Skip to content
9 May 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • कला-संस्कृति
  • पर्यटन

Rani ki Bawdi : किसी तिलस्मी दुनिया जैसी दिखती है रानी की बावड़ी

admin 11 January 2022
RANI KI BAWADI_3
Spread the love

गुजरात के पाटण जिले में स्थित 11वीं सदी में बनी रानी की बावड़ी (Rani ki Bawdi), एक ऐसी आश्चर्यचकित कर देने वाली ऐतिहासिसक बावड़ी है जिसे 22 जून 2014 में युनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। ‘रानी की बावड़ी’ नामक इस धरोहर को एक प्रकार से मंदिर भी कहा जा सकता है। क्योंकि जल प्रंबधन का विकसित प्राचीन भारतीय तरीका जहां सारी दुनिया को हैरत में डालता है, जिसका जल लाखों लोगों के जीवन को सींचता है, उसी बावड़ी या जल मंदिर के अंदर मौजूद प्राचीन भारतीय शिल्प की उत्कृष्ट कलाकृतियों वाले इस मंदिर में देवी देवताओं की प्रतिमाओं का अभिषेक भी करता है।

पाटन के इस भूमिगत जल मंदिर में यानी रानी की बावड़ी (Rani ki Bawdi) में, शेषनाग के सहारे बैठे भगवान विष्णु की सैकड़ों मूर्तियों को देखने से लगता है जैसे वे यहां हजारों वर्षों से आराम करते हुए से लगते हैं। बड़ी ही बारीकी के साथ उकेरे गए भगवन विष्णु के विभिन्न स्वरुपों को यहां देखा जा सकता है। किसी तिलस्मी दुनिया-सी दिखने वाली यह बावड़ी या यूं कहें कि यह जल मंदिर, जल को अध्यात्म से जोड़ कर पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश दे रहा है।

Nishkalank Mahadev : निष्कलंक महादेव से जुड़े हैं युगों-युगों के रहस्य

इतिहासकारों और विद्वानों का कहना है कि यह बावड़ी (Rani ki Bawdi) केवल पानी को संरक्षित करने के लिए ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक महत्व के लिए भी बनाई गई थी और यह आज भी प्रासंगिक लगती है। क्योंकि इसकी खास बात यह है कि इसमें भगवान की विभिन्न प्रतिमाओं को उकेरकर इसके पानी की पवित्रता को बनाए रखने की अपील भी की गई है। इससे यह बात साफ है कि हमारे पूर्वजों की पानी के साथ जुड़ी भावनाओं का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

RANI KI BAWADI_2यदि हम इस ‘वाव’ यानी बावड़ी (Rani ki Bawdi) से संबंधित इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पता चलता है कि इसका निर्माण रानी उदयमति ने 1063 में अपने पति और पाटण के राजा भीमदेव प्रथम की याद में करवाया था। रंग सूरी द्वारा 1304 ईस्वीं में लिखी गई ‘प्रबंध चिंतामणि‘ नामक पुस्तक में इस बात का प्रमाण मिलता है कि रानी उदयमति की मौत के पश्चात इस ‘वाव’ के निर्माण कार्य को करणदेव प्रथम के शासनकाल में पूरा किया गया था।

दरअसल, ‘वाव’ गुजराती भाषा का एक शब्द है जो बावड़ी या बावली के लिए प्रयोग किया जाता है। यानी बावड़ी या बावली ऐसे सीढ़ीदार कुंए या तालाब होते हैं जिनके पानी तक सीढ़ियों के सहारे आसानी से पहुँचा जा सकता है।

इस बावड़ी (Rani ki Bawdi) को दुनियाभर में 11वीं सदी की भारतीय भूमिगत वास्तु संरचना का एक अनूठा और सबसे विकसित तथा आश्चर्यचकित कर देने वाला एकमात्र उदाहरण माना गया है। भारतीय प्राचीन इतिहास में भूमिगत जल के संचय और उसके इस्तेमाल को इस खूबी के साथ किया जाता था कि व्यवस्था के साथ इसमें पवित्रता और सौंदर्य की झलक भी दिखती थी। भूमिगत जल के स्रोत के उपयोग और जल प्रबंधन प्रणाली के रूप में ‘रानी की बावड़ी’ का आज भी कोई जवाब नहीं।

Dholavira : गुजरात की प्राचीन सभ्यता की झांकी है धोलावीरा

RANI KI BAWADI_2यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की 38वीं बैठक में इस बावड़ी को ‘विश्व धरोहर‘ की मान्यता प्रदान की गई। फरवरी 2013 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इसे विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित किया था। यूनेस्को ने इस इमारत को प्राचीन भारतीय तकनीकी विकास और प्राचीन भारतीय इतिहास में इंजिनियरिंग का एक अनुठा और उत्कृष्ट उदाहरण माना है। रानी की ‘वाव’ या बावड़ी के माध्यम से जल-प्रबंधन, बेहतर व्यवस्था और भूमिगत जल के इस्तेमाल की खूबियों को एक बेहतर उदाहरण के साथ दर्शाया गया है।

जमीन के नीचे बनी यह बावड़ी (Rani ki Bawdi) करीब 64 मीटर लम्बी, 20 मीटर चैड़ी और 27 मीटर गहरी है। ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, मूल रूप में यह बावड़ी सात मंजिला इमारत थी, लेकिन वर्तमान में इसकी पांच मंजिल को ही संरक्षित करके रखा जा सका है। क्योंकि भूगर्भ में होने वाले परिवर्तनों के कारण और इस क्षेत्र में समय-समय पर आने वाली बाढ़ के कारण इसमें मलबा भरता गया और इसकी गहराई कम होती चली गई थी। इसके अलावा इस क्षेत्र में बहने वाली पवित्र सरस्वती नदी जो कि अब लुप्त हो चुकी है उसके कारण यह बहुमूल्य धरोहर भी लगभग 700 सालों तक मलबे की परतों तले दबी रही। भारत की सरकारों के पक्षपात और संप्रदाय विशेष के चलते इसे संसार के अजूबे कहे जाने वाली संरचनाओं में भी स्थान नहीं दिलाया गया, अन्यथा यह एक ऐसी संरचना है जो आज के उन सभी सातों अश्चर्यों के बराबर आंकी जा सकती थी।

भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में पाई जाने वाली विभिन्न ऐतिहासिक बावड़ियों (Rani ki Bawdi) में यह बावड़ी तकनीकी और उपयोगिता के पैमाने पर सर्वोच्च विकास का एक सुन्दर नमूना है। क्योंकि यह काफी बड़ी और जटिल सरंचना वाली बावड़ी है। यह बावड़ी भारत के विभिन्न सीढ़ीदार कुओं की श्रेणी में भी खास स्थान रखती है। इसीलिए यूनेस्को ने इस बावड़ी को भूजल संसाधनों के प्रयोग की तकनीकी एवं जल प्रबंधन प्रणाली का एक अनोखा उदाहरण माना है।

– गणपत सिंह, खरगोन (मध्य प्रदेश)

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: Omkareshwar Yatra: श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए कैसे जायें, कहां रूकें?
Next: सिंगरौर का पौराणिक महत्व और आधुनिक इतिहास | History of Singraur

Related Stories

Ancient indian Psychological Warfare Method
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

admin 31 March 2026
An Ancient Indian King and the Modern Constitution
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

admin 12 March 2026
Khushi Mukherjee Social Media star
  • कला-संस्कृति
  • मीडिया
  • विशेष
  • सोशल मीडिया

पश्चिमी षडयंत्र और हिन्दू समाज की महिलायें

admin 11 August 2025

Trending News

दुनिभर में हो रही है यूपी पुलिस केजीरो टॉलरेंस अभियान की तारीफ UPPolice Zerotolerance Encounters 1
  • अपराध
  • विशेष
  • हमारे प्रहरी

दुनिभर में हो रही है यूपी पुलिस केजीरो टॉलरेंस अभियान की तारीफ

8 May 2026
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो, नहीं तो… : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी Sanatan Dharma is the resistance against injustice and unrighteousness saysJagadguru Shankaracharya swami avimukteshwaranand 2
  • विशेष
  • हिन्दू राष्ट्र

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो, नहीं तो… : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी

8 May 2026
सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys! Men was not monkey 3
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

1 May 2026
नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा Noida Protest Illegal Detention 4
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

29 April 2026
‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 5
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026

Tags

नोएडा मीडिया क्लब नोएडा सिटीजन फोरम भाजपा सरकार योगी सरकार सीएम योगी
  • UPPolice Zerotolerance Encountersदुनिभर में हो रही है यूपी पुलिस केजीरो टॉलरेंस अभियान की तारीफ
  • Sanatan Dharma is the resistance against injustice and unrighteousness saysJagadguru Shankaracharya swami avimukteshwaranandगौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो, नहीं तो… : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी
  • Men was not monkeyसुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

Recent Posts

  • दुनिभर में हो रही है यूपी पुलिस केजीरो टॉलरेंस अभियान की तारीफ
  • गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो, नहीं तो… : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी
  • सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.