Tuesday, June 16, 2026
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Future of Media: कार्यक्रम ख़त्म होते ही सबकुछ ख़त्म हो जाएगा!

सोशल मीडिया पर तरह की भविष्यवाणियों को लेकर सैकड़ों प्रकार के वीडियो और लेख देखने को मिल जाते हैं। इनमें से किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बताया हुआ है। एक ही पुस्तक और एक ही सन्दर्भ को हर एक ने अपने अनुसार तोड़-मरोड़ कर पेश कर दिया है। कई भविष्यवक्ताओं ने भी पैसे कमाने के लिए अपने-अपने तर्क दे डाले हैं। ऐसे में जब मैंने देखा की इन्टरनेट पर सैकड़ों ही नहीं बल्कि हज़ारों या शायद लाखों लोगों ने अपनी-अपनी राय या विचार व्यक्त किये हैं।

अगर हम सोशल मीडिया से हटकर मैनस्ट्रीम-मीडिया की और जाएँ तो यहाँ भी हमें कुछ इसी प्रकार से मनघडंत और अधिकतर विदेशी लोगों की भविष्यवाणियों पर सबसे अधिक जोर दिया गया लगता है। और उनमें भी नास्त्रेदमस की उन्हीं कुछ घिसीपिटी भविष्यवाणियों पर सबसे अधिक चर्चा को दिखाया जाता है।

सच कहें तो हमारे मैनस्ट्रीम-मीडिया को स्वयं ही नहीं मालुम की इस प्रकार के किसी भी विषय पर चर्चा करने से पहले कितना गहन अध्ययन करना पड़ता है और की प्रकार के विषय से सम्बंधित जानकारों और विशेषज्ञों की इसमें राय लेनी होती है लेकिन, हर एक कठिन कार्य को दरकिनार करते हुए बस शुरू हो जाते हैं ज्ञान देने।

भविष्यवाणियों पर कुछ टेलीविज़न चैनल तो इतना अधिक ज्ञान देने लग जाते हैं कि बस वे ही हैं सबसे अधिक ज्ञानी। जबकि कुछ तो इतना डराने लगते हैं कि इस जानकारी को देने वाला कार्यक्रम ख़त्म होते ही सबकुछ ख़त्म हो जाएगा। ऐसे टेलीविज़न चैनल और ऐसे ज्ञान देने वालों से सावधान रहने की जरुरत है। ऐसे टेलीविज़न चैनलों की जानकारियों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं होता और ना ही इनको धर्म का ज्ञान होता है।

अपने दर्शकों को मुर्ख बनाकर विज्ञापन बटोरने के लिए ही ऐसे टेलीविज़न चैनलों को कुछ विचारधाराएँ विशेष सहायता या लालच राशी देकर ये कार्य करवाती हैं। तभी तो ये लोग इस प्रकार से कुछ भी कार्यक्रम शुरू कर देते हैं और हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए तथा अपने आकाओं की नज़र में नंबर बनाने के लिए आये दिन कुछ न कुछ ऐसा दावं चल देते हैं कि सनातन धर्म भी बदनाम हो जाए और उनके नंबर भी बनते जाएँ।

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adminhttp://dharmwani.com
देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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