Monday, May 18, 2026
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चालीसा क्या है, सबसे अधिक क्यों होता है हनुमान चालीसा का पाठ? | About Chalisa

अजय सिंह चौहान || सनातन परंपरा में चालीसा को करीब-करीब हर कोई जानता ही है। न सिर्फ जानते हैं बल्कि चालीसा का पाठ भी करते रहते हैं। फिर चाहे वह चालीसा हनुमान जी की हो, शिव जी की हो, गणेश जी की हो, माता दूर्गा की हो या फिर किसी अन्य देवी या देवता की हो। लेकिन, क्या कभी किसी ने सोचा है कि चालीसा का मतलब क्या होता है। क्या चालीसा सिर्फ हनुमान जी की, शिव जी की या फिर श्री दुर्गा जी की ही हो सकती है, या फिर किसी अन्य देवी या देवता की भी हो सकती है।

हालांकि, आजकल तो कई अन्य प्रसिद्ध लोगों की भी चालीसा देखने और सुनने को मिलती है। जिनमें बिहार के एक मंत्री महोदय के नाम से ‘लालू चालीसा‘ के बारे में भी कईयों ने सूना ही होगा। इसके अलावा साईं बाबा की चालीसा के बारे में सूना होगा।

ऐसे में यहां सबसे बड़ी बात या सबसे बड़ा सवाल हम सबके सामने आता है कि आखिर ये ‘चालीसा’ क्या है? क्या चालीसा कोई आरती का रूप है या फिर कोई गुणगान है या फिर किसी संकट से बचने का मंत्र या माध्यम है? क्या है चालीसा?

दरअसल, चालीसाओं का उद्देश्य आध्यात्मिक रुप से अपने किसी भी आराध्य देव या देवी का गुणगान करना या फिर किसी भी महान राजा या महान व्यक्ति के द्वारा किये गये उसके अच्छे कार्यों का प्रचार या फिर जनसमुदाय या जनमानस पर उसका प्रभाव डालने के लिए होता है।

यह भी माना जाता है कि ‘चालीसा‘ को किसी भी काव्य रचना या किसी भी अन्य माध्यम से कहीं अधिक प्रभावशाली पाया गया है। उदाहरण के लिए यहां हम हनुमान चालीसा को ही देखें तो यह इस बात का उदाहण है कि ‘हनुमान चालीसा‘ की पंक्तियों के माध्यम से ही आज भी हम हनुमान जी के उन विशेष कार्यों को हर बार याद करते रहते हैं।
यानी, चालीसा मात्र किसी भी देवी या देवता की आराधना या स्तुति के लिए ही नहीं है, बल्कि चालीसा के माध्यम से आप अपने किसी भी प्रियजन की, या अपने आराध्य देव या देवी की स्तुति का गान कर सकते हैं और उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। और अगर आप चाहें तो खुद भी एक नई चालीसा की रचना कर सकते हैं।

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वास्तव में देखा जाये तो ’चालीसा’ मात्र एक साधारण शब्द ही नहीं है, बल्कि चालीस पंक्तियों की एक विशेष काव्य रचना होती है जिसे ‘चालीसा‘ कहा जाता है। और यही चालीसा, चैपाई छंदों में लिखी हुई होती है।

अब यहां यह भी सवाल उठता है कि भला चैपाई क्या होता है? तो यहां यह भी बता दें कि चैपाई में चार चरण होते हैं। और इसी चैपाई की रचना के माध्यम से हम अपने किसी भी आराध्य देव की स्तुति या फिर उसके अच्छे कार्यों का गुणगान करते हैं।

उदाहरण के लिये यहां हम तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई हनुमान चालीसा की इन सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों को देख सकते हैं –
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहूं लोक उजागर।।ये दो चरणों में लिखी गई आधी चैपाई है जिसे अद्र्धाली कहा जाता है। और यह अद्र्धाली भी अपने आप में एक लोकप्रिय छंद हो सकता है। लेकिन, अगर यहां हम एक चैपाई की बात करें तो इसके लिए हमें यहां इस अद्र्धाली के साथ वाली बाकी दो पंक्तियों को, यानी इसके बाद आने वाली अन्य दो पंक्तियों को भी देना होगा जैसे कि –
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।शेष इन दो अद्र्धाली या दो पंक्तियों को मिलाकर ही चार पंक्तियां बनती हैं जिसे एक चैपाई कहा जाता है।

अब यहां एक बार फिर से वही सवाल आता है कि आधी-आधी चैपाईयां मिलकर भला चालीसा कैसे बन जाती हैं? तो, यहां उदाहरण के तौर पर तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई इन्हीं पंक्तियों को यानी –
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहूं लोक उजागर।।
वाली इसी रचना को आधार मान कर बात करें तो तुलसीदास जी द्वारा ऐसी कुल 80 पंक्तियां लिखी गई हैं, जिनको 40 अद्र्धालियों के रूप में गिना जाता है, और यही 40 अद्र्धालियां मिलकर चालीसा का रूप लेती हैं। अगर यहां हम सीधा-सीधा कहें तो इन्हीं 40 पदों या फिर 40 अद्र्धालियों के रूप के कारण इस विशेष काव्य रचना को चालीसा कहा गया है। आसान भाषा में कहें तो इसमें चालीस लाइनें होती हैं इसीलिए इसे चालीसा कहा जाता है।

चालीसा एक प्रकार की प्रार्थना को कहा जाता है जो किसी भी भाषा या बोली के सीधे और सरल शब्दों में रची जा सकती है। सरल भाषा में होने के कारण चालीसा को आसानी से पढ़ा और गया जा सकता है।

ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए चालीसा को सबसे सरल, आसान और एक लोकप्रिय तरीका माना जाता है।

चालीसा की एक और विशेषता होती है कि इसके पाठ के लिए किसी भी खास नियम या खास समय की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि आप प्रति दिन अपने किसी भी ईष्ट देव या देवी की चालीसा का पाठ करते हैं तो आपके के जीवन में इसका अद्भुत प्रभाव भी अवश्य ही पड़ता है।

और क्योंकि हनुमान जी को यह वरदान मिला हुआ है कि वे इस धरती पर हमेशा रहेंगे, शायद इसीलिए हनुमान चालीसा का पाठ सबसे अधिक किया जाता है।

यानी यहां हम यह कह सकते हैं कि चालीसा ऐसे किसी भी देवी या देवता के लिए या फिर अपने किसी भी प्रियजन या विशेष व्यक्ति के लिए लिखी जा सकती है जो हमारे लिए सबसे प्रिय हो।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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