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नैतिक मूल्यों में गिरावट के दौर में तार-तार होते रिश्ते

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नैतिक मूल्यों में गिरावट के दौर में तार-तार होते रिश्ते
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समाज में जिस तरह नैतिक मूल्यों में अनवरत गिरावट देखने को मिल रही है, उससे समाज एवं परिवार में सामाजिक प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वे कर क्या रहे हैं? रिश्तों की मर्यादा यदि इसी प्रकार गिरती रही तो एक दिन ऐसा आयेगा, जब रिश्तों की मर्यादा ही समाप्त हो जायेगी। विगत कुछ घटनाओं पर यदि ध्यान केंद्रित किया जाये तो सारी चीजें अपने आप स्पष्ट हो जायेंगी।

आज रिश्तों की मर्यादा इस कदर गिरती जा रही है कि दो माह की बच्ची से लेकर 80 साल की वृद्धा तक को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है। किसकी नीयत कब खराब हो जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता है। 20 मई को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक नाबालिग युवती के गर्भवती होने पर दी गई शिकायत में खुलासा हुआ कि लड़की के दो सगे भाई जिनकी उम्र 20 एवं 23 वर्ष थी, अपनी मां की अनुपस्थिति में लंबे समय से जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप करते आ रहे थे।

इस प्रकार की घटनाओं  का यदि विश्लेषण किया जाये तो कहा जा सकता है कि संस्कारों में गिरावट की पराकाष्ठा पार हो गई है। इन घटनाओं की श्रृंखला में आगे बढ़ा जाये तो 31 मई को काशीपुर में श्याम नामक युवक ने अपनी मां दयावती से पांच हजार रुपये मांगे किंतु मां ने पैसे देने से मना कर दिया। तब उसने अपने जुड़वा भाई राम तथा अपनी मां के साथ मारपीट शुरू कर दी और राम के सिर पर ईंट दे मारी जिससे उसकी जान चली गई।

राजस्थान के बहरोड़ में 1 मई को अपनी नानी की मृत्यु पर ननिहाल आई एक नाबालिग को घर में अकेली देख कर उसके मामा ने अपनी मां के संस्कार के बाद उसके साथ बलात्कार कर डाला। 27 मई को बिहार के किशनगंज में दिघल बैंक थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को घुमाने ले जाने के बहाने सुनसान खेत में ले जाकर उससे बलात्कार किया और आधी रात को लहू-लुहान हालत में उसे घर पर छोड़ कर फरार हो गया। आखिर इस घटना को देखकर क्या कहा जा सकता है? इससे तो यही साबित होता है कि व्यक्ति किस हद तक गिर सकता है, उसका एक घृणित नमूना है।

ऐसे लोगों को यदि मानसिक रोगी भी मान लिया जाये तो भी ये समाज के लिए निहायत खतरनाक साबित हो सकते हैं। बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। देशभर में ऐसी और भी घटनाएं घटित हुई हैं जिससे इंसानियत एवं मानवता का सिर शर्म से झुक गया और नैतिकता तो जैसे कहीं लुप्त ही हो गई है। 10 जून को पंजाब के फरीदकोट में एक युवक ने नशे के लिए पैसे न देने पर अपनी विधवा मां के सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। 10 जून को ही राजधानी दिल्ली में एक महिला ने अपने पति के विरुद्ध अपनी 17 वर्षी बेटी से बलात्काार करने के आरोप में शिकाय दर्ज करवाई।

इन घटनाओं पर नजर दौड़ाई जाये तो इन्हें कोई सामान्य घटनाएं नहीं कहा जा सकता है। इनकी तह में जाकर इन्हें रोकने के लिए समग्र दृष्टि से कार्य करने की जरूरत है। इस संबंध में जितनी जल्दी आगे बढ़ लिया जाये उतना ही अच्छा होगा।

– जगदम्बा सिंह

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