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Epsitin का वन वर्ल्ड वन रिलिजन या कुछ ओर…

admin 14 February 2026
Pop Francis with Narendra Modi Prime Minister of India
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भविष्य पुराण में #Epstein को लेकर सांकेतिक तौर पर लिखा है कि समय आने पर “#कलि या #कलियुग” को उसके अनुयाई स्वयं जगाएंगे, और वहीं से कलि अपना शासन चलाना शुरू कर देगा। इस आधार पर यह माना जाना चाहिए कि कलयुग का वास्तविक शासन यहां से शुरू हो चुका है या होने वाला है। कलयुग का यह शासन चार लाख वर्षों तक कई छोटे बड़े बदलावों के साथ यूं ही चलता रहेगा। और जब 32 हजार साल का #संधिकाल शेष रहेगा (#द्वापर में यह संधिकाल इसका दोगुना यानी 64 हजार वर्षों का था) उसी काल में #कल्कि अपने अनुयायियों को विभिन्न नामों, रूपों और आवेश अवतारों के रूप में भेजेंगे ताकि वे वहां कल्कि की सहायता कर सकें।

यानी ये तो अभी ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है। सोचिए कि उसके अनुयाई अगर इतने वीभत्स हैं तो वह खुद कैसा होगा? Epstein मामले को लेकर पौराणिक तथ्यों के अनुसार इतना ही कहा जा सकता है कि भारत में भी राजनीतिक तौर पर उसने यानी कलि शैतान ने लगभग दो दशक पहले से भूमिका बांधना शुरू कर दिया था और आज भी वो वही कर रहा है जिसको हम समझ नहीं पा रहे थे और आज भी नहीं समझ रहे हैं।

जिस देश का शासन या शासन पद्धति, उसकी प्रजा के आगे झुक कर गलतियों को या पापों को स्वीकार करने लग जाएगा या स्वीकार कर क्षमा मांग लेगा और दंड भी भुगत लेगा, तो समझ लेना कि सही मायने में उस देश में कलयुग ने अभी तक भी कदम नहीं रखे हैं। और यदि कोई शासक या शासन पद्धति झुकने को तैयार नहीं है और पाप और पापियों के सहयोगी बनकर प्रजा पर अत्याचार करते रहेंगे तो स्वयं समझ लेना कि वह राज्य या क्षेत्रफल बहुत जल्द अपनी सभ्यता को नष्ट करने पर उतारू है। ऐसी परिस्थितियों में शासको पर आश्रित न होकर प्रजा अपनी रक्षा स्वयं करेगी। इसलिए भविष्य पुराण में स्पष्ट लिखा है कि समय आने पर कई क्षेत्र ऐसे भी होंगे जहां पर कोई शासक या शासन नहीं होगा और बिना शासन पद्धति के ही शासन चलेगा। आपकी संपत्ति, सगे संबंधी आदि वही माने जायेंगे जो आपके शरीर के आसपास दिखेंगे।

हमारे शासकों ने “वन वर्ल्ड वन रिलिजन” का जो नया नारा दिया था उसको आज न सिर्फ अच्छे से समझ जाना चाहिए बल्कि स्वयं से हर एक शब्दों का अर्थ भी स्पष्ट निकाल लेना चाहिए। यहां इसका स्पष्ट संकेत है कि यदि उदाहरण के लिए देखा जाए तो अमेरिका में कोई नीति बन रही है तो उसका पालन भारत में भी करना होगा। अमेरिका में कोई उत्पाद बन रहा है तो उसका भोग भारत में भी करना होगा। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं लगाया जाना चाहिए कि यदि अमेरिका तरक्की कर रहा है तो भारत भी तरक्की करेगा, क्योंकि भारत एक उपनिवेशन बनकर रह जाएगा और अमेरिका यहां पर प्रत्यक्ष शासन करने की क्षमता हासिल करने वाला है। और यदि नहीं समझ पा रहे हैं तो आपको किसी ऐसे व्यक्ति से इसका अर्थ समझना चाहिए जो शुद्ध “जिओ पॉलिटिक्स” में विश्वास रखता हो ना कि संवैधानिक, प्रतिवादी या नेतागिरी जैसी किसी पॉलिटिक्स में।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को मुख्य रूप से इन्हीं शैतानी शक्तियों ने एक प्रयोग के तौर पर नए रूप में पेश किया है। देखा जाए तो 5G भी यही लोग लेकर आए हैं क्योंकि इसका उद्देश्य ही कुछ और है और ये भी आने वाले समय में पता चलेगा। सोने चांदी की कीमतों में जो उछाल आ रहा है या मार्केट में जो कमी देखी जा रही है वह भी इसी का एक नतीजा है जिसके माध्यम से आपको केवल कागज के नोट थमा कर या डिजिटल के नाम पर आपके पासबुक में सिर्फ आपके धन का एंट्री करवा कर आपको धनवान बनाए जा रहा है लेकिन वास्तव में देखा जाए तो आपके हाथ में सिर्फ वही है जिस मकान में आप रह रहे हैं या जिस खेत में आप खेती कर रहे हैं।

सरकारी स्कीमों के नाम “कॅश लोन फॉर गोल्ड” जैसी स्कीमों के नाम पर आज कई लोग प्रसन्न हो होकर अपना सारा सोना को चांदी बैंकों को देकर आर्थिक मानसिक तौर पर ठन-ठन गोपाल होते जा रहे हैं । लेकिन वे मात्र इतना नहीं जान पा रहे हैं कि कैश यानी नकदी रुपयों की कीमत मात्र कागज के सामान है। जबकि सोना चांदी की कीमत तो हमेशा वही रहती है, चाहे किसी भी देश या नेता का काल हो।

आप मात्र इतना जान लें कि आने वाले मात्र कुछ वर्षों में ही आपका अपना घर और अपनी खेती आदि भी खत्म होने वाला है क्योंकि इस पर भी सरकारों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। यह नीतियां अमेरिका में बनी है और पूरी तरह से अमेरिका है इसमें हम भारतीय शासकों को अगर दोस्त देंगे तो सिर्फ इतना कि वह उनके पिछलग्गु बनकर, औपनिवेशिक बनकर उनका कहना मान रहे हैं।

रूस, चीन, ईरान और नॉर्थ कोरिया जैसे देश के लोग या वहां के शासक अभी भी कलि राक्षस से दूरी बनाए हुए हैं इसलिए वहां के लोग भले ही कितने भी बुरे हों, कलि के वश में नहीं हुए हैं। लेकिन पश्चिम उनको तानाशा मानता है क्योंकि वे अपनी स्वदेशी नीतियों पर चलते हैं और अमेरिका की बात नहीं मानते। भारतीय भी इस पश्चिम के साथ मिलकर इन देशों के नेताओं को तानाशाह इसलिए मानता है क्योंकि वास्तविकता से दूर होकर भारतीयों ने पश्चिम को शत प्रतिशत अपना रखा है। कुछ लोग जो यह बात कहते हैं कि अमेरिका से अच्छा है कि भारत को चीन से दोस्ती कर लेनी चाहिए, यह बात आज समझ में आ जानी चाहिए कि चीन जैसा भी है, वह मांस भक्षि जरूर है, लेकिन इतना बड़ा नरभक्षी नहीं है जितना की आज हम एक विशेष देश को देख रहे हैं।

#एपस्टीनफाइलें #जोबाइडेन #EpsteinFiles

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