श्रीहरि विष्णु जब भी अवतार लेते हैं तो वो अवतार युग के अंत में ही होता है। भगवान कल्कि श्रीहरि विष्णु के दशावतारों में अंतिम अवतार माने जाते हैं। अतः भगवान कल्कि का अवतार भी वर्तमान कलियुग के अंत में होगा। क्योंकि उस समय तक संपूर्ण पृथ्वी पर अधर्म, पाखण्ड, हिंसा, अन्याय और धर्म-विमुखता अपनी चरम सीमा पर पहुँच जायेंगे। उसके बाद ही भगवान कल्कि प्रकट होकर दुष्टों का संहार करेंगे, धर्म की पुनः स्थापना करेंगे और अगले सत्ययुग का आरम्भ करेंगे।
कल्कि अवतार के प्रमाण –
सबसे प्रसिद्ध वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण में मिलता है।
श्लोक (भागवत 12.2.18–20)
शम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति॥
अर्थात – कलियुग के अंत में शम्भल ग्राम के महान ब्राह्मण विष्णुयश के घर भगवान कल्कि प्रकट होंगे।
अश्वमाशुगमारुह्य देवदत्तं जगत्पतिः।
असिनासाधुदमनमष्टैश्वर्यगुणान्वितः॥
अर्थात – भगवान देवदत्त नामक तीव्रगामी श्वेत अश्व पर आरूढ़ होकर दिव्य तलवार से अधर्मियों का विनाश करेंगे।
विचरन्नाशुना क्षौण्यामधर्मिकनृपान् विभुः।
हनिष्यत्यसतां कोट्यो वायुवेगेन दारुणः॥
अर्थात – वे पृथ्वी पर घूमकर अधर्मी शासकों तथा दुष्टों का शीघ्र संहार करेंगे।
कलियुग की दशा –
श्रीमद्भागवत महापुराण में कलियुग का अत्यन्त मार्मिक वर्णन है।
ततः चानुदिनं धर्मः
सत्यं शौचं क्षमा दया।
कालेन बलिना राजन्
नङ्क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः॥ (भागवत 12.2.1)
अर्थात – कलियुग में समय के प्रभाव से धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरण-शक्ति क्रमशः घटती जाएगी।
भगवान कल्कि का स्वरूप –
शास्त्रों के अनुसार— तेजस्वी दिव्य पुरुष, श्वेत अश्व देवदत्त पर आरूढ़, हाथ में प्रज्वलित दिव्य तलवार, विष्णु के पूर्ण तेज से युक्त और धर्म के पुनर्स्थापक। अर्थात उनका तेज करोड़ों सूर्य के समान बताया गया है।
कल्कि अवतार का कारण –
जब सत्य लुप्त हो जाएगा। धर्म केवल नाममात्र रह जाएगा। गुरु, माता-पिता और संतों का सम्मान समाप्त हो जाएगा।छल, कपट और हिंसा सामान्य जीवन का अंग बन जाएगी। राजा या शासक जब प्रजा का पालन करने के बजाय उनका शोषण करेंगे तब भगवान कल्कि अवतार ग्रहण करेंगे।
भगवान कल्कि का जन्म –
स्थान: शम्भल ग्राम।
पिता: ब्राह्मण विष्णुयश।
माता: परम्परा में सुमति का उल्लेख मिलता है (विशेषतः कल्कि पुराण में)।
भगवान कल्कि के गुरु –
भगवान परशुराम, जो चिरंजीवी हैं, भगवान कल्कि को शस्त्र, शास्त्र और दिव्य अस्त्रों की शिक्षा देंगे। इसका विस्तृत वर्णन कल्कि पुराण में मिलता है।
भगवान कल्कि का उद्देश्य –
भगवान अधर्मी राजाओं और दुष्ट शक्तियों का अंत कर धर्मप्रिय लोगों की रक्षा करेंगे, अतः भगवद्गीता का यह प्रसिद्ध श्लोक कल्कि अवतार पर भी लागू होता है—
परित्राणाय साधूनां
विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय
सम्भवामि युगे युगे॥ (गीता 4.8)
अर्थात – सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में अवतार लेता हूँ।
भगवान कल्कि की दिव्य तलवार –
भगवान की तलवार केवल युद्ध का शस्त्र नहीं, बल्कि अधर्म के विनाश, अज्ञान के नाश तथा धर्म की विजय का प्रतीक है।
सत्ययुग का आरम्भ –
दुष्टों का विनाश होने के बाद पृथ्वी पुनः पवित्र हो जायेगी। तत्पश्चात धर्म की स्थापना होगी और उसमें मनुष्यों का आचरण सात्त्विक होगा। तभी तो सत्ययुग का पुनः आरम्भ होगा।
नमोऽस्तु ते कल्किरूपाय विष्णवे परमात्मने।
धर्मसंस्थापनार्थाय नमस्ते पुरुषोत्तम॥
अर्थात – हे परमात्मा विष्णु! कल्कि रूपधारी प्रभु, आपको नमस्कार है। धर्म की स्थापना करने वाले पुरुषोत्तम प्रभु, आपको बार-बार प्रणाम।
