Saturday, July 18, 2026
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मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल!

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (UP Lucknow food safety news) में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने होली से पहले जब (गुरुवार को) शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी कर 10,415 किलो मसाले और खोया सीज किया तो उन सभी के होश उड़ गए जो शुद्ध और ताजी मिठाईयां के लिए किसी बड़े ब्रांड पर भरोसा करते हैं। प्राप्त खबरों के अनुसार, इसकी अनुमानित कीमत लगभग 55.91 लाख रुपए बताई जा रही है। वहीं करीब 1 क्विंटल से अधिक एक्सपायर्ड मिठाइयां भी मौके पर ही नष्ट कराई गई, और कुल 15 नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए।

यही कारण है कि इन दिनों उत्तर प्रदेश को लोग मिलावट प्रदेश (Uttar Pradesh) का नाम देने लगे हैं। क्योंकि यहां प्रदूषण और मिलावट का हाल बेहाल होता जा रहा है। इंदौर में हुए जल प्रदूषण के कारण मौतों के बाद जब यूपी में भी कई स्थानों पर पेय जल की जांच की गई तो उसमें भी भयंकर कमियां और खामियां पाई गई। और अब खाद्य पदार्थों में भी यही समस्या देखी जा रही है। खाद्य और पेय पदार्थ की मिलावट के आंकड़ों पर गौर करें तो इन दिनों देश में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर और राजस्थान दूसरे स्थान पर आता है। क्योंकि यहां दूध, तेल, घी, मसाले और मिठाई आदि में सबसे ज्यादा मिलावट होती पाई जा रही है।

प्राप्त खबर के अनुसार, लखनऊ के फैजुल्लागंज स्थित एक बहुत ही प्रसिद्ध ब्रांड हल्दीराम के स्टोरेज में छापेमारी के दौरान करीब 1 क्विंटल 12 किलो एक्सपायर्ड सोनपापड़ी और राजभोग बरामद किया गया। इसका अनुमानित मूल्य लगभग 45 हजार रुपए बताया गया है, लेकिन सोचिए कि यदि बाजार में बिक जाता तो उससे कितने लोगों की सेहत पर असर पड़ता। हालांकि खाद विभाग की टीम ने पूरे स्टॉक को मौके पर ही नष्ट करवा दिया है। वहीं असॉर्टेड पेड़ा, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पेठा और गुजिया के नमूने भी लिए गए।

उसके अतिरिक्त, स्वरूप कोल्ड स्टोरेज, ऐशबाग में कार्रवाई के दौरान 8,499 किलो काली मिर्च और 378 किलो खोया भी सीज किया गया। कुल मिलाकर 10,415 किलो अलग-अलग प्रकार के कई खाद्य पदार्थ, जिनकी अनुमानित कीमत 55.91 लाख रुपए है, को भी जब्त कर लिया गया। इसके अलावा सौंफ और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए गए।

महानगर स्थित ग्लोब कैफे से भी पनीर और गुझिया के नमूने संग्रहित कर विभाग ने स्पष्ट किया कि सभी नमूनों को विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यदि इनमें कुछ भी कमी पाई जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत इनपर भी आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्राप्त खबरों के अनुसार, जांच अभियान के दौरान 112 किलोग्राम खाद्य पदार्थ जिसकी अनुमानित कीमत करीब 45 हजार रुपए बताई जा रही है को जांच टीम के द्वारा मौके पर ही नष्ट कराया गया। इसी तरह खाद्य सुरक्षा विभाग की ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ टीम ने 26 फरवरी को सीतापुर रोड स्थित मड़ियांव क्षेत्र में विशेष जागरूकता अभियान चलाया और आन लोगों को खुले में बिकने वाले चटक रंगीन पापड़ और कचरी आदि के सेवन से बचने की भी सलाह दी।

जांच टीम के अधिकारियों ने बताया कि इन उत्पादों में अक्सर प्रतिबंधित सिंथेटिक रंगों का उपयोग किया जाता है, जो पेट की गंभीर बीमारियों, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, बच्चों में एलर्जी और लंबे धीरे-धीरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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