Wednesday, June 17, 2026
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सभी धर्मों का मूलाधार क्यों है सनातन धर्म ?

सनातन धर्म, मूल रूप से वैदिक धर्म है जो अपने वैकल्पिक नाम हिन्दू धर्म के नाम से जाना जाता है। वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये ‘सनातन धर्म‘ नाम मिलता है।

‘सनातन‘ का अर्थ है – शाश्वत या ‘हमेशा बना रहने वाला‘, अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म मूलतः भारतीय धर्म है, जो किसी जमाने में पूरे संसार में व्याप्त था।

विभिन्न प्रकार से हुए हुए भारी धर्मान्तरणों और भौगोलिक कारणों के बाद भी विश्व के इस क्षेत्र, और भारतीय उपमहाद्वीप की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है। सिन्धु नदी के पार के वासियों को ईरानवासी हिन्दू कहते थे। और क्योंकि इस उच्चारण में वे ‘स‘ का उच्चारण ‘ह‘ करते थे इसी लिए उनकी देखा-देखी अरब की ओर से आने वाले हमलावर भी तत्कालीन भारतवासियों को हिन्दू और उनके धर्म को हिन्दू धर्म कहने लगे।

भारत के अपने साहित्य में भी हिन्दू शब्द अधिक पुराना नहीं है। जबकि हिन्दू शब्द आज से कोई 1,000 वर्ष पहले ही संबोधन में लागया गया मिलता है, उसके पहले नहीं। हिन्दुत्व सनातन धर्म के रूप में सभी धर्मों का मूलाधार है क्योंकि सभी धर्म-सिद्धान्तों के सार्वभौम आध्यात्मिक सत्य के विभिन्न पहलुओं का इसमें पहले से ही समावेश कर लिया गया था।

– दिनेश

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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