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कहानी हनुमानजी से जुड़े स्थलों की

admin 29 May 2023
साक्षी हनुमानजी मंदिर

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है, मान्यता है की यहाँ भगवान राम ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना एवं पूजा की थी

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हनुमानजी सृष्टि के एक मात्र देवता है जो असीमित शक्तियों के स्वामी हैं । आइये जन्म से लेकर जीवन के अनेक प्रसंगों से जुड़े हनुमानजी के जुड़े स्थलों और मंदिरों को जानते हैं –

 1 – हनुमान जन्मस्थान मंदिर
हनुमानजी के पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजना था इसीलिए हनुमानजी का दूसरा नाम केसरीनंदन एवं आंजनेय भी है । हनुमानजी के पिता कपिक्षेत्र के राजा थे अब यह कपिक्षेत्र वर्तमान समय मे कहाँ है इस पर विद्वानो मे एक राय नहीं है । विद्वानों का मानना है कि कर्नाटक के हम्पी शहर के आस पास का इलाका किष्किंधा (बंदरों का राज्य) है यह वर्तमान के होसपेट रेल्वे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर स्थित है, यहाँ आंजनेयद्री पहाड़ी पर 575 सीढ़ियों से जाकर ऊपर एक मंदिर है ।
मंदिर – हनुमान जन्मस्थान मंदिर, आंजनेयद्री पहाड़ी

स्थान – हनुमानहल्ली, हम्पी, कर्नाटक।

 

2 – आंजनेरी हनुमान मंदिर
भावार्थ रामायण (मराठी) के लेखक संत एकनाथ के अनुसार माता आंजनेय ने अनेक वर्षों तक एक पहाड़ी पर तपस्या की थी फलस्वरूप हनुमानजी उन्हे पुत्ररत्न में प्राप्त हुवे । यह स्थान वर्तमान समय में महाराष्ट्र मे नासिक से 20 किमी पर स्थित है ।
मंदिर – आंजनेरी हनुमान मंदिर।
स्थान – नासिक, महाराष्ट्र।

 

3 – अंजनकुंड हनुमान मंदिर
एक मान्यता यह भी है कि गुजरात के डांग जिले को रामायण काल मे दंडकारण्य प्रदेश कहा जाता था और यही पर ऋषि मातंग का आश्रम था जिसके प्रांगण मे हनुमान जी का बचपन बीता था और यही की पहाड़ियों पर से उन्होने उड़ना सीखा था । यही बगल मे अंजनी जलकुंड भी है जहां हनुमाजी स्नान किया करते थे ।

मंदिर – अंजनकुंड हनुमान मंदिर।

स्थान – डांग, गुजरात।

 

4 – सुग्रीव गुफा मंदिर
हनुमानजी ने अपनी शिक्षा पंपापुर क्षेत्र मे सूर्य और पवनदेव से ली थी, आज यह स्थान पालकोट, जिला गुमला झारखंड मे स्थित है । कहते हैं यही से कुछ दूरी पर किष्किंधा पर्वत है जहां हनुमाजी की मित्रता सुग्रीव से हुई थी । आज इस पर्वत का नाम श्रीमुख पर्वत है जिसके बगल मे सुग्रीव गुफा, शीतलपुर, मलमलपुर, पवित्र निर्झर झरना, हनुमान मंडा, शेषनाग और राक्षस-सर दर्शनीय स्थल हैं ।

मंदिर –  सुग्रीव गुफा मंदिर।

स्थान – पालकोट, गुमला, झारखंड।

 

5 – यन्त्रौद्धारक हनुमान मंदिर 
सीता माता की खोज मे निकले राम, लक्ष्मण  की मुलाक़ात सुग्रीव और हनुमान से ऋश्यमुक पर्वत पर हुई थी जो अभी हम्पी मे स्थित है । यहाँ अंदर पहाड़ी मे एक गुफा है जहां सुग्रीव बाली के डर से रहते थे और सीता द्वारा गिराए आभूषणों को हनुमान एवं सुग्रीव ने यही ऋश्यमुक पर्वत पर पाया था । व्यासतीर्थ मुनि ने यहाँ 15वी सदी मे एक मंदिर का निर्माण करवाया जिसमे 12 बंदर एक दूसरे की पूछ थामे हुवे हैं और वह एक षडमुखी (हेक्सागोनल) आकार मे दिखाई देते हैं जिसे यंत्र कहा गया, जिसके बीच मे हनुमानजी पद्मासन मुद्रा मे बैठे हुवे हैं । इसी स्थान के  आगे चलकर दूसरे किनारे पर वृक्षों की ओट से श्रीराम ने बाली को बाण मारा था
मंदिर –  यन्त्रौद्धारक हनुमान मंदिर ।
स्थान – हम्पी, कर्नाटक।

 

6 – साक्षी हनुमानजी मंदिर
हिन्दू धर्म के चार धामों में से एक धाम रामेश्वरम धाम है जो कि तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है, मान्यता है की यहाँ भगवान राम ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना एवं पूजा की थी । कहते हैं श्रीराम जब पहली बार यहाँ पहुंचे तो एक ऊंची पहाड़ी पर चढ़कर लंका को दूर से देखा आज उसी जगह राम झरोखा बना हुआ है और इस घटना के साक्षी रहे हनुमानजी तो यहाँ साक्षी हनुमानजी का मंदिर है जो अत्यंत प्रसिद्ध है । यह गंधमादन नामक पहाड़ी रामेश्वरम शहर से 5 किमी दूर उत्तर पूर्व दिशा मे है, यहीं से हनुमानजी ने लंका जाने के लिए छलांग भी लगाई थी ।

मंदिर –  साक्षी हनुमानजी मंदिर।

स्थान – रामनाथपुरम, तमिलनाडु।

 

 7– शनि मंदिर
रावण जब सीता को अपनी कैद मे रखा था तो हनुमान जी सीता माता को छुड़ाने के लिए जब लंका पहुँचते हैं तो देखते हैं कि यहाँ पर शनिदेव भी बंद है, हनुमानजी उनको छुड़ाने के लिए प्रयास करते हैं । मान्यता है कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त किया और उन्हे मुक्त कराकर उन्हें मुरैना पर्वतों पर विश्राम करने के लिए छोड़ा था । शनि देव जिस जगह गिरे थे वहां एक बड़ा-सा गड्ढा हो गया था। यह गड्ढा आज भी यहां पर मौजूद है। आज यहाँ शनिदेव के साथ साथ हनुमानजी का भी मंदिर है और यहाँ शनिदेव प्रतिमारूप मे हैं जो शनि पर्वत पर स्थित है, महाराष्ट्र के सिंगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई है । यह अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है ।

मंदिर –  शनि मंदिर।

स्थान – मुरैना, मध्य प्रदेश।

 

8 – श्री भक्त हनुमान मंदिर
श्रीलंका मे भी हनुमानजी के पद चिन्ह मौजूद हैं, कहा जाता है की हनुमानजी बहुत वेग से एक चट्टान पर उतरे थे और आराम किया था, नुवेरा एलिया नाम के क्षेत्र मे स्थित उस जगह का नाम रामाबोदा है । चिंम्यानन्द मिशन द्वारा निर्मित यहाँ एक बड़ा हनुमान मंदिर है ।

मंदिर – श्री भक्त हनुमान मंदिर।

स्थान – नुवेरा एलिया, श्री लंका।

 

9 – हनुमान धारा मंदिर
लंका दहन के बाद हनुमानजी अपनी जली हुई पुंछ को बुझाने के लिए शीतल जल की तलाश मे उड़ते हुवे चित्रकूट पहुंचे थे और वही पुंछ मे लगी आग बुझाई । उस स्थान पर एक प्रसिद्ध मंदिर है जिसे हनुमान धारा कहते हैं । पहाड़ी के शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है। इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं।

मंदिर –  हनुमान धारा मंदिर।

स्थान – चित्रकूट धाम, सतना, मध्य प्रदेश।

 

10 – श्री अलाथीयुर हनुमानकवु  मंदिर
हनुमानजी सीता माता का पता लगाकर आए तो उन्होने सीताजी का पता सबसे पहले राम को बताया और राम ने हनुमाजी के वक्तव्य मे विश्वास जताया । इसी भाव को लेकर सप्तर्षियों मे से एक ऋषि वशिष्ठ ने 3000 वर्ष पूर्व एक मंदिर का निर्माण किया और यह प्राचीन मंदिर वर्तमान समय में केरल मे स्थित है ।

मंदिर –  श्री अलाथीयुर हनुमानकवु मंदिर।

स्थान – मलप्पुरम केरल।

 

11 –  जाखू मंदिर
हनुमानजी जब लक्ष्मण के घायल होने पर संजीवनीबूटी लेने के लिए तो हिमाचल प्रदेश के शिमला के वन प्रदेशों मे उतरकर एक यक्ष से द्रोणपर्वत की दिशा पुछी थी, यक्ष शब्द कालांतर मे याक्षू फिर जाखू हुआ । वह जगह आज भी है, और हनुमानजी के पैरों के निशान भी मौजूद हैं ।

मंदिर –  जाखू  मंदिर।

स्थान – शिमला, हिमाचल प्रदेश।

 

12 – विजेथुवा महावीरन धाम
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तो रास्ते मे उन्हे तपस्वी रूप मे एक राक्षस मिला जिसका नाम था कालनेमी, जिसे मारकर हनुमानजी आगे बढ़े । हनुमान जी अपने पैरों की मदद से उसका वध किया प्रतीकस्वरूप  यहाँ स्थित हनुमानजी की मूर्ति का बायाँ पैर जमीन मे धंसा हुआ है । बाएँ भुजा असुर संहारे जैसा तुलसीदास ने लिखा है । हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर विजेथुवा महावीरन धाम के नाम से जाना जाता है।

मंदिर –  विजेथुवा महावीरन धाम।

स्थान – सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश।

 

13 – मणिपर्वत मंदिर
संजीवनी बूटी लेकर वापस आते समय हनुमानजी को अयोध्या देखने की इच्छा हुई तो जब वह अयोध्या के ऊपर उड़े तो भारत ने उन्हे भ्रमवस राक्षस समझकर उनपर वार किया और हनुमानजी जमीन पर आ गए । वह स्थान जहां हनुमानजी के साथ साथ संजीवनी बूटी का अंश गिरा था उसे आज अयोध्या मे मणि पर्वत के नाम से जाना जाता ।

यह 65 फीट ऊंची छोटी सी पहाड़ी है । जिस पर हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है ।

मंदिर –  मणिपर्वत मंदिर।

स्थान – अयोध्या, उत्तर प्रदेश।

 

14 – वीर आंजनेय अर्धागिरी मंदिर
संजीवनी बूटी ले आते समय रास्ते में जब वो दक्षिण भारत में उड़ रहे थे तो उस पहाड़ के कुछ खंड नीचे गिर पड़े और वो जगह वर्तमान समय मे आंध्र प्रदेश की अर्धागिरी पहाड़ी है जहां हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है ।
मंदिर –  वीर आंजनेय अर्धागिरी मंदिर।

स्थान –  अरगोंडा, चित्तूर, आंध्र प्रदेश।

 

15 – उल्टे हनुमानजी मंदिर
रावण के कहने पर अहिरावण राक्षस जब श्रीराम व लक्ष्मणजी को धोखे से उठाकर पाताल लोक ले गया था तब हनुमानजी उल्टे होकर पृथ्वी लोक से पाताल लोक गए थे। तब से नाम ‘उल्टे हनुमान’ पड़ गया। उल्टे हनुमान की प्रतिमा के नाम से यह विश्वप्रसिद्ध है ।

मंदिर –  उल्टे हनुमानजी मंदिर।

स्थान – सांवेर, इंदौर, मध्य प्रदेश।

 

16 – हनुमानगढ़ी मंदिर
लंका विजय के बाद जब श्रीराम लंका वापस लौट कर आने वाले थे तो सभी लोग उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे, जिस स्थान पर प्रथम बार उनके विमान के दर्शन हुवे और अवधी बोली मे लोगों ने कहा – भए दर्शन, आज वही जगह भदर्शा नाम से ग्राम है और उधर हनुमानजी भगवान श्रीराम के पहले ही अयोध्या पहुँच गए थे और जहां पर उन्होने श्रीराम की प्रतीक्षा की थी आज वही पर हनुमानगढ़ी मंदिर है । वह अयोध्या के प्रथम रक्षक भी हैं ।

मंदिर –  हनुमानगढ़ी मंदिर।

स्थान – अयोध्या, उत्तर प्रदेश।

 

17 – संकटमोचन मंदिर
गोस्वामी तुलसीदास को हनुमानजी ने साक्षात दर्शन दिये थे, बाद मे उसी जगह पर तुलसीदास ने हनुमान मंदिर का निर्माण करवाया । यहाँ हनुमानजी की मूर्ति की विशेषता यह भी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी है, हनुमानजी  के गले में गेंदे ऐवं तुलसी की माला सुशोभित रहती है और उनके सामने रामजी की मूर्ति है। यहाँ हनुमान जयंती बड़े धूमधाम से मनायी जाती है, इस दौरान एक विशेष शोभा यात्रा निकाली जाती है जो दुर्गाकुंड से सटे ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर से लेकर संकट मोचन तक जाती है।

मंदिर –  संकटमोचन मंदिर।

स्थान – वाराणसी, उत्तर प्रदेश।

लेखक – डा. नितीश कुमार ओझा

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