Skip to content
17 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • अध्यात्म
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

हिमालय के अमर प्राणियों का अस्तित्व क्या है? Part #3

admin 19 March 2021
Himalay ke amar saadhu 8
Spread the love

अजय सिंह चौहान  || मैंने अपने पहले लेख में मिस्टर एल.पी. फैरेल के साथ घटित एक घटना का जिक्र किया था। जबकि दूसरे लेख में यह जानने की कोशिश की थी कि, क्या वास्तव में ऐसा संभव हो सकता है? आज के इस तीसरे लेख में, मैं, उसी प्रकार की, कुछ दूसरी, दिलचस्प और आश्चर्य और चमत्कारों से भरी जानकारियां देने का प्रयास कर रहा हूं और ऐसे ही कुछ अन्य लोगों के विषय में भी बताने जा रहा हूं जिन्होंने हिमालय के उन घने क्षेत्रों में उपस्थित उन शक्तियों और महान आत्माओं तथा व्यक्तियों से ना सिर्फ मुलाकात की है बल्कि उनके साथ समय भी बिताया है। उसलेखकालिंकभीमैंयहाँदेरहाहूँ।इसकेअलावाअगलेसभीलेखोंकालिंकभीआपदेखसकतेहैं –

विदेशियों की नजर में हिमालय के सिद्ध ऋषि-मुनि – भाग #2

ये बात एक दम सच है कि एक आम व्यक्ति के जीवन में कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं भी घट जाती हैं जिनको हम या तो महसूस ही नहीं कर पाते या फिर, उन्हें ये कह कर भूल जाते हैं कि ऐसा तो संभव ही नहीं है या फिर ये एक चमत्कार हो सकता है। जबकि बहुत ही कम लोग उन घटनाओं को संसार के सामने ला पाते हैं।

इस लेख में हम जिस विषय पर बात करने वाले हैं उसे स्पष्ट शब्दों में ये जानना भी जरूरी है कि हमारे शास्त्रों में शिव, भैरव, परशुराम, हनुमान और अश्वत्थामा जैसे अन्य और भी कई सारे सिद्ध पुरूषों और अमर आत्माओं का विस्तार से वर्णन है।

कोई माने या ना माने, लेकिन, उदाहरण के तौर यहां हम कल्कि पुराण की एक कहानी को आधार मान सकते हैं, जिसके अनुसार- जब भगवान कल्कि ने देखा कि पूरी दुनिया, भोग-विलास, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और आलस्य जैसी तमाम विकृतियों और बुराईयों में डूब गई हैं, जिसके कारण अच्छे लोगों का, या अच्छी आत्माओं का प्रकाश धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। इसलिए उन्होंने ऐसी ही आत्माओं के द्वारा एक बार फिर से जनसमूह का मार्गदर्शन करने का फैसला किया।

लेकिन, भगवान कल्कि को महसूस हुआ कि उनके पास जनता में जागरण के लिए आवश्यक शक्तियों का अभाव था। तब उनके आध्यात्मिक गुरु परशुराम जी ने उन्हें हिमालय पर बुलाया और एक ऐसी जगह पर तपस्या करने को कहा जहाँ गुरु परशुराम ने स्वयं तपस्या की थी। इस तपस्या ने भगवान कल्कि के भीतर की उस प्रचंड शक्ति को फिर से जगा दिया, जिसकी उन्हें युग परिवर्तन के लिए आवश्यकता हो रही थी।

यानी कि यहां इस उदाहण में यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि भगवान परशुराम का जन्म तो बहुत पहले हो ही चुका था। और यहां, उनकी उपस्थिति, उस अमरता का संकेत देती है और इस तथ्य की गवाही भी देती है कि उन्हीं के जैसी और भी अन्य कई अमर आत्माएं हिमालय में आज भी मौजूद हैं।

ठीक इसी प्रकार से हिमालय क्षेत्र में आज भी प्रकृति के अनगिनत चमत्कार देखने को मिलते हैं। हजारों किलोमीटर क्षेत्र में फैले हिमालय के हजारों-लाखों ऐसे स्थान हैं जहां आज भी मानव की पहुंच नहीं हुई है। इन क्षेत्रों में जहां एक ओर सुंदर और अद्भुत झीलें हैं तो दूसरी ओर सैकड़ों-हजारों फूट ऊंचे हिमखंड भी हैं। कहा जाता है कि हिमालय के इन्हीं दुर्गम क्षेत्रों में प्राचीन काल में देवी-देवता निवास करते थे और संभव है कि आज भी वे वहीं रहते हों।

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘मुण्डकोपनिषद्’ के अनुसार, हिमालय की वादियों को सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ कहा जाता है। और ये स्थान या ये केंद्र उत्तराखंड क्षेत्र में स्थित हिमालय की वादियों में कहीं है। ऐसे में यदि हम भारतीय शास्त्रों और धर्म-दर्शन की गहराईयों में जायें तो ठीक इसी प्रकार की अन्य अनेकों घटनाएं भी हैं जो बताती हैं कि आज भी हिमालय के इन क्षेत्रों में उसी प्रकार की अमर आत्माएं, यानी साधू-सन्यासी आज भी मौजूद हैं जो युगों पहले भी हुआ करते थे।

यहां अगर हम एक बार फिर, मिस्टर एल.पी. फैरेल के साथ वर्ष 1942 में घटित उस घटना की तरह ही एक अन्य घटना का उदाहरण देखें तो स्वामी योगानंद द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक ‘एक योगी की आत्मकथा’ के माध्यम से भी हमारे सामने कुछ ऐसे ही उदाहरण सामने आते हैं।

श्री श्यामा चरण लाहिड़ी, जो कि ‘लाहिड़ी महाशय’ के नाम से भी प्रसिद्ध थे उन्होंने अपनी ‘एक योगी की आत्मकथा’ नाम की पुस्तक में बताया है कि उन्हें भी हिमालय के एक अमर सिद्ध बाबा द्वारा वहां बुलाकर ‘क्रिया योग’ का विज्ञान सिखाया गया था, ताकि यह ज्ञान विलुप्त न हो।

ठीक इसी प्रकार की एक अन्य घटना के विषय में, डाॅ. हरि दत्ता भट्ट ’शैलेश’ ने भी हिंदी साप्ताहिक धर्मयुग में 23 अगस्त 1964 के अंक में गढ़वाल की एक पहाड़ी के अपने पर्वतारोहण के अनुभव का दिलचस्प वर्णन किया है। डाॅ. हरि दत्ता भट्ट ’शैलेश’ बताते हैं कि उन्हें पक्का विश्वास है कि किसी अलौकिक और पवित्र शक्ति ने ही उन्हें और उनके ग्रुप को भूस्खलन के नीचे दबने से बचाया था।

ये सभी घटनाएं स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती हैं कि, अमर अलौकिक शक्तियों वाली अमर आत्माएँ, अब भी हिमालय के क्षेत्रों में मौजूद हैं और वे अनंत समय तक वहाँ विचरण करती रहेंगी।

इसी विषय पर एक और लेखक है ब्रिटेन के सी. क्लार्क। सी. क्लार्क द्वारा वर्ष 1968 में लिखी गई अपनी पुस्तक ‘स्पेस ओडिसी’ में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि हिमालय के बारहमासी बर्फ से जमे रहने वाले क्षेत्रों में अमर प्राणियों के अस्तित्व को एक मिथक के रूप में नहीं माना जा सकता।

और क्योंकि कठिन साधना सदैव उपयुक्त वातावरण पर निर्भर करती है। इसलिए कई वैज्ञानिकों ने उन्हीं अमर प्राणियों के अस्तित्व को लेकर दुनिया को इस बात के सुझाव भी दिये हैं कि वायुमंडलीय तापमान को कम करना चाहिए। ताकि उन अमर प्राणियों के अस्तित्व को बचाया जा सके।

दुनिया के तमाम जानकारों और जानकारियों के आधार पर यहां यह कहना सरल है कि आज भी हिमालयी क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों योगी हैं जिनको हिमालय के दुर्गम पहाड़ों के आंतरिक क्षेत्रों में तमाम रहस्यों के विषय में विस्तृत जानकारियां हैं।

हिमालयी क्षेत्र में ऐसे कई सिद्धाश्रम मौजूद हैं जो भौतिकतावाद और चहल-पहल से एक दम अलग-थलग हैं और भौतिकतावादी दुनिया तथा सामान्य व्यक्तियों की पहुंच से एक दम बाहर हैं। यानी सामान्य तौर पर वे दृश्यमान नहीं है, और केवल मानसिक रूप से जागृत और विशेष सिद्धियों के ज्ञाता योगियों को ही इन सिद्धाश्रमों में प्रवेश का सौभाग्य प्राप्त होता है।

आज भी हिमालय में निवास करते हैं हमारे देवी-देवता – भाग #4

ऐसे में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए कि आखिर ये सिद्ध बाबा और अमर बाबाओं का रहस्यमयी संसार क्या है और कहां है, या फिर यह मात्र एक कोरी कल्पना ही है। इस प्रकार के रहस्यों को जानने के लिए हमें भारतीय धर्मग्रंथों, शास्त्रों और पुराणों का सहारा भी लेना चाहिए।

इसी सीरिज के अगले लेख में, मैं यह बताने का प्रयास करूंगा कि कैसे हिमालय के दुर्गम और एकांत क्षेत्रों में ये ऋषि-मुनि हजारों वर्षों से आश्रम बनाकर आज भी तपस्या में लीन हैं, वहीं इनके बारे में एक आम आदमी को कुछ भी जानकारी नहीं है कि आखिर वे रहते कहां हैं और हर किसी को वे दिखना क्यों नहीं चाहते।

About The Author

admin

See author's posts

2,863

Post navigation

Previous: ePathshala App बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बिल्कुल फ्री जानिए आप कैसे उठा सकते हैं ePathshala App का फायदा
Next: भारत में क्यों नहीं उठ रही है ‘डिजिटल आजादी’ की मांग?

Related Stories

National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

admin 15 March 2026
Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026

Trending News

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 1
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 2
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 3
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 4
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 5
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026

Total Visitor

093083
Total views : 170827

Recent Posts

  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.