कानपुर नगर (01 जून)। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ का जिला कानपुर नगर की छह विधानसभाओं — आर्यनगर, गोविंदनगर, कल्याणपुर, दण्डी आश्रम आजाद नगर, बिठूर और बिल्हौर — में भव्य स्वागत हुआ। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
‘भगवान शिव ने गौ को सबसे ऊँचा स्थान दिया — नंदी उनका द्वारपाल प्रमाण है’ –
महाराजश्री ने कहा: इस सृष्टि में यदि किसी ने गाय को सर्वोच्च स्थान दिया है तो वे भगवान सदाशिव हैं। उन्होंने अपने घर में गौशाला की स्थापना की और गाय को सर्वोच्च सम्मान दिया। परिणामतः नंदी सदा उनके दरवाजे पर खड़े रहते हैं — सेवा में निरत। शास्त्र की शिक्षा है: जो गाय को सर्वोच्च स्थान देगा, गाय स्वयं उसके दरवाजे आएगी और उसकी सेवा करेगी। और एक बात: भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जिनकी पूजा सदा सपरिवार होती है — शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी। क्यों? क्योंकि शिव ने गाय का सम्मान किया — और जो गाय का सम्मान करता है, उसका परिवार एकजुट रहता है।
‘भाई-बहन के लिए एक ही माँ होनी चाहिए — वह माँ है गौ माता’ –
महाराजश्री ने एक गहरी बात उद्घाटित करते हुए बताया कि, जब भी कोई निजी मंच पर ‘भाई-बहन’ कहता है तो यह एक ऐसा दावा है जिसकी परीक्षा होनी चाहिए। दो लोग भाई-बहन तभी होते हैं जब उनकी एक माँ हो। आपकी जन्मदात्री माँ अलग है, मेरी अलग है। तो हमारी एक समान माँ कौन सी है? गौ माता। इसीलिए हम एक-दूसरे को भाई-बहन कहते हैं — क्योंकि हम सब गौ माता को अपनी माँ मानते हैं। जिसका अर्थ है: जो गौ माता को माता नहीं मान सकता, वह हमारा भाई नहीं हो सकता। जो निजी मंच से भाई-बहन कहते हैं लेकिन गाय को माता कहने में उनकी जीभ अटकती है — उन्होंने परिवार कहलाने का अधिकार खो दिया।
महाराजश्री ने नीति शास्त्र का गहरा श्लोक उद्धृत किया:
“गावो बन्धुर्मनुष्याणां मनुष्या बन्धवस्तथा।
यस्मिन् देशे द्वयं नास्ति तद्राष्ट्रं बन्धुवर्जितम्॥”
अर्थात – गाय मनुष्य का बंधु है और मनुष्य गाय का बंधु। दोनों एक-दूसरे से बंधे हैं। आपने गाय को रस्सी से बाँधा — और गाय ने भी आपको बाँध लिया। शाम को आप घर आते हैं तो मन में होता है: गाय को पानी देना है। गाय ने भी आपको बाँध लिया। और जिस घर में गाय नहीं है — उस घर में बंधु नहीं है। यही शास्त्र कहता है।
हनुमान जी गौशाला के रक्षक देवता हैं — ‘प्रमुख्ये हनुमान कार्ये’ –
महाराजश्री ने एक अल्पज्ञात कथा सुनाई। जब अहिरावण पाताल लोक में एक लाख गायों की बलि देने वाला था और राम-लक्ष्मण का अपहरण कर चुका था — हनुमान जी पहुँचे। उन्होंने पाँचों दिशाओं में जल रहे पाँच दीपों को एक साथ बुझाने के लिए अपना पंचमुखी रूप धारण किया और अहिरावण का वध किया। जब छुड़ाई गई गायों ने कहा कि ‘आप तो चले जाएंगे, फिर कोई आएगा और हमें मारेगा — कोई स्थायी समाधान दीजिए’ — हनुमान जी ने वचन दिया: ‘अपने गोष्ठ में मेरी प्रतिष्ठा कर लो। मैं सदा तुम्हारी रक्षा में नियुक्त रहूँगा।’
महाराजश्री ने कहा: ‘इसीलिए दक्षिण भारत में हर गौशाला के दरवाजे पर हनुमान जी का मंदिर होता है — क्योंकि वहाँ के लोग यह कथा जानते हैं। और जब हनुमान जी राम जी से पूछने गए कि एक साथ दोनों की सेवा कैसे करूँगा — राम जी ने कहा: गायों की पीड़ा मुझसे भी नहीं देखी जाती। उन्हीं के आँसुओं के कारण मेरा अवतार हुआ। तुम मेरी सेवा छोड़ो, गायों की रक्षा करो।’
‘गौ के कारण राम का अवतार — गौ सेवा राम सेवा से भी बड़ी है’ –
महाराजश्री ने एक महत्वपूर्ण धर्म-सिद्धांत उद्घाटित किया: जब अधर्म बढ़ा और पृथ्वी पर भार हो गया, तो गायें अश्रु बहाती हुई ब्रह्मा जी के पास गईं। उनकी पीड़ा राम अवतार का कारण बनी। ‘राम गायों के कारण आए। और इसलिए: जब एक ही समय में राम का काम और गाय का काम सामने आ जाए — राम का काम छोड़ा जा सकता है, गाय का काम छोड़कर राम की पूजा नहीं होती। गौ सेवा सर्वोच्च सेवा है — यह हमारे धर्म का स्थापित सिद्धांत है।’
‘एक धागा अभी बाकी है — कोई हिंदू बीफ नहीं खाता — नेता इसे भी तोड़ना चाहते हैं’ –
महाराजश्री ने एक गंभीर अवलोकन किया: हिंदू समाज ने समय के साथ अनेक धर्म-चिह्न छोड़ दिए — तिलक, चोटी की परंपराएँ, दैनिक अनुष्ठान। लेकिन एक धागा कभी नहीं टूटा: कोई हिंदू बीफ नहीं खाता। मांसाहारी हिंदू भी गाय का मांस नहीं छूते। ‘जब कोई हिंदू को दूसरे धर्म में धर्मांतरित करना चाहता है तो पहली शर्त यही रखी जाती है: बीफ खाओ। यह इस एक धागे का महत्त्व है।’
उन्होंने बंगाल की एक सत्य घटना सुनाई — एक राजघराने की लड़की ने इस्लाम कबूल किया, निकाह किया, लेकिन जब ससुराल ने गृह-प्रवेश की शर्त रखी कि पहले बीफ खाओ — उसने मना कर दिया। दशकों बीत गए, उसके चार बच्चे हुए, बड़े हो गए, उनकी शादी हो गई — लेकिन आज तक उसे ससुराल में प्रवेश नहीं मिला क्योंकि उसने बीफ नहीं खाया। ‘धर्म बदलने के बाद भी यह धागा टूटा नहीं। यह इस बंधन की शक्ति है।’

उन्होंने चिंता जताई कि कई नेताओं ने बीफ खाने को सार्वजनिक रूप से सामान्य बताया है और घोषणा की है कि बीफ खाने वालों का वोट भी उन्हें चाहिए। ‘जिस दिन हिंदू बीफ खाना शुरू कर देगा, उस दिन हिंदू, मुसलमान, ईसाई में कोई अंतर नहीं रहेगा। हमारी पहचान समाप्त हो जाएगी। यही लक्ष्य है। हमें सावधान रहना होगा।’
श्री नीरज गुप्ता मलाई वाले को गोविंदनगर विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त किया गया –
गोविंदनगर विधानसभा की सभा में श्री नीरज गुप्ता मलाई वाले जी आगे आए और उन्हें विधानसभा में ‘एक नोट अभियान’ एवं ‘गौ धाम निर्माण’ के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। उनके साथ एक और सह-प्रतिनिधि भी जुड़े। दोनों मिलकर हर वार्ड में एक टीम बनाएंगे, हर घर में जाएंगे, प्रत्येक निवासी से ₹1 से ₹500 का एक नोट एकत्र करेंगे और उस राशि से गौ धाम बनाएंगे। महाराजश्री ने कहा: ‘हमने गाय को चित्रों में ही सजाया-धजाया देखा है। गौ धाम में वह सजावट वास्तविकता बनेगी।’
तीन आह्वान — घोषणा, वोट, नोट –
महाराजश्री ने तीन मूल आह्वान दोहराए।
सार्वजनिक घोषणा: ‘गाय मेरी माता है’ — केवल मन में नहीं, खुलकर सबके सामने।
वोट: इस चुनाव में बिजली-पानी-सड़क नहीं — गौ माता की रक्षा के लिए वोट।
नोट: हर निवासी अपनी जेब से एक नोट — गौ धाम के लिए। ‘आपके हाथ से दिया एक नोट आपको सीधे गौ माता के आशीर्वाद से जोड़ता है।’
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई –
“मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरी माता है। मेरी गौ माता को जो पशु कहेगा या उसे चोट पहुँचाएगा — आज से उससे मेरा संबंध टूटा। आने वाले चुनाव में वोट अवश्य दूँगा — लेकिन केवल उस पार्टी या प्रत्याशी को जो गाय को माता घोषित करके आए। बिना माता घोषित किए आने वाले के लिए हमारा दरवाजा बंद है।”
तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में — दाहिना हाथ उठाकर पहली उंगली ऊँची करके — वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का तीन बार सामूहिक उच्चारण करवाया गया।
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प –
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
मीडिया टीम –
‘परमाराध्य’ परमधर्मधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ‘1008’
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