उत्तर प्रदेश की सत्ता में एक बड़े परिवर्तन का संकेत देते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले कुछ महीनों से सनातन धर्म की ओर रुख का संकेत दिया है। अखिलेश यादव को उम्मीद है कि वे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के माध्यम से एक बार फिर से प्रदेश में वापसी कर सकते हैं। यही कारण है कि अपनी वापसी के लिए वे पिछले कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और शंकराचार्य जी के साथ हुई प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर की कई प्रकार की अप्रिय घटनाओं के चलते इसका लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि अभी तक यह निश्चित नहीं है कि अखिलेश यादव केवल सत्ता परिवर्तन और सत्ता का लाभ लेने के लिए शंकराचार्य जी से संपर्क बनाए हुए हैं या फिर वास्तव में सनातन धर्म को पूर्ण रूप से धारण करने और समर्थन करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। क्योंकि उन पर मुस्लिम वोटरों का पक्ष लेने का भी दबाव बना रहता है। इसके लिए न सिर्फ समाजवादी पार्टी बल्कि पूरा यादव परिवार जाना जाता है। यदि सनातन का समर्थन और लाभ लेने के इरादे से अखिलेश यादव शंकराचार्य जी से संपर्क में है तो अभी तक गाय माता को राज्य माता के साथ-साथ राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए भी वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन में सहयोग कर सकते थे। लेकिन आश्चर्य तो इस बात का है कि अभी अखिलेश यादव की तरफ से सीधे-सीधे ऐसा कोई संकेत अथवा वक्तव्य प्राप्त नहीं हो रहा है। इसलिए सनातन धर्म से जुड़े हुए अधिकतर वोटर्स जो समाजवादी पार्टी से धोखा खा चुके हैं वे अभी इस विषय को लेकर हिचकिचा रहे हैं कि यदि हम भाजपा का साथ छोड़ देते हैं तो इसके विकल्प के रूप में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सनातन धर्म के प्रति बिना भेदभाव की हो सकती है अथवा नहीं?
दरअसल, खबरों के अनुसार सपा सुप्रीमों एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार (9 जुलाई) सुबह 8 बजे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान अखिलेश शंकराचार्य जी के चरणों में बैठकर चर्चा करते हुए नजर आए। लगभग 30 मिनट बाद अखिलेश जब उस मुलाकात के बाद बाहर आए तो उन्होंने मीडिया से कहा की शंकराचार्य जी गऊ माता को लेकर बहुत चिंतित हैं। वे रास्ता निकाल रहे हैं कि किसी भी तरीके से गोमाता को राष्ट्रीय सम्मान मिल जाए। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि स्वयं अखिलेश यादव ने इस विषय पर अपना मत स्पष्ट क्यों नहीं किया है?
सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने ट्विटर (X) पर भी पोस्ट करते हुए लिखा है की आज प्रातः काल पूज्य शंकराचार्य जी के दर्शन एवं आशीर्वाद के सौभाग्यशाली क्षण और सनातन पर आए संकट को दूर करने व अधर्मियों के चंगुल से धर्म को मुक्ति दिलाने के लिए सार्थक वार्ता की।
दूसरी तरफ, अखिलेश यादव से हुई इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने भी मंदिर में हुए इस अपराध के विषय में कहा की घोटाला तो हुआ है, और यह कोई साधारण घोटाला भी नहीं है। हालांकि मुख्यमंत्री की कार्यवाही तो कर रहे हैं, और होनी भी चाहिए। लेकिन जब नया मुख्यमंत्री आएगा, तब तगड़ी कार्रवाई करेगा।
इसके अलावा अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसी घटना हमारे धर्म में महापाप है, और अपराधियों ने महापाप किया है। इसकी पोल खोलने के बाद से भाजपा में खासकर प्रदेश स्तर की राजनीति में भगदड़ की शुरूआत भी हो गई है। अखिलेश यादव ने आगे कहा कि बहुत सारे लोग मुझसे अभी से संपर्क करने मैं लग गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में दान-पात्र से हुई चोरी की घटना में SIT अभी तक तो सिर्फ लीपापोती ही कर रही है।
शंकराचार्य जी प्रदेश के साथ-साथ संपूर्ण भारत में ‘गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने’ के लिए 81 दिनों की गविष्ठी (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा पर निकले हुए हैं। इसी के तहत वे बुधवार को लखनऊ पहुंचे और फैजुल्लागंज क्षेत्र के एक गेस्ट हाउस में रात को विश्राम के लिए ठहरे। दरअसल, आपको बता दें कि अखिलेश यादव की शंकराचार्य जी से लगभग 4 महीने में यह दूसरी बार मुलाकात हुई है। इससे पहले 12 मार्च को लखनऊ में ही मुलाकात हुई थी। जबकि इस बीच वे शंकराचार्य जी के समर्थन में कई बार भी बयान दे चुके।
अखिलेश ने आगे कहा कि विपक्ष पर तो FIR हो रही है लेकिन विपक्ष की FIR नहीं लिखी जा रही। मंदिर परिसर में जो लोग काम करते थे उन सबकी CDR निकाली जाएजी तो उनमें से 99% लोग भाजपाई ही निकलेंगे। यदि ऐसा हो जाएगा तो उसके बाद भाजपा में ऐसी भगदड़ मचेगी की जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। अखिलेश यादव ने कहा कि फिलहाल तो SIT लीपापोती कर रही है। क्योंकि सुनने में आया है कि SIT पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। असल में तो यह लड़ाई बड़ी है और दिल्ली-लखनऊ के बीच चल रही है। यह ऐसी लड़ाई है जिसको हम और आप इसको नहीं समझ पा रहे हैं।
अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा के विचार वोट के लिए मौसम की तरह ही बदलते रहते हैं और अब तो उनके लिए धर्म उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना की धन प्राथमिकता है। जिन्होंने राम मंदिर की जिम्मेदारी ली थी, वे आज कहां हैं? आज भले ही वे यहां नज़र नहीं आ रहे हैं, लेकिन जनमानस के दिल-दिमाग में सबकुछ रिकॉर्ड हो चुका है। हम सब देख और समझ सकते हैं। इस समय दुनियाभर के सनातनी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भाजपा ने अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की मर्यादा को तोड़-मरोड़कर रख दिया है और धन के लालच में पड़कर अपने स्वार्थ में न जाने क्या-क्या पाप करते जा रहे हैं।
