Monday, July 13, 2026
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गौंडा भाजपा नेता नौकरी दिलाने के बहाने लुटता था, धरा गया

बीजेपी के दामन पर लगे कलंकों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी थमाने का नाम नहीं ले रही है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश में तो भारतीय जनता पार्टी इन दिनों कई प्रकार से अलग-अलग मोर्चों पर अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के कारण फंसी हुई नजर आ रही है। फिर चाहे उनमें घूसखोरी, हत्या, चंदा-चोरी, मिलावटखोरी, धमकी या फिर ऐसे ही अन्य कितने ही आपराधिक मामले हैं जो प्रदेश में भाजपा के लिए सर दर्द बने हुए हैं।

इन्हीं कुछ प्रमुख अपराधों में से एक जिसको कि गोंडा पुलिस और साइबर सेल ने मिलकर सुलझा, उसमें रविवार 12 जुलाई (2026) को 5 अंतरराज्यीय साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आपको बता दें कि इसमें एक आरोपी भाजपा का पूर्व ओबीसी मोर्चा नगर मंत्री भी शामिल है। इस अपराध के तहत हुई जांच में अब तक 20 से अधिक खातों से 21 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हो चुका है।

पुलिस का कहना है कि, ये आरोपी पहले बेरोजगार युवकों को किसी सोलर कंपनी में नौकरी का झांसा दे कर फंसाते थे और इसके बाद उनका सैलरी अकाउंट भी खुलवाते थे। और इन्हीं अकाउंट्स को ‘म्यूल अकाउंट’ बनाकर देशभर में निवेश, ठगी, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों से हासिल करोड़ों रुपए ट्रांसफर करते और करवाते थे।

प्राप्त खबरों के अनुसार, आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 15 आधार कार्ड, 10 सिम कार्ड, 8 मोहरें, दो मोटरसाइकिल और अन्य कई फर्मों के फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। मामला उत्तर प्रदेश में गोंडा जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र का बताया जा रहा है। स्थानीय खबरों के अनुसार, मामले की शुरुआत सिसई टिकरिया के रहने वाले वीरेंद्र प्रताप और सत्यम तिवारी की गई शिकायत के आधार पर हुई थी। दोनों ने देहात कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उन्हें सोलर कंपनी में 15 हजार रुपए महीने की नौकरी का लालच दिया गया।

21 फरवरी 2026 को विजय सोनी और दीपक गोयल उन्हें प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की बड़गांव शाखा ले गए जहां उनके नाम पर एक सैलरी अकाउंट खोलने की बात कही गई। लेकिन, उनके नाम पर श्री श्याम इंटरप्राइजेज के नाम से करंट अकाउंट खोल दिया गया। लेकिन उस खाते में आरोपियों ने खाता धारक के मोबाइल के बजाय अपना मोबाइल नंबर लिंक करा लिया। इससे नेट बैंकिंग का पूरा कंट्रोल उनके पास आ गया। बताया जा रहा है कि इसके बाद 21 फरवरी से 6 मार्च के बीच उन खातों से आरटीजीएस के जरिए करीब ढाई करोड़ रुपए अलग-अलग खातों से भेज दिए गए। बाद में खाता धारक के बैंक पहुंचने पर उन्हें इस पूरे फर्जीवाड़े का पता चला। पीड़ितों ने बैंक कर्मचारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है।

पुलिस की अब तक कीजांच में पता चला है कि गिरोह पहले बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को नौकरी का झांसा देता था। फिर उन्हें स्थानीय सोनू मोबाइल एंड कंप्यूटर कैफे ले जाया जाता था। वहां फर्जी उद्यम रजिस्ट्रेशन, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और दूसरे दस्तावेज तैयार किए जाते थे। उन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। कई मामलों में बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य बैंकों में भी फर्जी फर्मों के नाम पर खाते खोले गए हैं। आरोपी खाताधारकों से ये कहकर अकाउंट खुलवाते थे कि यह उनका सैलरी अकाउंट है, लेकिन उन खाताधारकों को बिना बताए उनमें अपना मोबाइल नंबर लिंक करवा देते थे।

इससे उन खातों का नेट बैंकिंग का पूरा नियंत्रण यह अपराधी खुद अपने हाथों में रखते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आए पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जाता था। इस प्रकार के संगठित अपराध के मामले का खुलासा होने के बाद केवल गोंडा मैं ही नहीं बल्कि संपूर्ण प्रदेश में पुलिस सतर्क हो गई है। साथ ही प्रदेश के बेरोजगार और खासकर के युवा लोग अब भाजपा के स्थानीय नेताओं से डर के मारे दूरी बनाने लगे हैं।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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