भविष्य पुराण में स्पष्ट लिखा है कि “कलयुग में मानव निर्मित नियम-धर्मों का इतना अधिक विकास होगा कि उन नियमों को बनाने वाले मनुष्य स्वयं ही भूल जायेंगे कि वे मनुष्य हैं या ईश्वर।”
आज यदि किसी भी व्यक्ति या ईश्वर के प्रति श्रद्धा के दो भेद होते हैं – एक स्थायी और दूसरा अस्थायी। स्थायी श्रद्धा वहाँ होती है, जिसमें कभी भी कमी नहीं हो सकती। स्थायी श्रद्धा यदि ईश्वर में हो जाय तो यह लाभकारी होती है। लेकिन किसी व्यक्ति या किसी संस्थान आदि में हो जाय तो कभी-कभी बहुत बड़ी हानि दे जाती। दूसरी तरफ स्थायी श्रद्धा बाजार में मिलने वाली वस्तुओं के भावों की तरह घटती-बढ़ती रहती है। लेकिन अस्थायी श्रद्धा भी बढ़ते-बढ़ते अन्त में स्थायी श्रद्धा में परिणत हो सकती है। वही श्रद्धा आज हमको ईश्वर से विमुख और व्यक्ति तथा संस्थाओं में देखने को मिल रही है।
एक समय था जब हमारे यही प्रमुख और अधिकतर मंदिर विवाह और सगाई जैसी रस्मों के लिए बिना कहे आरक्षित हो जाया करते थे, और अलग से इनमें व्यवस्थाएं भी आरक्षित रहतीं थीं। मगर आज उन्हीं रस्मों के कारण मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं, मानो वे महाकाल मंदिर में हनीमून मनाने गए थे, तोड़फोड़ करने या लूटने गए थे।
धन्यवाद शंकराचार्य परंपरा का कि दक्षिण में तो आज भी यही प्रचलन और परंपराये वहां के मंदिरों में कायम हैं। मुझे याद है, मेरे एक सिख समुदाय से जुड़े मित्र ने गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने ही सगाई की और फेरे भी लिए थे मैं भी उस समारोह में शामिल हुआ था। चर्च में भी यही परंपरा कायम है क्योंकि इन सभी ने हिंदू धर्मस्थलों की गतिविधियों को देख कर ही अपने-अपने मतों में अपनाया है। लेकिन हमारी उन्हीं प्राचीन परम्पराओं के कारण यहां ख़ास कर उत्तर भारत में संवैधानिक पदों पर बैठे इन वीआईपी लोगों के प्रोटोकॉल की व्यवस्था भंग हो रही है। मतलब यदि कोई सनातनी जोड़ा गृहस्थ जीवन में धर्म की तरफ जरा-सा भी बढ़ना चाहे तो वीआईपी समाज की व्यवस्था भंग हो जाती है।
मंदिरों में वैवाहिक समारोह आदि से यदि वीआईपी प्रोटोकॉल की व्यवस्था भंग हो जाती है तो हिंदू समाज को चाहिए कि इन नियमों या वी.आई.पी. कल्चर के विरुद्ध आवाज उठायें और मंदिरों में वीआईपी का प्रवेश एकदम बंद करने की मांग करें। क्योंकि हिंन्दू मंदिर हिंदुओं के दान और दर्शन से चलते हैं, किसी वी.आई.पी. कल्चर या उनके प्रोटोकॉल से नहीं।
क्या भगवान् महाकालेश्वर अपना मंदिर छोड़ चुके हैं? Has Lord Mahakaleshwar abandoned temple in Ujjain?
दरअसल, खबर है कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर परिसर में नियमों का उल्लंघन कर इंस्टाग्राम रील बनाने का एक नया विवाद सामने आया है। जिसके बाद सिक्योरिटी एजेंसी पर 50,000 का जुर्माना और जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है।
31 May 2026 को टाइम्स न्यूज नेटवर्क में प्रकाशित इस खबर के अनुसार, सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना के बाद हरकत में आई महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने 28 मई को पूरे मामले की आंतरिक जांच बैठाई। जांच में सुरक्षा और नियमों की बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद शुक्रवार को मंदिर प्रशासन ने दोषी सुरक्षा एजेंसी और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। परिसर में बिना अनुमति के किसी भी तरह की फोटोग्राफी या रील बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
26 मई को अपलोड हुए इस वीडियो के वायरल होते ही, मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। दिल्ली से आए एक जोड़े ने वीआईपी प्रोटोकॉल व्यवस्था का फायदा उठाकर मंदिर के संवेदनशील क्षेत्र गणेश मंडपम में सगाई की और अंगूठी पहनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
वैसे तो महाकाल मंदिर प्रशासन के अनुसार बिना अनुमति रील बनाने पर रोक लगी हुई है लेकिन मंदिर परिसर के भीतर केवल विशेष परिस्थितियों में और प्रशासन की लिखित मंजूरी के बाद ही फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी की जा सकती है।
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