Monday, August 10, 2026
HomeUncategorizedधर्म की रक्षा यानि "धर्म रक्षति रक्षितः"

धर्म की रक्षा यानि “धर्म रक्षति रक्षितः”

धर्म की रक्षा यानि “धर्म रक्षति रक्षितः”

श्री हरि विष्णु ने वराह रूप में हिरण्याक्ष का वध किया, नरसिंह रूप में हिरण्यकश्यपु को मुक्ति दी, वामन रूप में राजा वाली को पाताल का राज्य दे कर अमरत्व दिया, राम रावण युद्ध में श्रीराम ने रावण का वध किया, कृष्ण कंस युद्ध में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। पर महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण ने अस्त्र क्यों शस्त्र त्याग दिए ? श्रीकृष्ण ने अर्जुन से क्यों कहा कि हे पार्थ गांडीव उठाओ ये धर्मयुद्ध है, और ये मेरा युद्ध नहीं तुम्हारा युद्ध है?

कभी विचार किया ऐसा क्यों किया श्रीहरि ने। क्योंकि यह समस्त मानव जाति को एक सीख है कि सदैव समर्थ के साथ भगवान है, कायरो के साथ नहीं। धर्म रक्षा में मृत्यु वीरगति और अधर्मी की हत्या अनेक यज्ञ समान पुण्य।

अब समय है कि हम कृष्ण, राम, परशुराम की संतान बने, बुद्ध और महावीर तो तब बना जा सकता है जब धर्म सुरक्षित हो। शांति के पौधे को बढ़ कर बृक्ष बनने के लिए हमेशा अस्त्र-शस्त्र की धूप और पानी चाहिए।

Maria Wirth: जर्मन निवासी एक मनोविज्ञानी महिला का अनोखा अध्यात्म प्रेम

किसी निरपराध या दुर्बल पर बल प्रयोग या नक्सा दिरुद्ध अशब्द भाषा का प्रयोग हिंसा है लेकिन पापी, अत्याचारी, अधर्मी या दुराचारी का वध समाज और संसार के लिए सदैव हितकर ही होता है।

हमारे ये मंत्र, तंत्र, यंत्र, वेद, पुराण, मंदिर और देवी-देवता तभी बचेंगे जब हमारा धर्म बचेगा या सुरक्षित रहेगा। हमने रामायण, महाभारत, गीता से भी सीखा है और आज के समय की भी यही मांग है कि रामायण, महाभारत, गीता, दुर्गा सप्तशती, शिवपुराण, विष्णुपुराण या अन्य किसी भी ग्रन्थ को तोते की तरह रट लेना काफी नहीं है।

श्री राम ने शांति प्रस्ताव भेजा पर युद्ध के विकल्प के साथ, श्रीकृष्ण भी संधि का प्रस्ताव ले कर गए किन्तु महासमर की चुनोती के साथ। कोई भी सनातन ग्रन्थ देख ले शांति प्रस्ताव युद्ध की चुनोती के साथ ही दिया।

आपका घर, धन, संपत्ति, पत्नी तथा बच्चे तभी तक सुरक्षित हैं जब तक कि आप समर्थ हैं। कल्कि अवतार का इंतज़ार मत करो। कल्कि महाराज जब आएंगे तब वो हाँथ जोड़कर नहीं बल्कि हांथो में तलवार ले कर आएंगे।

तो भला हम क्यों अपने अस्त्र-शस्त्र त्याग रहे हैं? शस्त्र विहीन समाज उन भेड़-बकरियों के झुंड के समान है जिन्हें कुत्ते भी मार देते है ।

वर्तमान दौर में मात्र सरकारों के भरोसे रहना भी बेबकूफी है, क्योंकि सरकारें तो बदलती रहती हैं। अगर आप राष्ट्रवादी विचारधारा वाली सरकार चुनते हैं तो वो मात्र आप की ही नहीं आप के उन शत्रुओं की भी रक्षा करती है जो देश के भीतर निवास करते हैं। क्योंकि सरकार के लिए तो सभी नागरिक बराबर हैं।

कोई भी सरकार मात्र आपके हितों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य सभी के लिए है। सरकार की नज़र में सभी धर्म एक सामान हो जाते हैं। यदि आप अपने धर्म के हीत वाली सरकार चुनेंगे तो उसके लिए उस सरकार या उस नेता से आपके विचार और धर्म भी मिलना जरुरी है। अन्यथा दूसरी सरकार केवल आपकी बर्बादी का तमाशा देखेगी।

admin
adminhttp://dharmwani.com
देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments