पहले तो हमारी परंपरागत आयुर्वेद पद्धति को नीम हकीम खतरा ए जान बताकर उनसे दूरी बनवाई। फिर कुछ गरीब लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को झोलाछाप बताकर उनपर प्रतिबंध लगवाया और अब खुद ही जिनको कुछ नहीं आता उनको हमारे इलाज के लिए तैयार कर रहे हैं। खुद तो विदेश जाकर इलाज करवाते हैं और कहते हैं मेरा देश बदल रहा है। क्या यही अच्छे दिन हैं? अगले पांच या सात साल बाद मुझे जब इलाज करवाना होगा तो क्या मैं बच पाऊंगा? क्या बाकी लोग भी स्वस्थ रह पाएंगे? क्या साधारण से इलाज के लिए भी हम विदेश जायेंगे?
सोचिए कि चेन्नई के एक डॉक्टर को NEET PG परीक्षा में 800 में से मात्र 9 अंक मिलने के बावजूद पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीट आवंटित हो गई। यह सीट मैनेजमेंट कोटा के तहत काउंसलिंग में दी गई, जिसके बाद मेडिकल समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई डॉक्टरों और संगठनों ने इसे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल बताया।
वहीं NEET UG 2025 में प्रतियोगिता बेहद कड़ी रही, जहां 720 में से करीब 144 अंक केवल काउंसलिंग के लिए पात्र होने की न्यूनतम सीमा थी और टॉपर ने 686 अंक हासिल किए। इसके उलट NEET PG में पिछले वर्षों में कटऑफ में बड़े उतार-चढ़ाव देखे गए। 2025 में SC/ST/OBC के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 0 तक घटाया गया, जिससे बेहद कम अंकों वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के पात्र बने।
मुख्य बिंदु –
* 800 में 9 अंक पर PG सीट आवंटन
* मैनेजमेंट कोटा के तहत मिला प्रवेश
* मेडिकल संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया
* NEET UG में ऊंची कटऑफ और कड़ी प्रतिस्पर्धा
* NEET PG में क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 0 तक घटा
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