Skip to content
4 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • विशेष

फादर कामिल बुल्के: हिंदी को भारत में सम्मान दिलाने वाला एक मिशनरी

admin 6 July 2022
Father Kamil Bulke
Spread the love
लेखक: शाहजहांपुर के डॉ. स्वप्निल यादव आधृत प्रकाशन, भोपाल के द्वारा साहित्य सम्मान से सम्मानित

डॉ. स्वप्निल यादव || बात पांच साल पहले की है, जब हिंदी कवि स्व. केदारनाथ सिंह पराड़कर स्मृति भवन में अयोध्या शोध संस्थान और सोसाइटी फार मीडिया एण्ड सोशल डेवलपमेण्ट के संयुक्त तत्वाववधान में फादर कामिल बुल्के (Father Kamil Bulke) जयन्ती समारोह में विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि मेरे जीवन की कसक कोई पूछे तो कई सारी चीजों में एक है फादर कामिल बुल्के से न मिल पाने, न देख पाने की कसक। मैं उन दिनों बनारस में था जब वे इलाहाबाद में शोध कर रहे थे। धर्मवीर भारती, रघुवंश से अक्सर उनकी चर्चा सुनता था लेकिन उनसे न मिल पाने का सुयोग घटित न होना था तो न हुआ। वे तुलसी के हनुमान थे। हनुमान ने जो काम राम के लिए किया है, तुलसीदास और रामकथा के लिए वही काम फादर कामिल बुल्के ने किया।

लेकिन मेरी नज़र में फादर कामिल बुल्के (Father Kamil Bulke) ने हिंदी भाषा के लिए जो सबसे बड़ा काम भारत में किया वो ऐसा कार्य था जो किसी भारतीय हिंदी प्रेमी को करना चाहिए था, लेकिन वो काम फादर कामिल बुल्के ने किया और वो काम था हिंदी भाषा में शोध प्रस्तुत करना ।फादर कामिल बुल्के ने 1950 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी के लिए शोध प्रबंध हिंदी में ही लिखा जबकि इससे पहले देश के सभी विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में शोध प्रबंध लिखने का नियम नहीं था। हिंदी भाषा के लिए एक विदेशी के इस प्रेम को देखकर लोग हैरान थे और अंततः यह हुआ कि विश्वविद्यालय को अपने नियम बदलने पड़े. इसके बाद ही देश के दूसरे विश्वविद्यालयों में शोधकर्ताओं को अपनी भाषा में थीसिस जमा करने की अनुमति मिलने लगी। फादर कामिल बुल्के (Father Kamil Bulke) ने कहीं लिखा कि “जब वे भारत पहुंचे तो उन्हें यह देखकर दुख और आश्चर्य हुआ कि पढ़े-लिखे लोग भी अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं से अनजान थे। वे अंग्रेजी बोलना गर्व की बात समझते थे। तब उन्होंने निश्चय किया कि वे यहां की देशज भाषा की महत्ता को सिद्ध करेंगे।”

कामिल बुल्के (Father Kamil Bulke) का जन्म बेल्जियम के वेस्ट फ्लैंडर्स में नॉकके-हेइस्ट के एक गांव रम्सकपेल में एक सितंबर 1909 में हुआ था। इनके पिता का नाम अडोल्फ अौर माता का नाम मारिया बुल्के था। अभाव और संघर्ष भरे अपने बचपन के दिन गुजारने के बाद बुल्के ने कई स्थानों पर पढ़ाई जारी रखी। बुल्के ने पहले ल्यूवेन विवि से सिविल इंजीनियरिंग में बीएससी की डिग्री हासिल की। 1930 में ये एक जेसुइट बन गये. 1932 में नीदरलैंड के बलकनवर्ग में अपना दार्शनिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 1934 में भारत के लिए निकले। नवंबर 1936 में मुंबई होते हुए दार्जिलिंग पहुंचे।इसके बाद झारखंड में गुमला में पांच साल तक गणित पढ़ाया। वहीं पर हिंदी, ब्रजभाषा व अवधी सीखी। सन् 1938 में सीतागढ़, हजारीबाग में पंडित बदरीदत्त शास्त्री से हिंदी और संस्कृत सीखी। सन् 1940 में प्रयाग से विशारद की परीक्षा पास की और फिर सन् 1942-44 में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए किया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1949 में ‘रामकथा’ पर डी.फिल. किया। बाद में तुलसी दास के रामचरित मानस का गहन अध्ययन कर, सन् 1950 में उन्होंने ‘राम कथा की उत्पत्ति और विकास’ पर पी.एच.डी की। उनकी यह थीसिस भारत सहित पूरे विश्व में प्रकाशित हुई जिसके बाद सारी दुनिया बुल्के को जानने लगी।जिसमें पाँच अध्यायों में वैदिक साहित्य और रामकथा, वाल्मीकिकृत रामायण, महाभारत की रामकथा, जैन रामकथा तथा बौद्ध रामकथा संबंधी सामग्री की पूर्ण परीक्षा की गई है। उसी वर्ष ही वे ‘बिहार राष्ट्र भाषा परिषद्’ के कार्य कारिणी सभा के सदस्य नियुक्त किये गए।

राजस्थान के पास है पानी बचाने की वैज्ञानिक परंपरा

बुल्के (Kamil Bulke) अक्सर धार्मिक ग्रंथों का गहराई से अध्ययन के लिए दार्जीलिंग में रुकते थे। उनके पास दर्शन का गहरा ज्ञान तो था, लेकिन वे भारतीय दर्शन और साहित्य का व्यवस्थित अध्ययन करना चाहते थे। इसी दौरान उन्होंने तुलसीदास की रामचरित मानस पढ़ी। रामचरित मानस ने उन्हें बहुत अधिक प्रभावित किया। उन्होंने इसका गहराई से अध्ययन किया। उन्हें इसमें नैतिक और व्यावहारिक बातों का चित्ताकर्षक समन्वय देखने को मिला। 1968 में उनका अंग्रेजी -हिंदी कोश प्रकाशित हुआ जो अब तक प्रकाशित कोशों में सबसे ज्यादा प्रामाणिक माना जाता है। मॉरिस मेटरलिंक के एक प्रसिद्ध नाटक ‘द ब्लू बर्ड’ का बुल्के ने नील पंछी नाम से अनुवाद किया। इसके अलावे उन्होंने बाइबिल का हिंदी में अनुवाद किया। मुक्तिदाता और नया विधान भी उनकी प्रमुख रचनाएं हैं ।

World Yoga Day: योग को धर्म और राजनीति के चश्मे से न देखें

बुल्के (Father Kamil Bulke) सेंट जेवियर महाविद्यालय, राँची के हिन्दी और संस्कृत विभाग के प्रमुख बने, लेकिन जल्दी ही श्रवण संबंधी परेशानी के कारण उन्हें पढ़ाने के कार्य से दूर होना पड़ा। उन्होंने शोध पर अपना ध्यान केंद्रित किया। भारत सरकार ने उन्हें बड़े ही आदर के साथ 1951 में भारत की नागरिकता प्रदान की। भारत की नागरिकता पाने के बाद वे खुद को ‘बिहारी’ कहकर बुलाना पसंद करते थे। भारत सरकार ने हिन्दी में उनके योगदान को देखते हुए 1974 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। उनकी मृत्यु गैंगरीन के कारण 17 अगस्त 1982 को दिल्ली में हुई।

फादर बुल्के (Father Kamil Bulke) लिखते हैं कि “जब मैं अपने जीवन पर विचार करता हूं, तो मुझे लगता है ईसा, हिन्दी और तुलसीदास- ये वास्तव में मेरी साधना के तीन प्रमुख घटक हैं और मेरे लिए इन तीन तत्वों में कोई विरोध नहीं है, बल्कि गहरा संबंध है… जहां तक विद्या तथा आस्था के पारस्परिक संबंध का प्रश्न है, तो मैं उन तीनों में कोई विरोध नहीं पाता। मैं तो समझता हूं कि भौतिकतावाद, मानव जीवन की समस्या का हल करने में असमर्थ है। मैं यह भी मानता हूं कि ‘धार्मिक विश्वास’ तर्क-वितर्क का विषय नहीं है।”

About The Author

admin

See author's posts

2,236

Post navigation

Previous: अवतारवाद की वैज्ञानिकता
Next: राजनीति एवं समाज सेवा से लुप्त होते जा रहे हैं ‘गुदड़ी के लाल’

Related Stories

bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026
what nonsense is this - let them say
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

admin 31 March 2026
Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

095304
Total views : 175043

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.