प्रयागराज (24 मई)। उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी की ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठी (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के बाईसवें दिन प्रयागराज जिले की सात विधानसभाओं में विशाल जनसभाएँ एवं यात्रा कार्यक्रम सम्पन्न हुए। उंबरा जनशाला सहित प्रयागराज के अनेक स्थानों पर जनसम्पर्क एवं कार्यक्रम आयोजित हुए। दिन का समापन पत्थरचट्टी रामलीला कमेटी में उद्बोधन एवं आशीर्वादवचन के साथ हुआ। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
ऐतिहासिक घोषणा — ‘उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद्’ का विधिवत गठन –
इस दिन एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत घोषणा की गई। वरिष्ठ विधिज्ञों, प्रबुद्धजनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद्’ का विधिवत गठन किया गया। इसका आधार माघ मेला 2026 तथ्य-अन्वेषण समिति का प्रतिवेदन (धारा 6/2/3) है — जो ज्योतिषपीठाधीश्वर की परंपरागत पालकी शोभायात्रा एवं गंगा स्नान के दौरान राज्य प्रशासन एवं पुलिस द्वारा किए गए अनुचित व्यवहार की गहन जाँच के बाद तैयार किया गया है। सम्पूर्ण प्रतिवेदन https://maghmela2026factfinding.com/ पर हिंदी एवं अंग्रेजी में उपलब्ध है। महाराजश्री ने इस परिषद् की अध्यक्षता कृपापूर्वक स्वीकार की है।
परिषद् के तीन मूल स्तंभ हैं:
(1) संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता को राज्य शक्ति के अनुचित हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना।
(2) हिंदू मंदिरों, संतों एवं तीर्थस्थलों की रक्षा हेतु एक सुदृढ़ विधिक सेल (Legal Cell) की स्थापना।
और (3) सरकार एवं प्रशासन को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित रखना — सनातन की पारंपरिक धार्मिक क्रियाओं को नियंत्रित करने से रोकना।
परिषद् के गठनकर्ता: श्री शम्भुप्रेमानन्द ब्रह्मचारी | संपर्क: 9005764468 | ईमेल: uphdp1008@gmail.com
’संविधान का अनुच्छेद 48 — गौ रक्षा का संवैधानिक दायित्व — 78 साल का विश्वासघात’
प्रयागराज में अधिवक्तागण एवं विधिक विशेषज्ञों की सभा को संबोधित करते हुए महाराजश्री ने सीधा प्रश्न किया: “आप संविधान के पैरोकार हैं — बताइए, क्या अनुच्छेद 48 का पालन हो रहा है?” उन्होंने उस संवैधानिक प्रावधान का उल्लेख किया जो भारत राज्य को गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध करता है। “78 साल बीत गए। एक भी सरकार ने इस संवैधानिक दायित्व के प्रति एक भी ठोस कदम नहीं उठाया। जब सुविधा होती है तो संविधान का हवाला दिया जाता है — लेकिन अनुच्छेद 48 पहले दिन से है और पहले दिन से उपेक्षित है।”
उन्होंने कहा यह केवल धर्म का नहीं, संवैधानिक अनुपालन का प्रश्न है। “बहुमत 78 साल से पुकार रहा है — गौ हत्या बंद करो। लोकतंत्र में बहुमत का सम्मान होना चाहिए। बहुमत बोल रहा है और ठुकराया जा रहा है। क्या यह लोकतंत्र है?”
’धर्मनिरपेक्षता का ठेका केवल हिंदुओं को — संविधान का सबसे बड़ा छलावा’ –
महाराजश्री ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता की मूलभूत विषमता उजागर की। मुसलमान मदरसे खोलकर इस्लाम पढ़ा सकते हैं — सरकारी मान्यता और अनुदान मिलता है। ईसाई बाइबल स्कूल खोलकर ईसाई धर्म पढ़ा सकते हैं — सरकारी मान्यता और अनुदान मिलता है। लेकिन हिंदू अगर सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालय में धर्मशास्त्र पढ़ाने लगे तो तत्काल आपत्ति, अनुदान रद्द, मान्यता समाप्त।
उन्होंने कहा: “यह धर्मनिरपेक्ष संविधान नहीं है — यह एक ऐसा संविधान है जिसने धर्मनिरपेक्षता का ठेका केवल हिंदुओं को दिया है। मुसलमान धार्मिक है, ईसाई धार्मिक है, सिख धार्मिक है — केवल हिंदू धर्मनिरपेक्ष है। लाखों हिंदू मंदिरों की व्यवस्था सरकार करती है जिन अधिकारियों को धर्म का ‘ध’ भी नहीं पता। एक भी मस्जिद, एक भी गिरजाघर सरकार के अधीन नहीं। केवल हमारे मंदिर क्यों?”
उन्होंने एक तीखी उपमा दी: उत्तर प्रदेश का नाम अंग्रेजों के United Province (UP) से आया है। स्वतंत्रता के बाद हमने नाम बदला — लेकिन UP का संक्षिप्त नाम नहीं छूटा। U से उत्तर, P से प्रदेश कर लिया — UP रह गया। ठीक वैसे ही अंग्रेजों ने गाय को पशु सूची में गधे, खच्चर, सूअर के साथ लिखा था। 78 साल बाद भी वह सूची नहीं सुधरी। हम अंग्रेजी नाम और अंग्रेजी वर्गीकरण — दोनों लेकर चल रहे हैं।
’मुसलमान और ईसाई राष्ट्र माता के पक्ष में — केवल राजनीतिक हिंदू की जीभ लड़खड़ाती है’ –
महाराजश्री ने एक महत्त्वपूर्ण अवलोकन किया: आज मुख्यधारा के मुसलमान और ईसाई कह रहे हैं — गाय को राष्ट्र माता घोषित करो, हमें कोई आपत्ति नहीं। सनातनी हिंदू तो सदा से कहता आया है कि गाय हमारी माता है। लेकिन जिन्होंने गौ रक्षा के नाम पर वोट लिया, गाय की आरती-पूजा के फोटो छपवाए, वीडियो बनवाए — उन्हीं के मुँह से ‘माता’ शब्द नहीं निकल पा रहा।
”जब आपका मतदाता कह रहा है कि गाय हमारी माता है — तो उसके वोट से बनी सरकार गाय को पशु कैसे कह सकती है? और केवल एक दिन नहीं — 78 साल से हठपूर्वक पशु कह रही है। पशु सूची से गाय को हटाने में एक रुपया नहीं लगता, कोई बजट नहीं चाहिए। केवल एक भाव परिवर्तन। पाठ्यपुस्तक में माता लिख दो — बच्चे माता जैसा भाव रखेंगे। बस इतना।”
’धर्मशास्त्र वास्तविक संविधान है — उसका क्षेत्राधिकार समस्त विश्व और परलोक तक’ –
अधिवक्ताओं से महाराजश्री ने कहा: “कुछ लोग पूछते हैं — संविधान बड़ा है या धर्म? मानने से कोई बड़ा नहीं होता — क्षेत्राधिकार से बड़ा होता है। आपके संविधान का क्षेत्राधिकार केवल भारत तक है, केवल इस लोक तक। हमारे धर्म का क्षेत्राधिकार समस्त विश्व में है — और मृत्यु के बाद परलोक में भी। आपका संविधान परलोक की बात ही नहीं करता। धर्मशास्त्र लोक और परलोक दोनों का विधान करता है। यह तुलना नहीं है — यह तथ्य है।”
उन्होंने स्पष्ट किया: “हम संविधान की आलोचना नहीं कर रहे। संविधान ने ही अनुच्छेद 25-26 के माध्यम से हमें अपनी परंपरा और शास्त्र के अनुसार जीने का अधिकार दिया है। लेकिन जब संविधान का उपयोग हिंदुओं के विरुद्ध चुनावी हथियार की तरह किया जाए — तब संविधान का भी अपमान होता है।”
’वोटर पहला अनुमंता है — आपकी दंड संहिता भी यही कहती है’ –
महाराजश्री ने शास्त्रीय श्लोक उद्धृत किया: “अनुमंता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी, संस्कर्ता उपहर्ता च खादकश्चेति घातकाः” — गौ हत्या के आठ समान पापी: अनुमति देने वाला, काटने वाला, मारने वाला, खरीदने-बेचने वाला, पकाने वाला, परोसने वाला और खाने वाला।
उन्होंने अधिवक्ताओं से सीधे कहा: “आपकी भारतीय दंड संहिता भी कहती है — जो किसी अपराध का सहयोगी है, वह भी उतना ही दोषी है। यही सिद्धांत यहाँ लागू होता है। मतदाता जो उस सरकार को वोट देता है जो कत्लखाने को लाइसेंस देती है — वह पहला अनुमंता है। सरकार को शक्ति वोट से मिलती है, फिर वह लाइसेंस देती है, फिर गौ हत्या होती है। इसीलिए घर में दरिद्रता है, रोग है, कलह है — पाप पहले अनुमंता के सिर पर बैठता है।”
श्री बालेंद्र धर द्विवेदी सिराथू विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त — ‘एक नोट’ अभियान –
प्रयागराज में सिराथू विधानसभा की सभा में श्री बालेंद्र धर द्विवेदी आगे आए और उन्हें सिराथू विधानसभा में राम गौधाम निर्माण के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।
महाराजश्री ने निर्देश दिया: एक समिति बनाएं, घर-घर, गाँव-गाँव संपर्क करें, प्रत्येक निवासी से ₹1 से ₹500 तक का एक नोट एकत्र करें और उस राशि से भव्य दिव्य राम गौधाम बनाएं — जहाँ गौ माता सज-धजकर, स्वस्थ-प्रसन्न रहकर पूरे क्षेत्र को रोम-रोम से आशीर्वाद दें।
सामूहिक संकल्प — सिराथू तहसील परिसर में चक्रधारी मुद्रा –
महाराजश्री ने सिराथू तहसील के पवित्र परिसर में उपस्थित जनसमुदाय से सार्वजनिक घोषणा करवाई:
”मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरी माता है। मेरी गौ माता को जो सताएगा या सताने वाले का साथ देगा, वह आज से मेरा शत्रु है — उससे शत्रुवत् व्यवहार करूँगा। आने वाले चुनाव में बिजली, पानी, सड़क जैसे मुद्दों को पीछे रखकर गौ माता की रक्षा के लिए वोट करूँगा। जिस पार्टी को मेरा वोट चाहिए, वह गौ को अपने-अपने स्तर पर माता घोषित करे — ऐसा करके आए तो हर वोट पाए। नहीं कर सकता तो हमारे दरवाजे न आए।”
तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया।
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प –
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठी यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
