Tuesday, June 16, 2026
Homeइतिहासऐतिहासिक नगरKumbhalgarh Fort : अद्भुत, आश्चर्यजनक कुम्भलगढ़ किला

Kumbhalgarh Fort : अद्भुत, आश्चर्यजनक कुम्भलगढ़ किला

राजस्थान, मेवाड़ में स्थित इस किले की दीवारें 38 किलोमीटर की दूरी तक फैली हुई हैं। चीन की दीवार के बाद अपने विस्तार के अनुसार यह दीवार दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है। कुम्भलगढ़ का किला राजस्थान ही नहीं भारत के सभी दुर्गों में विशिष्ठ स्थान रखता है।

उदयपुर से 70 किमी दूर यह किला मेवाड़ के यशस्वी महाराणा कुम्भा की सूझबूझ व प्रतिभा का अनुपम स्मारक है। इसका निर्माण सम्राट अशोक के द्वितीय पुत्र संप्रति के बनाए दुर्ग के अवशेषों पर 1443 से शुरू होकर 15 वर्षों बाद पूरा हुआ था।

वास्तुशास्त्र के नियमानुसार बने इस दुर्ग में प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए संकटकालीन द्वार, महल, मंदिर, आवासीय इमारतें, यज्ञ वेदी, स्तम्भ, छत्रियां आदि बने हैं।

Darjeeling Tourism : किंगडम आफ हिल्स दार्जलिंग

– कुम्भलगढ़ का निर्माण 15वीं सदी में महाराणा कुम्भा ने किया था। मेवाड़ के 84 में से 32 किलों को महाराणा ने बनवाया।

– कुम्भलगढ़ किले को देश का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता है जिसे आज तक सीधे युद्ध में जीतना नामुमकिन रहा है। गुजरात के अहमद शाह से लेकर महमूद खिलजी सभी ने आक्रमण किया लेकिन कोई भी युद्ध में इसे जीत नही सका।

– इसकी परकोटे की दीवार लंबाई में दुनिया में चीन की दीवार के बाद दूसरे स्थान पर है। इसकी लंबाई 38 किलोमीटर है और इसे भारत की महान दीवार भी कहा जाता है।

– कुम्भलगढ़ मेवाड़ के महाराणाओं की शरणस्थली रहा है। विपत्तिकाल में हमेशा महाराणाओं ने इस दुर्ग में शरण ली है। कुम्भलगढ़ किले को अब यूनेस्को की वल्र्ड हेरिटेज साईट के रूप में मान्यता मिली है और इसे राजपूत पहाड़ी दुर्ग कला का अद्वितीय नमूना माना गया है।

– कुम्भलगढ़ से एक तरफ सैकड़ो किलोमीटर में फैले अरावली पर्वत श्रृंखला की हरियाली दिखाई देती हैं जिनसे वो घिरा है, वहीं दूसरी तरफ थार रेगिस्तान के रेत के टीले भी दिखते हैं।

dharmwani.com

admin
adminhttp://dharmwani.com
देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments