संदीप देव | शंकराचार्य जी को बदनाम करने के लिए आजतक-सरकार फिक्सिंग का साक्ष्य देखिए। आजतक तथाकथित कुकर्म पीड़ित का साक्षात्कार ले रहा है और वह तथाकथित पीड़ित कह रहा है कि उसके साथ काशी के जोशी मठ में लगातार यह सब होता था, वहां वीआईपी आते थे!
जबकि सच तो यह है कि काशी में जोशी मठ है ही नहीं। जोशी मठ उत्तराखंड के चमोली में है। काशी में शंकराचार्य जी का विद्यामठ है, जो 1990 के दशक में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने बनवाया था।
अब सवाल उठता है:-

१) यदि यह तथाकथित पीड़ित शंकराचार्यजी का विद्यार्थी था तो इतने वर्षों में उसे मठ का सही नाम पता कैसे नहीं चला?
२) उसके बयान से स्पष्ट है कि वह शंकराचार्य जी का न कभी छात्र रहा, न वह काशी के विद्या मठ में कभी गया है। उसे उसके ‘मास्टरों’ ने जो पढ़ा कर भेज दिया, वह वही बोल रहा है।
३) आजतक की संलिप्तता इससे स्पष्ट होती है कि पत्रकार ने तथाकथित पीड़ित से क्रॉस क्वेश्चन भी नहीं किया कि आप काशी में जिस जोशी मठ की बात कर रहे हैं, वह तो उत्तराखंड में है?
४) उप्र पुलिस या पुलिस के साथी हिस्ट्रीशीटर आशुतोष ने स्क्रिप्ट दिया तथाकथित पीड़ित और आजतक दोनों ने वही पढ़ दिया, ऐसा ही प्रतीत होता है।
५) मेरी जानकारी में केस को कमजोर देखते हुए शंकराचार्य जी की चारित्रिक हत्या के लिए सरकार की ओर से तीन चैनलों को ‘सुपारी’ दी गई है, जिसमें से एक आजतक है। आजतक की पोल तो इसी साक्षात्कार से खुल गई है!
दूसरा चैनल वो है, जिसका एडिटर खुद जेल में रह चुका है और चिल्ला-चिल्ला कर अपना फ्रस्ट्रेशन जाहिर करने के लिए मशहूर है! तीसरा चैनल एक ‘सरकारी मित्र’ का चैनल है! इन चैनलों पर फर्जी रिपोर्टिंग के बाद अन्य चैनल उसी लाईन पर काम करने के लिए विवश हो जाएंगे और फिर सामूहिक मीडिया ट्रायल के जरिए शंकराचार्य जी की चारित्रिक हत्या का लंबा अभियान चलाया जाएगा!
६) जुवनाइल जस्टिस कहती है कि पीड़ित बच्चों की पहचान गुप्त रहेगी, उसका मीडिया ट्रायल नहीं होगा, परंतु कानून को धता बताते हुए आजतक यदि यह साक्षात्कार कर रहा है तो निश्चित रूप से ‘ऊपर’ से आए ‘आदेश’ के तहत कर रहा है।
७) इसकी टाइमिंग भी देखिए। कल तथाकथित पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट आई, जो सीलबंद लिफाफे में थी, जिसे न्यायधीश द्वारा खोलने से पहले सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है, परंतु उस रिपोर्ट पर प्रेस कांफ्रेंस हिस्ट्रीशीटर और प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल शर्मा का ‘क्लोज-फ्रेंड’ आशुतोष कर रहा था! उसे यह रिपोर्ट किसने दिया? अब सवाल यह उठता है?
भारतीय मीडिया – समाप्ति की ओर…!
८) उधर आशुतोष मीडिया को बयान दे रहा था कि मेडिकल रिपोर्ट में अविमुक्तेश्वरानंद जी द्वारा कुकर्म की पुष्टि हुई है और इधर आजतक तथाकथित पीड़ित का साक्षात्कार चलाने लगा! इस दोनों को एक साथ जोड़ कर देखिए तो एक सोची-समझी साजिश के तहत शंकराचार्य जी की चारित्रिक हत्या का प्रयास किया जा रहा था मीडिया ट्रायल के जरिए, जबकि रिपोर्ट अभी सीलबंद लिफाफे में है और पीड़ित का साक्षात्कार कानूनन अपराध है!
९) तथाकथित दोनों पीड़ित करीब 20 दिनों तक पुलिस कस्टडी या जुवेनाइल कस्टडी की जगह हिस्ट्रीशीटर आशुतोष की कस्टडी में रह रहे थे, हो सकता है मेडिकल में कुकर्म की पुष्टि कर शंकराचार्य जी को बदनम करने के लिए इन बीस दिनों में उसके साथ आशुतोष के सान्निध्य में कुकर्म किया या करवाया गया हो?
१०) मेडिकल में कुकर्म की पुष्टि हो सकती है, यदि इन बीस दिनों में उसके साथ कुकर्म किया गया हो, फर्जी साक्ष्य बनाने के लिए, लेकिन यह कैसे साबित होगा कि वह कुकर्म शंकराचार्य जी या उनके शिष्य ने किया? इसके लिए तो शिकायतकर्ता को अदालत में साबित करना होगा कि जिस दिन की घटना वो बता रहा है उस दिन शंकराचार्य जी और उन पीड़ितों के बीच कोई कांटेक्ट हुआ था! जिसे साबित किए बिना शंकराचार्य जी पर अपराध सिद्ध नहीं हो सकता है।
११) इसी बिंदु पर केस ढह जाएगा, क्योंकि जिस तथाकथित पीड़ित को यही नहीं पता है कि शंकराचार्य जी का काशी आश्रम जिसमें वह अपने रहने का दावा कर रहा है, उसका नाम क्या है? फिर उसकी झूठ वैसे ही खुल जानी है। साथ ही माघ मेले में जिस दिन की घटना वह बता रहा है, उस दिन शंकराचार्य जी शिविर के बाहर मीडिया के कैमरे के समक्ष थे।
१२) केस के इन्हीं अनेक कमजोर कड़ियों को देखते हुए ‘मास्टरों’ ने मेडिकल रिपोर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए आशुतोष को आगे कर दिया और उसी दिन तथाकथित पीड़ित को आजतक चैनल पर प्रकट कर दिया ताकि जब तक केस लंबा चले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी की चारित्रिक हत्या कर दो, उनके एक मात्र दंडी संन्यासी की चारित्रिक हत्या कर दो और फिर अपनी पसंद का बीफ सपोर्टर किसी संघाचार्य को शंकराचार्य बनाकर ज्योतिर्मठ पर बैठा दो!
१३) कहते हैं न कि झूठ को याद रखना पड़ता है! वही बात हुई। आजतक और तथाकथित पीड़ित झूठ को याद नहीं रख सके, इसलिए चमोली के जोशीमठ को काशी में बताकर खुद ही अपना झूठा चेहरा देश को दिखा दिया!
१४) साथ ही कथित मेडिकल रिपोर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आशुतोष हिस्ट्रीशीटर ने यह साबित कर दिया कि इस दुराचार में उसका साथी उप्र पुलिस है, क्योंकि बंद लिफाफा अभी पुलिस के पास ही है, अभी अदालत नहीं पहुंचा है तो सवाल है कि बंद लिफाफा खोलकर आशुतोष को पढ़ाया किसने?
१५) ज्ञात हो कि उप्र पुलिस के प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर और माघ मेले में शंकराचार्य जी के संन्यासियों को मारने वाले अजयपाल शर्मा के साथ आशुतोष हिस्ट्रीशीटर की एक नहीं, दो-दो फोटो, वह भी बेहद क्लोज फ्रेम वाली पब्लिक डोमेन में सामने आ चुकी है।
१६) बता दूं कि यही अजयपाल शर्मा वर्ष 2025 में कुंभ भगदड़ के समय वहां का नोडल अधिकारी था, जिस पर अनेक हिंदू श्रद्धालुओं की हुई मौत के लिए कार्रवाई करने की जगह योगी सरकार ने उसे पदोन्नति देकर सम्मानित किया था।
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