Skip to content
31 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम की पौराणिक, प्राचीन और मुगलकालीन यात्रा

admin 26 September 2025
Sheetla Mata Temple in Gurugram_Ancient and Mughal history
Spread the love

AJAY-SINGH-CHAUHAN__AUTHORअजय सिंह चौहान || शीतला माता को स्वच्छता के साथ ‘शीतलता’ अर्थात ‘ठंडक प्रदान करने वाली’ माता भी कहा जाता है। इसके अलावा उनको संक्रामक रोगों, जैसे- चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी आदि को दूर करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। इन्हीं शीतला माता का एक पोराणिक और प्राचीन सिद्ध मंदिर है जो दिल्ली एन.सी.आर. के अंतर्गत आने वाले गुरुग्राम में स्थित है, और ये गुरुग्राम हरियाणा राज्य का एक जिला है जो महाभारतकालीन गुरु द्रोणाचार्य की भूमि के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास की उन परतों को भी उजागर करता है जो पौराणिक कथाओं से लेकर प्राचीनकाल और दिल्ली के उस मुगल युग से जुडी है।

शीतला माता की पौराणिक कथाएं स्कंद पुराण और देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों में पढने को मिलतीं हैं, जिनके अनुसार शीतला माता देवी दुर्गा की अवतार और कात्यायनी के रूप में जानी जाती हैं, जो ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं थीं। माता शीतला की उत्पत्ति से जुडी एक प्रमुख कथा के अनुसार, जब असुर ‘ज्वरासुर’ यानी ज्वर के दानव ने सम्पूर्ण मानव जाति को धीरे-धीरे ज्वर या तेज़ तपाने वाले बुखार जैसे रोग से पीड़ित करना शुरू कर दिया, तब माता दुर्गा ने उसको शांत करने और मनुष्यों को राहत देने के लिए ‘शीतलता’ का रूप धारण कर उसका संहार किया। अर्थात, माता शीतला के नाम का अर्थ यहाँ वह ‘शीतलता’ है, जो बुखार से तपते शरीर को ठंडक प्रदान करती है। इसीलिए देवी शीतला को पार्वती का भी एक रूप माना जाता हैं जो, फोड़े-फुंसियों, घावों और कई प्रकार की महामारियों से मुक्ति दिलाती हैं।

कल्कि अवतार गंगा-यमुना की भूमि के बीच ही होगा

इसके अलावा, महाभारत से जुड़ी एक अन्य कथा में शीतला माता को गुरु द्रोणाचार्य जी की पत्नी कृपी या जिनको किरपाई और ललिता जैसे नामों से पहचाना जाता है से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। इस कथा के अनुसार, गुरु द्रोणाचार्य जी की पत्नी कृपी इसी स्थान पर रहती थीं और बीमार बच्चों की देखभाल करती थीं, विशेषकर चेचक से पीड़ितों की। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें माता शीतला या मसानी माता के रूप में पूजा जाने लगा, जो ‘चेचक की देवी’ कहलाती हैं। यह कथा हिंदू, बौद्ध और जनजातीय समुदायों में प्रचलित है। और कहा जाता है कि तब से शीतला अष्टमी का त्योहार इसी देवी को समर्पित है, जहां ठंडे भोजन से उनकी पूजा की जाती है, जिसको वर्तमान में प्रतीकात्मक रूप से रोगों से मुक्ति की कामना के देखा जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि मात शीतला के इस मंदिर से जुडी पौराणिक कथाओं से मंदिर और देवी शीतला के प्रति आस्था और आध्यात्मिक गहराई की झलक देखने को मिलती है।

शीतला माता मंदिर से जुड़े प्राचीन इतिहास की जड़ों को सबसे अधिक महाभारत काल से जोड़ कर देखा जाता है। जिसके अनुसार, आज के इस गुरुग्राम को पहले भी गुरुग्राम ही कहा जाता था। जिसका अर्थ है ‘गुरु का ग्राम’ जो गुरु द्रोणाचार्य का गांव है।

यह मंदिर स्थल आज भी कुछ ऐसे प्राचीन तीर्थ के रूप में जाना जाता है, जहां महाभारत काल से शुरू हुआ पारंपरिक और सांस्कृतिक मेला आज तक भी लगता आ रहा है। पुरातन साक्ष्यों से पता चलता है कि प्राचीन काल में यह मंदिर सम्पूर्ण अखंड भारत में ज्वर से सम्बंधित रोगों से मुक्ति का प्रतीक बन गया था, जहां अनगिनत तीर्थयात्री आते थे।

मरघट वाले हनुमान मंदिर का पौराणिक, प्राचीन और मुग़लकालीन इतिहास

गुरुग्राम में स्थित श्री शीतला माता जी के इस मंदिर के मुगलकालीन इतिहास की बात करें तो इसका इतिहास कई चमत्कारी घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है। इसके अलावा प्राचीन काल से मुग़लकाल तक की कई राजनीतिक घटनाओं से भी इसका गहरा सम्बन्ध रहा है। मुगल साम्राज्य के पतन के बाद, 18वीं शताब्दी में भरतपुर के जाट राजा जवाहर सिंह जी, जिनका शासनकाल 1763 से 1768 तक रहा, उन्होंने एक युद्ध में मुगलों पर विजय प्राप्त करने से पूर्व शीतला माता से आशीर्वाद लिया था, और उस विजय विजय की स्मृति में जिस मंदिर संरचना का पुनर्निर्माण कराया था यह वही है जिसे आज हम देख पा रहे हैं।

श्री शीतला माता जी की यह मंदिर संरचना नागर और राजस्थानी शैली का सुंदर मिश्रण है, जिसमें संगमरमर के खंभे और जटिल नक्काशी की गई है। मुगल काल की ये घटनाएं मंदिर को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं, जहां आस्था और शक्ति का संगम हुआ। हालाँकि मंदिर पर कई बार मुग़ल आक्रमण हुए, इसकी अपार संपत्ति को लुटा गया। लेकिन उतनी ही बार इसको फिर से खड़ा कर दिया गया। यही कारण है की इस मंदिर से जुड़े अधिक तथ्य प्राप्त नहीं होते, क्योंकि यह हमेश से एक जीवंत मंदिर रहा और इसमें पूजापाठ भी अधिक समय तक बाधित नहीं रही।

श्री शीतला माता जी का यह मंदिर प्राचीन काल से लेकर आजतक भी लाखों स्थानीय श्रद्धालुओं सहित राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित आसपास के कई राज्यों के श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करता आ रहा है। मंदिर में आस्था से जुडी कई प्रकार की रश्में प्रचाल में हैं, जैसे ‘जल देना’, मुंडन संस्कार और 84 घंटियों को छूना आदि उन कई प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखती हैं। यह मंदिर न केवल रोगों से मुक्ति का प्रतीक है, बल्कि इतिहास की उन कहानियों का संग्रह भी है जो पौराणिक देवत्व से लेकर मुगलकाल और आज की सेकुलरवादी घिनोनी राजनीति तक फैली हैं।

अगर आप भी शीतला माता मंदिर में दर्शनों के लिए जाना चाहते हैं तो यह मंदिर दिल्ली एन.सी.आर. के अंतर्गत आने वाले हरियाणा राज्य के जिला गुरुग्राम के पुराने गुरुग्राम शहर में शीतला माता रोड पर मसानी गाँव, सेक्टर 6 में स्थित है। मंदिर के सबसे नज़दीकी दो मेट्रो स्टेशन हैं जिनमें से एक है ‘इफको चौक’, और दूसरा ‘मिलेनियम सिटी सेंटर’ या जिसको ‘हुडा सिटी सेंटर’ भी कहा जाता है। ये दोनों मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर हैं। इफको चौक से मंदिर की दुरी लगभग 4.13 किमी है, जबकि हुडा सिटी सेंटर मंदिर की दुरी लगभग 4.59 किमी है। इन स्टेशनों से टैक्सी, ऑटो या साइकिल रिक्शा, बेटरी रिक्शा या फिर स्थानीय बस सेवा द्वारा मंदिर पहुँचना होता है।

About The Author

admin

See author's posts

5,146

Post navigation

Previous: शंकराचार्य जी ने धर्मादेश जारी कर सरकार को अविलंब गोचर भूमि मुक्त करने को कहा
Next: हिंदू धर्म को समाप्त करने का ख्वाब देखने वाले…

Related Stories

Ancient indian Psychological Warfare Method
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

admin 31 March 2026
Relationship between the Ramayana and the Vedas
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

admin 27 March 2026
Purana Qila Delhi
  • ऐतिहासिक नगर
  • विशेष

पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य

admin 25 March 2026

Trending News

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 1
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 2
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026
पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य Purana Qila Delhi 3
  • ऐतिहासिक नगर
  • विशेष

पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य

25 March 2026
‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश Happy Sanatani New Year on 19th March 2026 4
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति
  • हिन्दू राष्ट्र

‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश

19 March 2026
सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 5
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026

Total Visitor

094788
Total views : 174117

Recent Posts

  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध
  • पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य
  • ‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश
  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.