Tuesday, May 12, 2026
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एक ऐसा प्रधानमंत्री, जो आज तक गायब है

दुनियाभर के देशों में ऐसे कई प्रधानमंत्री हुए हैं जो अपने अलग अंदाज़ों और अपनी कार्यशैलियों और शौकीन मिज़ाजों के लिए जाने जाते हैं. और यह भी सच है कि सभी देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की सुरक्षा इतनी मज़बूत होती है कि उनके आसपास कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता.

हर एक देश के लिए उसके प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति सबसे अहम् होते हैं. यानी वे क्या करते हैं, कितनी देर तक सोते हैं, क्या खाते हैं, क्या पीते हैं और घर से ऑफिस या ऑफिस से घर या फिर किसी भी दूसरी जगह जाना या आना है तो उसके हर प्रकार के टाइम टेबल सभी कुछ निर्धारित होते हैं. यहां तक कि वे लोग कितने देर तक बाथरूम में रहते हैं और कितनी देर तक नहाते हैं सब कुछ.

हर एक वीआईपी का जीवन और उसके जीवन से जुड़ी हर एक पल की जानकारी उसकी सुरक्षा करने वालों के पास होती है. फिर चाहे वो छोटे से छोटा देश हो या फिर कोई बड़ा और शक्तिशाली देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हो.

Harold Holt Australian Ex PM
श्रीमान हेरोल्ड होल्ट को ऑस्ट्रेलिया की तमाम सुरक्षा और जासूसी एजेंसियों के द्वारा बहुत ढूंढा गया, लेकिन वो कहीं नहीं मिले। आखिरकार 20 दिसंबर 1967 को, यानी चार दिनों के बाद उनकी खोज बंद कर दी गई और उन्हें आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया.

लेकिन आज यहां हम एक ऐसे देश के प्रधानमन्त्री की बात करने  जा रहे हैं जो इसी तरह के कड़े सुरक्षा घेरे के बीच से अचानक गायब हो जाते हैं. और न सिर्फ गायब हो जाते हैं, बल्कि आज तक उनके बारे में कोई जानकारी भी नहीं मिल पाती है कि आखिर वे गए तो गए कहाँ? क्या उनको जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

हैरानी की बात तो ये है कि वो ज़िंदा हैं भी या नहीं, इसके लिए उनके देश ने हर वो प्रयास किया जो उन्हें खोजने के लिए किया जाना चाहिए था. लेकिन, हैरानी की बात है कि आज तक भी उनके बारे में कोई जानकारी मिल ही नहीं पाई है.

जी हाँ, ये सच है. और ये कोई बहुत अधिक पुरानी या ऐतिहासिक बात नहीं बल्कि आज से मात्र 56 – 57 वर्ष पुरानी बात है. और उन प्रधानमन्त्री महोदय का नाम है हेरोल्ड एडवर्ड होल्ट। जी हाँ हेरोल्ड एडवर्ड होल्ट, जो कि ऑस्ट्रेलिया के 17वें प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 26 जनवरी, 1966 को प्रधानमंत्री का पद संभाला था।

उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री मेनजिस का कार्यकाल के पूरा होने के बाद निर्विरोध चुन लिया गया था. जबकि उसी वर्ष ऑस्ट्रेलिया में हुए आम चुनावों में उन्हें फिर से भारी जीत हासिल हुई थी।

पांच अगस्त वर्ष 1908 को न्यू साउथ वेल्स के स्टैनमोर में जन्मे हेरोल्ड एडवर्ड होल्ट तैराकी और मछली पकड़ने के बहुत शौकीन हुआ करते थे. हैरानी तो इसबात की होती है कि जब वे तैराकी के बहुत शौकीन थे तो भला पानी में से अचानक गायब कैसे हो सकते थे? जी हाँ पानी में से वे गायब हो गए थे, और वो भी अपने कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़कर.

दरअसल, खबरों के अनुसार घटनाक्रम कुछ यूँ हुआ कि 17 दिसंबर 1967 को अपने ही देश ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरिया के शेविओट नामक बीच पर यानी समुद्र के किनारे के पानी में तैरने के दौरान हेरोल्ड एडवर्ड होल्ट अचानक ऐसे गायब हुए कि आज तक भी उनका कुछ पता ही नहीं चल पाया है.

श्रीमान हेरोल्ड होल्ट को ऑस्ट्रेलिया की तमाम सुरक्षा और जासूसी एजेंसियों के द्वारा बहुत ढूंढा गया, लेकिन वो कहीं नहीं मिले। आखिरकार 20 दिसंबर 1967 को, यानी चार दिनों के बाद उनकी खोज बंद कर दी गई और उन्हें आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया. हैरानी तो इस बात की होती है कि उस खोजबीन के दौरान उनका शव मिलना तो दूर की बात, उनका ऐसा कोई एक भी सुराग नहीं मिल पाया जिससे पता चल सके कि आखिर उनके साथ क्या हुआ होगा।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमन्त्री के इस प्रकार रहस्यमय तरीके से गायब होने को लेकर दुनियाभर में कई तरह की बातें होने लगी थीं. किसी ने कहा कि हो सकता है की यह एक षड़यंत्र हो, किसी ने कहाँ कि उन्हें शार्क खा गई होगी, तो किसी ने कहा कि वे खुद ही गायब हो गए होंगे। जबकि कुछ लोगों ने यहां तक भी बता दिया कि उन्होंने आत्महत्या कर ली होगी या फिर हो सकता है कि एलियन आये होंगे और उन्हें यूएफओ में बैठा कर ले गए हों.

बहरहाल जो भी हो, लेकिन माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे किसी बड़े देश के प्रधानमन्त्री का अपने पद पर रहते हुए यूँ भारी सुरक्षा के बीच से अचानक गायब हो जाना और उनका कोई सुराग भी न मिलना कोई मामूली बात नहीं हो सकती.

इसमें किसी भी मनगढ़ंत कहानी को आधार नहीं बनाया जा सकता। लेकिन जो भी हो रहस्य तो आज भी वही है जो उनके गायब होने के दिन से ही बना हुआ था।

– अजय चौहान

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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