Skip to content
2 May 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • ऐतिहासिक नगर
  • धर्मस्थल
  • विशेष

सिंगरौर का पौराणिक महत्व और आधुनिक इतिहास | History of Singraur

admin 11 January 2022
Shringverpur-History-and-pre-history
Spread the love

अजय सिंह चौहान || उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से करीब 35 किमी उत्तर-पश्चिम की ओर जाने पर प्रयागराज जिले में ही, गंगा नदी के किनारे, सिंगरौर (History of Singraur) नाम का एक ऐसा कस्बा आता है जिसे हम प्राचीन युग का यानी त्रेता युग के श्रृंगवेरपुर तीर्थ के नाम से पहचानते हैं। इस श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) का उल्लेख हमें रामायण में विस्तार से मिलता है। भारतीय पुरातत्व विभाग के डाॅ. बी.बी. लाल के निर्देशन में सन 1977-1978 ई. में किये गये उत्खनन कार्यों से यह सिद्ध भी हो चुका है कि सिंगरौर का महत्व हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।

भले ही गंगा नदी के किनारे बसे श्रृंगवेरपुर को आज हम सिंगरौर के नाम से जानते हैं लेकिन, यह वही सिंगरौर है जिसे त्रेता युग में श्रृंगवेरपुर के नाम से पहचाते थे। गंगा न दी के उत्तरी तट और लखनऊ रोड पर पर स्थित यह स्थान अयोध्या से करीब 170 किलोमीटर की दूर, एक छोटी पहाड़ी पर बसा हुआ है।

रामायण में इस स्थान का वर्णन ‘मछुआरों के राजा’ निशादराज के साम्राज्य की राजधानी के रूप में मिलता है। जबकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में बताया गया है कि किस प्रकार से भगान श्रीराम श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) में गंगा के तट पर पहुंचे थे और इसी स्थान पर श्रीराम, शीशम के एक वृक्ष के नीचे बैठे थे। वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में इस वृक्ष को ‘इगुंदी’ यानी हिंगोट कहा गया है। जबकि ‘अध्यात्मरामायण’ और ‘रामचरितमानस‘ में इस वृक्ष को शीशम बताया गया है।

भगवान राम ने श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) में यहां जिस शीशम के एक वृक्ष के नीचे रात्री विश्राम किया था बाद में उसे ‘रामचैरा‘ या ‘राम का चबूतरा‘ कहा गया और उसी चबूतरे पर भगवान राम ने राजसी ठाट-बाट का परित्याग कर के अगली सुबह अपना वनवासी का रूप धारण किया था और उसी दिन से उन्होंने उन 14 वर्षों के दिनों की गिनती भी प्रारंभ की थी।

गंगा नदी के घाट के पास ही में आज भी शीशम के वृक्ष खड़े दिखाई दे जाते हैं जिनके बारे में स्थानीय लोग कहते हैं कि ये दोनों ही वृक्ष उसी दौर के वृक्ष के बीजों से उत्पन्न वृक्ष हैं जिसके नीचे श्रीराम, सीता और लक्ष्मण जी ने विश्राम किया था। स्वयं तुलसी दास जी ने भी इस स्थान के महत्व के विषय में लिखा है।

कन्नौज में छुपा है युगों-युगों का रहस्यमयी पौराणिक खजाना | History of Ancient City Kannauj

इसके अलावा इसी ‘श्रृंगवेरपुर’ (History of Singraur) में भगवान रामचंद्रजी की भेंट निषादराज से भी हुई थी। इसके अगले दिन यहां से भगवान श्रीराम, देवी सीता और लक्ष्मण ने केवट की नौका में बैठ कर गंगा को पार किया था और यहीं से अपने साथ आये सुमंत को उन्होंने वापस अयोध्या भेज दिया था।

लंका दहन और रावण वध के बाद अयोध्या लौटने से पहले भगवान राम का पुष्पक विमान सबसे पहले यहीं श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) में ही उतरा था। इसके अलावा, इस स्थान का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि, यह वही स्थान है जहां गंगा नदी के किनारे अपने आश्रम में बैठ कर श्रृंगी ऋषि तप किया करते थे। इसलिए इस स्थान का नाम श्रृंगि ऋषि के नाम पर ही श्रृंगवेरपुर हो गया। हालांकि, भगवान राम के बाद से इस स्थान का नाम निशादराज की राजधानी के रूप में भी प्रसिद्ध हो गया।

प्राचीनकाल के श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) नाम के ऊच्चारण को वर्तमान में सिंगरौर कहे जाने के विषय में कहा जाता है कि जब तक भारत में आम बोलचाल की भाषा के तौर पर संस्कृत का प्रचलन रहा तब तक तो श्रृंगवेरपुर का सही ऊच्चारण होता रहा। लेकिन, मुगलकाल के दौरान संस्कृत का प्रचलन समाप्त होता गया और आम बोलचाल की भाषाओं और बोलियों का प्रचलन बढ़ने के कारण, समय के साथ-साथ भाषा शैली और ऊच्चारण की सरलता के चलते धीरे-धीरे श्रृंगवेरपुर से बदल कर इसका नाम सिंगरौर हो गया।

सिंगरौर (History of Singraur) के प्राचीन इतिहास को लेकर अगर हम द्वापर युग के महाभारत काल के उस दौर की बात करें तो पता चलता है कि उस समय भी श्रृंगवेरपुर एक तीर्थस्थल के रूप में विकसित और प्रसिद्ध नगर हुआ करता था, क्योंकि महाभारत में भी इस स्थान को एक ‘तीर्थस्थल’ कहा गया है।

Patan Devi Shaktipeeth : पाटन देवी शक्तिपीठ मंदिर यात्रा की संपूर्ण जानकारी

Shringverpur-History-and-pre-history-in-Modern-ageडाॅ. बी.बी. लाल के निर्देशन में इस स्थल का उत्खनन का कार्य सन 1977-1978 में किया जा चुका है जिसमें यहां से अनेकों प्रकार की ऐसी वस्तुएं प्रमाण के तौर पर मिलीं हैं, जिनसे यह सिद्ध हो चुका है कि यही वह स्थान है जो त्रेता युग में श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) हुआ करता था और द्वापर युग में तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध था।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों और आस-पास के अन्य ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सन 1977-1978 ई. में किये गये उत्खनन के दौरान यहां से प्राचीन काल का बहुत सारा खजाना भी प्राप्त हुआ तथा गुप्तकालीन मिट्टी की मूर्तियाँ, कन्नौज गहड़वाल वंश के कुछ चांदी के सिक्के और मिट्टी में दबे हुए कुछ आभूषण भी मिले हैं।

इन सब से अलग, आर्य कालीन सभ्यता की मानव बस्तियों के अवशेषों के तौर पर श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) टीले के उत्खनन कार्य में एक आयताकार तालाब भी मिला है। यह तालाब पक्की ईंटों से बना हुआ था। इसमें उत्तर दिशा की ओर से जल के प्रवेश और दक्षिण की ओर से उसके निकास के लिए नाली बनाई गई थी। पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार भारत के किसी भी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त अब तक का यह सबसे बड़ा तालाब है।

हालांकि, एक हिंदू तीर्थ या हिंदू धर्मस्थल के तौर पर तो यह भगवान राम के समय से लेकर आज तक कभी भी गुमनाम नहीं रहा, लेकिन गहड़वाल वंश के शासन के बाद मुगलों आक्रमणों और यहां के धार्मिक स्थलों के विध्वंस के बाद लूटपाट और कत्लेआम के कारण से यह स्थान लंबे समय तक गुमनाम रहा।

जबकि रामायण कालीन व पौराणिक स्थल के रूप में भारतीय जनमानस के मन में यह स्थान सदैव श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि और भगवान राम के वनगमन के मार्ग के रूप में एक तीर्थ स्थल के रूप में रहा है।

अलीगढ़ से जुड़े हैं युगों-युगों के रहस्य और ऐतिहासिक तथ्य | History of Aligarh

अब अगर हम श्रृंगवेरपुर (History of Singraur) को लेकर मुगलकाल के दौर की बात करें तो अन्य स्थानों की तरह ही इस क्षेत्र के भी हिंदू धार्मिक स्थलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, और उसका असर यहां सिंगरौर तक यानी प्राचीन श्रृंगवेरपुर नगरी पर भी पड़ा। हालांकि, बाद में यहां मराठाओं द्वारा कब्जा कर लिया गया, जिसके बाद यहां के हिंदू धर्मस्थलों में एक बार फिर से चहल-पहल लौट आई। लेकिन, तब तक श्रृंगवेरपुर का अपना वह प्राचीन अस्तित्व लगभग नष्ट हो चुका था और बचा रहा सिर्फ वह स्थान जो श्रृंगवेरपुर से सिंगरौर हो गया।

वर्तमान में यह एक साधारण सा गांव है जो तीन दिशाओं से हरे-भरे खेतों से घीरा हुआ है। जबकि चैथी तरफ से गंगा नदी बहती है। तीर्थ यात्रा के तौर पर यात्रियों को यहां बारहों मास आते देखा जा सकता है। लेकिन, कुछ खास स्नान पर्वों के दौरान तो यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी देखी जा सकती है।

गंगा नदी के तट पर स्थित सिंगरौर यानी रामायण के दौर का श्रृंगवेरपुर, आज के दौर में कोई बहुत बड़ा तीर्थ या पर्यटन स्थल नहीं है लेकिन, उत्तर प्रदेश में इसे एक प्रसिद्ध तीर्थ और पर्यटन स्थल बनाने के लिए काम चल रहा है।

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: Rani ki Bawdi : किसी तिलस्मी दुनिया जैसी दिखती है रानी की बावड़ी
Next: श्रीकृष्ण ने यहां बैठकर किया था अंक लिखने का अभ्यास | Sandipani Ashram Ujjain

Related Stories

Men was not monkey
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

admin 1 May 2026
Noida Protest Illegal Detention
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

admin 29 April 2026
bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026

Trending News

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys! Men was not monkey 1
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

1 May 2026
नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा Noida Protest Illegal Detention 2
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

29 April 2026
‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 3
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 4
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026

Tags

नोएडा मीडिया क्लब नोएडा सिटीजन फोरम भाजपा सरकार योगी सरकार सीएम योगी
  • Men was not monkeyसुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • Noida Protest Illegal Detentionनोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

Recent Posts

  • सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.