Tuesday, June 2, 2026
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कोई मेरी मुंबई को बचा लो…

– चौंका देने वाली है मुंबई की वर्तमान राजनीतिक स्थिति

– हिन्दुओं के ही खिलाफ हैं हिंदुत्ववादी पार्टियां

– हिन्दुओं का सबसे बड़ा शत्रु है भारत का मैनस्ट्रीम मीडिया

मुंबई के बारे में जो खबरें सोशल मीडिया के माध्यम से आ रही हैं वे बेहद चौंकाने वाली हैं। देश के मात्र कुछ ही अखबारों में इस खबर को संक्षिप्त के तौर पर स्थान दिया गया, लेकिन सोशल मीडिया में इसको खूब शेयर किया जा रहा है. सोशल मीडिया के ही माध्यम से यह खबर आम लोगों तक पहुँच रही है. जबकि भारत का मैनस्ट्रीम मीडिया को इस सच से कुछ भी लेना-देना नहीं है. क्योंकि इस खबर से उसका व्यावसायिक एजेंडा ध्वस्त हो जाएगा.

आज मुंबई शांत है, क्योंकि इसका माहौल शांत है. लेकिन इस शान्ति के गर्भ से एक बहुत बड़ा खतरा जन्म लेने वाला है. यदि कोई इस बात पर विश्वाश नहीं कर रहा है तो इस खबर को पढ़ कर इसके तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए।

आज मुंबई की भी वर्तमान स्थिति ठीक उसी प्रकार से होती जा रही है जिस प्रकार से देश अन्य कई राज्य, जिले, तहसील या छोटे से छोटे शहरों की हो रही है.

आज जिस प्रकार से देश अन्य कई राज्य, जिले, तहसील या छोटे से छोटे शहरों में जब एक स्थानीय और मूल निवासीअपनी उन्हीं गलियों और सड़कों पर चलता है, तो उसे न तो ये महसूस होता है और न ही अभी तक इस बात का पता चल पाता है कि किस प्रकार से उसकी अपनी जन्म और कर्म भूमि करीब-करीब उसके अपने पैरों के निचे से निकल चुकी है और अब उसके पैरों में मात्र चप्पल- जूते ही रह गए हैं.

आज यदि मुंबई का सर्वेक्षण किया जाय तो यहां शहर के करीब-करीब सभी समुद्री तटों और सड़कों पर चाय, नाश्ता, आमलेट, नारियल पानी आदि बेचने वाले मिलेंगे, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया कि ये लोग कौन हैं और कहाँ से आये हैं. जबकि स्थानीय लोगों को अच्छी तरह से मालुम है कि इनमें से अधिकतर लोग बांग्लादेश और रोहिंग्या के हैं। यहां तक ​​की मुंबई शहर की भीतरी सड़कों के किनारे भी अब नारियल के ठेले या सब्जी के ठेले आदि भी धीरे-धीरे इन्हीं लोगों या समुदाय के कब्जे में आ चुके हैं.

कुछ निजी तौर पर हिन्दू संगठनों के रूप में काम करने वाले स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन लोगों ने मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट, मनीष मार्केट, ग्रैंड रोड के अधिकांश व्यवसाय जो कभी मराठी और मारवाड़ियों के हाथों में हुआ करते थे, आज अपने कब्जे में लेकर अपना विस्तार कर लिया है और अब यहाँ आपको इस पूरे इलाके में शायद ही कोई हिन्दू व्यापारी मिलेगा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि – हैरानी तो इस बात की है कि इस काम में सभी पार्टियों के स्थानीय राजनेता उनके समर्थन में हैं. इसलिए कोई यदि इनके विरोध में आवाज उठाता भी है तो यहाँ का कानून और पुलिस व्यवस्था भी उसी के खिलाफ हो जाते हैं.

क्षेत्रीय राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले कुछ हिन्दू संगठओं के इक्का दुक्का लोग चोरी छुपे ये बात मानते हैं कि मुंबई की जनसंख्या में यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ है बल्कि इसके लिए कुछ राष्ट्रीय पार्टियों और प्रदेश की दमदार पार्टियों के राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं का न सिर्फ सीधा-सीधा हाथ है बल्कि उन लोगों ने इसमें खूब मेहनत भी की है. हैरानी तो इस बात की है कि इसमें तथाकथित हिंदूवादी पार्टियों ने भी अपना भरपूर मौन समर्थन देकर उनका हौसला बढ़ाया है और आज भी वही हाल है.

स्थानीय लोग बताने हैं कि बाहर से आये इन लोगों ने यहाँ अपना एक मज़बूत संगठन भी बनाया हुआ है, जिसके माध्यम से वे लोग स्थानीय राजनेताओं और कानून पर दबाव बनाते रहते हैं. यही संगठन उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, बांग्लादेश या किसी भी रोहिंग्या आदि के अपने समुदाय के लोगों को कुछ विशेष सहायता राशि के साथ एक ठेला और अन्य उपकरण देकर एक जगह भी मुहैया कराता है ताकि वह वहाँ अपना व्यापार कर सके. सुरक्षा के तौर पर उस व्यक्ति को नजदीकी मस्जिद से संपर्क में रहना होता है. इसके बाद वो शख्स उस कमाई से एक भाग अपने समाज द्वारा चलाये जा रहे उस संगठन या एनजीओ को देता रहता है।

स्थानीय मानते हैं कि बाहर से आये इन लोगों ने यहाँ जिस स्तर पर अपना दबदबा कायम कर लिया है उसे देखते हुए आज मुंबई के ऐसे कई निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां कोई भी हिंदू व्यक्ति अकेले हिन्दुओं के वोटों से चुनाव जीतने की उम्मीद नहीं कर सकता।

हालांकि आज यह हाल मात्र मुंबई का ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण महाराष्ट्र का होता जा रहा है. ठीक उसी प्रकार से जैसे कि भारत के अन्य राज्यों में भी हो रहा है, लेकिन भारत की वर्तमान नीतिक पार्टियों को ये बात सोचनी होगी कि आज राष्ट्रवादी विचारधारा की नहीं बल्कि राष्ट्र भूमि की रक्षा की बारी है.

– प्रियंका पांडुरंग, मुंबई

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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