Skip to content
7 May 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • धर्मस्थल
  • विशेष

सत्य के अन्वेषण से ज्ञानवापी को घबराहट क्यों!

admin 20 May 2022
Gyanvapi Mosque Case
Spread the love

काशी में मां श्रंगार गौरी के दर्शन पूजन के अधिकारों को पुन: प्राप्त करने के लिए हिंदू समाज दशकों से प्रतीक्षा कर रहा है। इस संबंध में काशी के न्यायालय में वाद पर माननीय न्यायाधीश ने उस परिसर की वीडियोग्राफी और सर्वे का आदेश दिया। एडवोकेट कमिश्नर के माध्यम से  यह कार्य होना है। किंतु, न्यायालय द्वारा नियुक्त अधिकारी को तथाकथित मस्जिद परिसर में जाने से रोक दिया गया।

उसके पीछे उस ज्ञानवापी इंतजामियां कमेटी के सचिव ने जो चार तर्क दिए वे बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि;

  1. हम किसी गैर मुस्लिम को मस्जिद के अंदर नहीं घुसने देंगे।
  2. क्योंकि कोर्ट ने हमारी बात नहीं सुनी इसलिए,हम कोर्ट की बात नहीं सुनेंगे।
  3. मस्जिद के अंदर की वीडियोग्राफी या फोटो खींचने से हमारी सुरक्षा को खतरा है। वह वीडियोग्राफी मार्केट में आ जाएगी।
  4. चौथी और बेहद आपत्तिजनक तर्क था कि ऐसे तो यदि कोर्ट कहे कि मेरी गर्दन काट के ले आओ तो क्या कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी को मैं अपनी गर्दन काटकर दे दूंगा!

इस तरह की बातों को कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति, जो कानून में विश्वास रखता है, कुतर्क या न्याय की राह में रोड़ा ही बताएगा। एक मस्जिद की इंतजामियां कमेटी के द्वारा दिया गया यह वक्तव्य न्यायालय के लिए तो कोई महत्त्व नहीं रखता किंतु, विदेशी आक्रांताओं के समर्थकों की चाल, चरित्र व चेहरे को अवश्य उजागर करता है।

प्रश्न उठता है कि –

क्या भारत में मस्जिदों के अंदर न्यायालय या देश के कानून का पालन करने वाली संस्थाओं को भी जाने की अनुमति नहीं है?

क्या अब न्यायालय का भी रिलीजन देखा जाएगा?

क्या न्यायालय को सरेआम यह धमकी दिया जाना कि आपने हमारी बात नहीं सुनी इसलिए हम आपकी बात नहीं सुनेंगे, उचित है? और;

न्यायालय के अधिकारी को गला काटने वाले से तुलना करना क्या इस्लामिक कट्टरपंथियों, मुस्लिम युवाओं और देश विरोधियों को उकसाया जाना न्यायोचित है?

प्रश्न एक और भी है कि मस्जिद के अंदर और बाहर जमातीयों की भीड़ जमाकर न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डालने का पुरजोर प्रयास क्या न्याय की अवहेलना या अवमानना नहीं?

मामला सिर्फ इतना ही नहीं है। देश की राजनीति में कुछ लोग जो मुस्लिम युवाओं को उकसाने का ही काम सतत करते हैं, जो सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के बारे में सोचते हैं।जिहादियों को ही प्रोत्साहन देते हैं लेकिन बात संविधान कानून और न्याय व्यवस्था की करते हैं। ऐसे लोग भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए और बहती गंगा में हाथ धोने के लिए कूद पड़े। हैदराबाद के वकील कहते हैं कि 1991 के कानून को सरकार मान नहीं रही। प्लेसेज आफ वरशिप एक्ट 1991 के बारे में न्यायालय ने विचार किया और इस संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक में सुनवाई हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद भी उसे ढाल बनाकर ढोल पीटाना क्या शोभा देता है। सत्य के अन्वेषण पर प्रहार किया जा रहा है। बार-बार माननीय न्यायालय द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर को, जिसको सिर्फ सर्वे और वीडियोग्राफी कर गोपनीय रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है, को ना सिर्फ रोका जा रहा है बल्कि उसके ऊपर पक्षपाती होने के झूठे आरोप भी मढ़े जा रहे हैं।

परिसर के सर्वे से बचने के पीछे दो ही तर्क हो सकते हैं। एक तो उस कथित मस्जिद के अंदर कुछ ऐसा अनिष्ट कारक या गैरकानूनी जमावड़ा है, जैसा कि भारत की अनेक मस्जिद, मदरसों और मुस्लिम बहुल बस्तियों में अनेक बार देखने को आया है। यथा गोला-बारूद हथियार बम आतंकी इत्यादि, जिनको छुपाया जाना उनके लिए बहुत जरूरी है। अन्यथा दूसरा कारण यह हो सकता है कि इनको विश्वास है कि यदि सर्वे हुआ तुम्हारी सारी पोल पट्टी खुल जाएगी कि इस परिसर का मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है। देश समझ रहा है कि ये लोग सत्य पर पर्दा डाल असत्य की ढाल ओड़कर देश में सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने का एक कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। जनता यह जानना चाहती है कि आखिरकार मस्जिद में ऐसा क्या सीक्रेट होता है जिसको छुपाया जा रहा है और क्या किसी मस्जिद में आज तक कोई गैर मुस्लिम घुसा ही नहीं? क्या भारत की न्याय व्यवस्था पर आपको कोई विश्वास नहीं? क्या न्यायाधीश आपका गला काटने के लिए भेज रहे हैं?

देखिए माता श्रंगार गौरी के मंदिर में पूजा अर्चना और दर्शन के लिए एक दशक पहले तक सब कुछ सामान्य था। भक्त दर्शन-पूजन के लिए जाते ही थे। वह मंदिर मस्जिद के दीवाल के बाहरी हिस्से में बना हुआ है तो भी हिंदुओं को पूजा अर्चना से वंचित क्यों किया जा रहा है? क्या देश के इस बहुसंख्यक समाज को अपने आराध्य देव की पूजा का भी अधिकार यह तथाकथित अल्पसंख्यक समुदाय नहीं देगा? क्या दुनिया को नहीं पता कि मुस्लिम आक्रांताओं ने बड़े पैमाने पर हिंदू धर्म स्थलों को ध्वस्त कर उसके मलबे से अनेक प्रकार के इस्लामिक ढांचे तैयार किए जो कि वास्तव में इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार भी नहीं थे? इस कथित मस्जिद के नाम से ही संपूर्ण विश्व को इस बात का ज्ञान हो जाता है कि आखिर इसका नाम ज्ञानवापी क्यों है? इसके विचित्र रूप और आसपास बनी मूर्तियों से स्वत: सिद्ध हो रहा है कि वहां पर हिंदू आस्था के केंद्रों को तोड़ कर के ही वह ढांचा बनाया गया था? जो लोग शांति और भाईचारे की बात करते हैं, गंगा जमुना संस्कृति की बात करते हैं, मिल बैठकर बात करने की बात करते हैं वो उन्हें क्यों नहीं समझाते कि आखिरकार हिंदू मान्यताओं के विश्व प्रसिद्ध आराध्य देव भगवान शंकर की इस पवित्र स्थली को, इस्लामिक आक्रांताओं द्वारा तोड़े जाने के पाप का परिमार्जन कर, हिंदू समाज को क्यों ना दे दिया जाए? यदि न्यायालय का ही रास्ता अपनाना है तो न्याय के मार्ग में कम से कम रोड़ा ना बनें। जिस सत्य की खोज के लिए न्यायालय ने एक पहेली सीढ़ी चढ़ी है, उस सीडी को ही काटने का दुष्प्रयास ना करें। देश अब जाग रहा है। इसको अब और भ्रमित नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी भारतीय सच्चाई के साथ सहृदयता पूर्वक सौहार्द के साथ तभी रह पाएंगे जब हम एक दूसरे की मान्यताओं परंपराओं और विश्वास की बहाली करें। विदेशी आक्रांताओं के साथ स्वयं को या अपने परिजनों व समाज को जोड़ने के पाप से दूर रहें।

– विनोद बंसल, प्रवक्ता – विहिप

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: सनातन धर्मग्रंथों का सार, जानिए किस ग्रंथ में क्या है? The essence of Hindu scriptures
Next: मंदिर में दर्शन के बाद की प्राचीन परंपरा…

Related Stories

Men was not monkey
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

admin 1 May 2026
Noida Protest Illegal Detention
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

admin 29 April 2026
bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026

Trending News

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys! Men was not monkey 1
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

1 May 2026
नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा Noida Protest Illegal Detention 2
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

29 April 2026
‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 3
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 4
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026

Tags

नोएडा मीडिया क्लब नोएडा सिटीजन फोरम भाजपा सरकार योगी सरकार सीएम योगी
  • Men was not monkeyसुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • Noida Protest Illegal Detentionनोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

Recent Posts

  • सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.