Wednesday, June 3, 2026
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क्या कैलाश मंदिर की गुफाओं में आज भी रेडिएशन है?

अजय चौहान || महाराष्ट्र में स्थित एलोरा गांव की चरणानंद्री पहाड़ियों को काट कर तैयार की गई एलोरा की गुफाओं के विषय में आज हमारे सामने पर्याप्त जानकारियां या तथ्य मौजूद नहीं है. इन्हीं संरचनाओं और गुफाओं में से प्रमुख संरचना जिसे हम कैलाश मंदिर के नाम से जानते हैं यह दुनियाभर के लिए रहस्यमय बना हुआ है.

कुछ दशकों पहले तक भी कैलाश मंदिर की ये गुफाएं आम पर्यटकों के लिए खुली हुईं थीं, लेकिन, अब उन्हें पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. इनको बंद करने के पीछे के कारण भी आज हमारे लिए रहस्य बने हुए हैं.

सोशल मीडिया में यूं तो इस कैलाश मंदिर से जुड़ी तमाम प्रकार की जानकारियां मौजूद हैं लेकिन, इस संरचना का वास्तविक और प्राचीन इतिहास क्या है यह किसी को नहीं मालुम. अगर इसके पीछे के तर्क यदि हम देखें तो हमारे सामने ऐसे तमाम तथ्य और तर्क आ जाते हैं जिनके आधार पर इतिहासकार और विज्ञान खुद मान रहा है कि हो न हो इस संरचना का निर्माण किसी अलौकिक शक्ति के द्वारा ही किया गया है.

वर्ष 1876 में इंग्लैंड की हिस्टोरिकल स्पेशलिस्टों की एक टीम ने इस कैलाश मंदिर का दौरा किया, उनमें से एक एम्मा हेंड्रिक ने अपनी किताब में लिखा है कि, यह मंदिर जितना बाहर से दिखाई देता है, इससे कई गुना ज्यादा विशाल है इस मंदिर के नीचे का तहखाना और उसमें बनी गुफाएं.

उन आर्कियोलोजिस्ट की रिसर्च में प्रमुख रूप से यह बात सामने आई थी कि, कैलाश मंदिर की इन गुफाओं में रेडिएशन है, और नीचे के इन तहखानों की गुफाओं में एक स्थान ऐसा है जहां से रेडियो एक्टिव तरंगे निकल रही हैं. जिसकी वजह से यहां पर ज्यादा समय तक रुकना असम्भव है.

जब इंग्लैंड की इस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कब्जा कर लिया तो यह कैलाश मंदिर उसके कब्जे में आ गया था. इस कारण से यहां पर खोज करने के लिए केवल अंग्रेज आर्कियोलोजिस्ट को ही परमिशन दी गई, और भारतीय आर्कियोलोजिस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था.

कई भारतीय शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का कहना है कि कैलाश मंदिर से इस्ट इंडिया कम्पनी अपार धन संपदा को चुरा कर ले गई और साथ ही वहाँ से एक ऐसा पौराणिक विशेष अस्त्र भी उठाकर ले गए थे जिसका नाम ‘भौम अस्त्र’’ था.

कहा जाता है कि उस लूट के बाद कैलाश मंदिर की इन गुफाओं को अंग्रेजों ने बंद कर दिया और इससे जुड़ी रिसर्च को भी नष्ट कर दिया गया था, मात्र इतना ही नहीं, उन्होंने यहां सरकारी तौर पर होने वाली भविष्य की किसी भी रिसर्च पर प्रतिबंध भी लगा दिया था, तब से लेकर आजतक वह प्रतिबन्ध जारी है.

आज भी यदि भारत सरकार ठीक प्रकार से इस कैलाश मंदिर से जुड़ी तमाम जानकारियों पर रिसर्च करवाए तो इस बात के कई ठोस सबूत मिल सकते हैं कि कैलाश मंदिर क्या है और इसके तहखाने में क्या पौराणिक रहस्य छुपे हुए हैं.

अंग्रेज़ों के जाने के बाद किसी भी प्रकार की रिसर्च पर प्रतिबंध के कारणों को लेकर भारत सरकार और पुरातत्व विभाग की और से औपचारिकताओं में मात्र यही बताया गया कि कैलाश मंदिर की इन गुफाओं में फिसलन वाली ढलाने हैं, इसलिए इनके अंदर जाने पर जान का जोखिम है. यही कारण है कि इन गुफाओं को बंद कर दिया गया.

आज के दौर में भारत सरकार को चाहिए कि वो कैलाश मंदिर की इन गुफाओं में एक नये सीरे से शोधकर्ताओं को जाने की इजाजत दे, ताकि सच्चाई को सामने ला सकें. भारतीय पुरातत्चविदों के पास आज आधुनिक तकनीकों के साथ अन्य कई प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं इसलिए जान का जोखिम भी नहीं है.

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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