Skip to content
7 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

क्यों किया जा रहा है संविधान का प्रचार…?

admin 21 February 2026
Indian Constitution being promoted why
Spread the love

अजय चौहान | खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर के 12वीं पास एक छात्र ने हार मानने के बजाय, खुद संविधान पढ़ा और सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका (SLP) तैयार की और अपना केस लड़ा। उसके पास दिल्ली जाने के पैसे नहीं थे, तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसने खुद पैरवी की। जब उन्होंने CJI की बेंच के सामने विनम्रता से 10 मिनट मांगे, तो उनकी दलीलों ने इतिहास बदल दिया।

बात ये है कि जिस संविधान के द्वारा इस छात्र को न्याय की बात की जा रही है, असल में तो 25 जनवरी 1950 से पहले तक यह संविधान था ही नहीं। और इससे भी बड़ी बात की जिन देशों से भारत के संविधान की तुलना की जा रही है आश्चर्य की बात है कि उन देशों में तो संविधान ही नहीं है। और यदि उन बड़े से बड़े देशों में संविधान है भी तो ये जान लीजिए की संविधान के नाम पर वहां मात्र कुछ पन्नों की छोटी सी डायरी जैसी ही छपी हुई है और जो शासन चलता है वो भी संविधान जैसी किताब के आधार पर नहीं है बल्कि अपने मत, पंथ और रिलिजन के आधार पर, यानी चर्च के आधार पर शासन को चलाते हैं जैसे कि भारत में 1950 से पहले तक मनुस्मृति का शासन हुआ करता था। क्योंकि अगर वहां संविधान होता तो आप खुद देख सकते हैं कि यूरोप के किसी भी देश के राष्ट्रध्यक्ष ने और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने या ओबामा जैसे लोगों ने भी जब राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी तो कौन सी किताब पर हाथ रखा था और मोदी ने कौन सी किताब को हाथ जोड़ा था कौन से ईश्वर का नाम लिया था?

ऐसे में जरा खुद भी तो सोचो कि भारत में 1950 से पहले तक कौन किसका मुकदमा लड़ता था? असल में इसके पहले तक भारत में मनुस्मृति से शासन चलता था और आज का ये छात्र भी उसी मनुस्मृति के आधार पर ही मुकदमा जीता है। हमारे आज के इस संविधान में भी आधे से अधिक कानून तो मनुस्मृति से लिये गए हैं लेकिन कोई इसको खुलकर नहीं बता पा रहा है। क्योंकि सच बता दिया तो मनुस्मृति कि प्रशंसा हो जाएगी और संविधान को हटाने के लिए फिर कोई नया आंदोलन शुरू कर सकता है।

जरा खुद सोचिए की अमेरिका से आज तक संविधान या कानून में बदलावों के लिए कोई आंदोलन, संघर्ष या फिर संविधान संशोधन जैसी कोई खबरें क्यों नहीं आती? ठीक यही हाल यूरोप के छोटे बड़े सभी देशों का भी है वहां से भी संविधान को लेकर ऐसी कोई खबरें नहीं आती कि उसमें ऐसे ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं या करने चाहिए या बदलाव के लिए कोई बहुत बड़े आंदोलन हो रहे हों। क्योंकि इन देशों में आधुनिक संविधान नहीं है बल्कि आज भी वहां वही परंपरागत शासन चल रहा है जो भारत में 1950 से पहले तक चल रहा था।

छात्रा के माध्यम से आज तो इस संविधान का प्रचार जानबूझकर किया जा रहा है। क्योंकि हिंदुओं ने अपना इतिहास पढ़ना तो छोड़ दिया है लेकिन अंग्रेजों के सही इतिहास को भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसीलिए हिंदुओं को यह मालूम नहीं है कि आज से 100 वर्ष या डेढ़ सौ वर्ष पहले क्या-क्या होता था और क्या नहीं होता था।

जरा सोचिए कि अंग्रेजों ने तो भारत में 1857 की क्रांति के बाद ही आज के ये कानून, पुलिस, थाना, न्यायालय और जज बनाए थे जिनको आज भी कोई बदल नहीं पाया। असल में इसके पहले इन कानून, पुलिस, जज आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। क्योंकि तब भारत में मनुस्मृति चल रही थी और मनुस्मृति का शासन चल रहा था। मनुस्मृति का पालन करवाने के लिए शंकराचार्य धर्मराज के तौर पर नियुक्त थे जो क्षेत्रीय स्तर के राजाओं के माध्यम से इसकी देखरेख करवाते थे। जबकि शंकराचार्य जी के आने से पहले यानी कि करीब ढाई हजार वर्ष पहले तक संपूर्ण भारतवर्ष के राजा को चक्रवर्ती सम्राट कहा जाता था।

हमारे आज के शासक तो वर्तमान की छोटी-मोटी व्यवस्था को भी बदल नहीं पा रहे हैं। किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि नरेंद्र मोदी को इतना बड़ा बहुमत अचानक से कैसे मिल गया था? दरअसल, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने तो ऐसे ऐसे वादे कर दिए थे कि यदि वे उनमें से आधे भी पूरा कर देते तो हमारा देश मात्र 10 से 15 वर्षों के अंदर ही अमेरिका को पछाड़ सकता था। इसीलिए तो हिंदुओं ने उनको खुलकर बहुमत और साथ दिया था।

About The Author

admin

See author's posts

50

Post navigation

Previous: किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने चरण सिंह राजपूत
Next: भारतीय मीडिया – समाप्ति की ओर…!

Related Stories

bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026
what nonsense is this - let them say
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

admin 31 March 2026
Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

095822
Total views : 176003

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.