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देवानंद के पास डिग्री होती तो वो भी एक मामूली क्लर्क बन कर रह गये होते

admin 6 March 2021
DEVANAND ACTOR
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जानते हैं मुसलमान कभी अपनी बेरोजगारी का रोना नहीं रोते। साथ ही ’आत्महत्या’ जैसा कृत्य भी यह लोग ना के बराबर करते हैं। जबकि ’हिन्दुओं’ के बच्चे ही हर समय ’बेरोजगारी’ का रोना रोते हैं।

इसके पीछे का कारण क्या है आप भी जान लेंः-
उसका कारण बहुत साधारण है। क्योंकि हिन्दुओं के बच्चे हमेशा दूसरों पर आर्षित होने की साचते हैं। और सरकारों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त की योजनाओं और वादों पर ही जीना चाहते हैं। वे टेक्नीकल काम भी नहीं सिख पाते हैं। बस पढ़ाई और सिर्फ पढ़ाई में ही समय बर्बाद कर देते हैं और उसके बाद कोई भी छोटा-मोटा काम धंध करना पसंद ही नहीं करते। अगर आप किसी भी हिन्दू बच्चे से काम-धंधे के बारे में पूछेंगे तो वे क्या कहेंगे आज भी जान लेंः-

एक जीवंत उदाहरण मैं आपको बता रहा हूँ –
तुम तो टेलरिंग/कटिंग (दर्जी) का काम कर लो?
नहीं !
तो मर्दों के नाई (बार्बर) बन जाओ?
नहीं !
लांड्री में काम करोगे?
नहीं !
हलवाई का काम कर लो?
नहीं !
बढ़ई (कारपेंटर) का काम सीखोगे?
नहीं !
लुहार के यहां काम करोगे?
नहीं !
खराद मशीन पर काम करोगे?
नहीं !
वेल्डिंग कर सकते हो?
नहीं !
ग्राफिक डिजाइन का कुछ काम आता है?
नहीं !
कबाड़ी का काम कर लो?
नहीं !
सब्जी या फ्रूट का धंधा कर लो?
नहीं !
जूस की दुकान पर काम करोगे?
नहीं !
आटा चक्की पर काम करोगे?
नहीं !
चाय, पकोड़े की दुकान पर काम करोगे?
नहीं !
किराने की दुकान पर काम करोगे ?
नहीं !
रंगाई पुताई का काम कर लोगे?
नहीं !
मेडिकल स्टोर के काम का कुछ ज्ञान है?
नहीं !
कार, ट्रक आदि की ड्राइवरी का काम करोगे?
नहीं !
स्कूटर या बाइक रिपेरिंग आती है?
नहीं !
घरों में प्लम्बिंग का काम कर सकते हो?
नहीं !
राज मिस्त्री के साथ काम कर सकते हो?
नहीं !
खेती-बागवानी का काम करोगे?
नहीं !
गाड़ियों के पंचर बना लोगे?
नहीं !
होटल या रेस्टोरेंट में काम करोगे?
नहीं !
बिजली रिपेरिंग, पंखा, एसी, गीजर, कूलर, वाशिंग मशीन रिपेरिंग कर लोगे?
नहीं !
कपड़े की दुकान पर काम कर सकते हो?
नहीं !
किराना दुकान पर काम कर सकते हो?
नहीं !
सिलाई या टेलरीग का काम जानते हो?
नहीं !
पान मसाला गुटखा बेचोगे?
नहीं !
मजदूरी तो कर ही सकते हो?
नहीं !
लड़ाई-झगड़ा कर सकते हो?
नहीं !
हफ्ता वसुली कर सकते हो?
नहीं !
दंगे-फसाद कर सकते हो?
नहीं !

इतने सारे सवालों के अगर एक ही जवाब मिल सकते हैं तो भला ऐसे हिन्दू बच्चे बेरोजगार नहीं हो और क्या बन सकते हैं। देश में आज भी सैकड़ों प्रकार के परंपरागत रोजगार के अवसर हैं, लेकिन इन सब को दरकिनार कर अपने आप को और देश को भी बर्बाद कर दिया गया है। ऐसे में हर हिन्दू बच्चा एक ही बात करता है कि वह पढ़ा-लिखा है इसलिए इस तरह के काम नहीं कर सकता क्योंकि इन कामों में उसे शर्म आती है। उसे तो बस सरकारी क्लर्क की नौकरी ही चाहिए। क्योंकि वहां मेहनत नहीं होती।

ऐसे में यदि कोई इन्हीं हिदू बच्चों से ये कहे कि जब तुम्हें कुछ काम करना ही नहीं आता है तो फिर क्या खास जीयोगे तो वे मुंह बनाकर चले जाते हैं। दरअसल, हमारे देश में आज भी काम करने वालों की कमी है, काम की नहीं। काम-धंधे तो चारों तरफ बिखरे पड़े हैं। आज से 100-150 साल पहले तक कौन सी सरकारी नौकरियां हुआ करती थीं।

आजादी से पहले तक जो काम धंधे हुआ करते थे उन पर तो मुस्लिम लड़के झपट रहे हैं। लेकिन, हिन्दू बच्चे तो बस सरकारी या किसी आईटी कंपनी वाली नौकरी के इंतजार में बैठे हैं।

मोदी सरकार द्वारा दी जाने वाली ‘स्किल इंडिया’ का लाभ भी मुस्लिम लड़के ही उठा रहे हैं और हिन्दू लड़के तो उसके बाद भी सरकारी या गैर सरकारी ही सही लेकिन, टाई पहन कर काम करने वाली नौकरी के इंतजार में बैठे रहते हैं।

इसी लिए कहा जाता है कि अपने बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ हुनरमंद भी बनाया जाना चाहिए।

हटा दीजिए अपने अंदर की उस सोच को कि ‘लोग क्या कहेंगे’ या फिर ‘लोग क्या सोचेंगे’। क्योंकि लोग क्या कहेंगे और क्या सोचेंगे जैसी सबसे खतरनाक बीमारियों ने ही भारत के हिंदूओं को बर्बाद कर के रखा हुआ है।

याद कीजिए उस पल को जब अटल बिहारी वाजपेई जी जब बस लेकर पाकिस्तान गए थे और उनके साथ फिल्म अभिनेता देवानंद भी गए थे। देवानंद जब पाकिस्तान से पलायन करके भारत आ गये थे तो अपने साथ अपनी डिग्री लेकर नहीं आ पाये थे। और जब उस समय उन्हें वह डिग्री दी गई तब उन्होंने कहा कि आज मैं जो कुछ हूं अपनी इस छूटी हुई डिग्री के कारण हूं। यानी कि अगर उनके पास भी वही डिग्री होती तो वे एक मामूली से क्लर्क बन कर रह गये होते। तभी तो उन्होंने कहा था कि मेरे भाई मुझे नेवी में क्लर्क की नौकरी दिलवा रहे थे। लेकिन, क्योंकि मैं अपनी डिग्री पाकिस्तान ही भूल गया था इसीलिए मुझे वह क्लर्क की नौकरी नहीं मिली। शुरू में तो मैं मायूस रहा। लेकिन, मैंने खुब संघर्ष किया और आज मैं इस मुकाम पर हूं।

सोचिए कि अगर देवानंद के पास वह डिग्री होती तो क्या वे इतने बड़े स्टार बन जाते। नहीं, फिर तो वे एक क्लर्क बन कर ही रह जाते।

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