टीकाकरण, अचानक इतने भूकंप आना, बेमौसम औले गिरना, आंधी तूफ़ान, बारिश, या फिर तेज़ गर्मी, रूस -युक्रेन वार या फिर इजराइल का संकट या फिर ऐसे ही आप खुद भी किसी भी मसले को इसमें जोड़ कर देख सकते हैं। ये सब साधारण, प्राकृतिक या स्वाभाविक नहीं हैं।
जरा सोचिये की हिन्दुओं के बीच रहकर एक हिन्दू धर्मगुरु जो सोशल मीडिया पर आज अपने प्रचार में सबसे अधिक धन खर्च करता है और उसकी कमाई भी केवल दान ओर चल पा रही हो वह यहां तक भी कह सकता है की – “If god comes I will not listen to him, because I know better than hin.” तब भी उसके आसपास सैकड़ों हिन्दू VIP लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। इसी तरह से स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था की वो अपने रक्त से इसामसीह के चरण धोना चाहते हैं, सोचिये की अगर यही शब्द और वाक्य किसी अन्य धर्म के धर्मगुरुओं के द्वारा कहे जाते तो क्या होता? ऐसे मुने भला क्यों न हिन्दुओं के खिलाफ कोई खुलकर षड्यंत्र करे?
कुछ लोग ये सोच सकते हैं और कह सकते हैं की ये कैसी बकवास है? ये सब तो होता ही रहता है, इतनी आबादी है, इतना बड़ा देश है, इतने लोग हैं, इतनी समस्याएं हैं और इतने दिमाग़ हैं की उनको समझना ना मुमकिन है। इसलिए ऐसा होता ही रहता है और हमेशा से होता आया है। कोई भी सरकार इनपर अंकुश नहीं लगा सकती, यही प्रकृति का स्वभाव है और यही विधाता का खेल है, वगैरह-वगैरह।
लेकिन, आश्चर्य है की भारत से बाहर ख़ासजर यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और वो अफ्रीका जो सबसे कम पढ़ा लिखा आबादी वाला और सबसे गरीब माना जाता है वो भी इस षड्यंत्र को समझ चूका है। इसलिए उन्हीने किसी तरह इन घटनाओं पर काबू पा लिया है या इन घटनाओं का प्रतिशत बहुत कम कर लिया है।
भारत की आबादी का करीब करीब 99 प्रतिशत भाग और उनमें से भी हिन्दू आबादी इसको समझना भी नहीं चाहती है। हिन्दुओं को तो ऐसा लगता है की जैसे शत प्रतिशत “अर्धमलेच्छ” ने समय से पहले ही मलेच्छ बना डाला है। भारतीय मीडिया में वो ख़बरें है ही नहीं जो वास्तव में विदेशी मीडिया खूब दिखा रहा है, जैसे की बांग्लादेश की वर्तमान में ही रही भयंकर हिंसा ओर टेरीफ वार में भारतीय मीडिया द्वारा मौन रहना, आखिर ऐसा क्यों?
भारत में आज क्रिस्चियन आबादी जितनी भी है उसमें उस प्रकार की कोई समस्या नहीं देखने या सुनने को मिल रही है जिसको हिन्दू आबादी झेल रही है, सिक्ख समुदाय भी शांत और मौन है। दरअसल, कारण है की ये समुदाय इस षड्यंत्र को न केवल समझ रहे हैं बल्कि इन षड़यंन्त्रों से दूर भी हो चुके हैं या उनको किसी के द्वारा दूर कर दिया गया है।
याद रखना की मुस्लिम आबादी छोटा सा बच्चा भी अपने मजहब के विरुद्ध हो रहे षड्यंत्र को समझ जाता है। इसके अलावा उनको हर एक जुमे के दिन यही सिखाया और बताया जाता है। क्रिस्चियन समुदाय को भी बाहर से या अपने आकाओं या पोप आदि के द्वारा इशारा कर दिया जाता है, सिख समुदाय भी अब बाहर से इन इशारों को समझ रहा है। और इन अन्य सभी धार्मियों को उनकी अपनी सरकारे, धर्म गुरु आदि स्वयं षड़यंन्त्रों से पहले ही समझा देते हैं, इशारा जर देते हैं।
लेकिन ऐसा नहीं है की हिन्दू आबादी के धर्म गुरु जैसे शांकराचार्यों ने या ऐसे ही कुछ अन्य इक्का-दुक्का धर्म गुरुओं ने भी इन षड़यंन्त्रों के विरुद्ध पहले ही इशारा न किया हो। सोशल मीडिया के माध्याम से आज हमारे हिन्दू हितेषीयों ने भी इन षड़यंन्त्रों के खिलाफ बार-बार आगाह किया है लेकिन समस्या ये आ रही है की आम हिन्दू अपने मूल देवता और मूल धर्म को छोड़ कर आज व्यक्ति को देवता और उनके संघठनों को धर्म मान बैठा है। जबकि मुस्लिम, क्रिस्चियन और सिक्ख आबादी का कोई भी नेता हो, वो उनका आदर्श नहीं है, कोई भी पार्टी हो वो उनके लिए मायने नहीं रखती। बस जो उनके धर्म ग्रंथों में लिखा है वही सत्य है। जबकि हमारे शांकराचार्यों को हम खुद ही गाली देते हैं और उसी का लाभ लेकर वे अब टार्चर कर रहे हैं।
रही बात हिन्दू विरोधी षड़यंन्त्रों की तो याद रखना इसके लिए बहुत सी सामग्री आज इंटरनेट पर उपलब्ध है ये जानने के लिए की ये सब अचानक इतना हो क्या रहा है? क्यों हो रहा है? कौन करवा रहा है? उसमें उसको क्या लाभ है?
ये भी याद रखना की इन विषयों पर यदि आप समाधान खोजना चाहते हैं तो आपको नहीं मिलेगा, लेकिन जागरूकता चाहते हैं तो बहुत कुछ मिल जाएगा। मगर आपका ज्ञान किस स्तर का और कितना है, किसी भी नेता विशेष के प्रति यदि आपका लगाव है तो आप जागरूकता से जुडी कोई भी जानकारी का कभी भी नहीं खोज पाएंगे। भले ही वह जागरूकता भरा कंटेंट आपके सामने होगा या आप उसको एक या दि बार देख, सुन या पढ़ भी चुके होंगे। क्योंकि यही “अर्धमलेच्छ” भी चाहता है की उसका प्रचार भी हो और वह पकड़ा भी न जाय। ये भी याद रखना की जाने अनजाने हम स्वयं भी उसका खूब प्रचार या तो कर चुके हैं या अब भी कर ही रहे हैं।