Tuesday, June 23, 2026
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भारत का पुनर्निर्माण चल रहा है

जब कोई मकान बनाता है तो ज्यादा बनाने के बाद बीच बीच में थोड़ा बहुत तोड़ना भी पड़ता है। विशेष तौर पर, जब टाइल, ड्रेनेज सिस्टम, बिजली फिटिंग औऱ प्लास्टर के बीच बहुत तोड़फोड़ होती है।

तोड़फोड़ होती है लेकिन हम कहते हैं, मकान बन रहा है। कारीगर, मजदूर मकान बना रहे होते हैं, फिर अचानक ध्यान आता है यहाँ अधिक बन गया या गलत बन गया और तब तोड़ने वाले को बुलाते हैं।

प्रत्येक नया काम, पुराने में कुछ तोड़ फोड़ करवाता ही है। और यदि आप उसी घर में रह रहे हैं, जिसमें निर्माण कार्य चल रहा है तो फिर पूछो मत! शोर, मशीनों की धड़ाधड़ और कचरा। कई बार तोड़ने वाले इतनी निर्ममता से वार करते हैं कि चोट दीवार पर नहीं, आपके दिल पर हो रही होती है।

हमें पुराने निर्माता या स्वयं के निर्णय पर खीझ भी होती है कि काश, उस समय ऐसा करते तो यह सब नहीं झेलना पड़ता। कई व्यय ऐसे होते हैं जो हम बचा सकते थे। तब हमारे पास योग्य इंजीनियर नहीं थे या इतनी दूरदृष्टि नहीं थी इसलिए डबल खर्चा लग गया। पहले बनाने का, फिर तोड़ने का। निर्माण के साथ ध्वंस चलता रहता है।

हिंदुत्व की आखिरी उम्मीद अब मोदी-शाह नहीं बल्कि योगी और हेमंत विश्व शर्मा हैं!

सुंदर, फिनिशिंग वाला, व्यवस्थित निर्माण बहुत ज्यादा तोड़फोड़ मांगता है लेकिन बाद में जब सब बनकर तैयार हो जाता है तो बहुत अच्छा लगता है। एक सुगठित, सामर्थ्यशाली, स्वयं की अस्मिता के प्रति जागरूक भारत का पुनर्निर्माण चल रहा है।

इस भारत का स्वामी एकमात्र हिन्दू समाज है। इतने वर्षों तक उसे तो पता भी नहीं था कि यह मेरा इकलौता घर है। कई आक्रांता और किराएदार आये,गये, तहस नहस कर दिया। जहां पूजालय बनाना था वहाँ टॉयलेट बना गये, और भी काफी दुःख दर्द दिए।

लेकिन अब चूंकि पुनर्निर्माण चल रहा है तो बहुत सारी बातें होंगी। बीच बीच में हथौड़े और कटर चलेंगे। आपकी नींद भी भ्रष्ट होगी। पुरानी गन्दी आदतें हैं, अस्त व्यस्त रहने का स्वभाव बन गया है उस पर अंकुश लगाया जाएगा। हो सकता है हुक्का बीड़ी बाहर जाकर पीना पड़े, गुटका और पीक थूकने में समस्या आये लेकिन निश्चिंत मानिए, घर बन रहा है। तकलीफ सहन कीजिये। यह आपके और आपके बच्चों केलिए बहुत जरूरी है।

कोई सांई पर चिल्ला रहा है, कोई सब्सिडी पर, कोई निजीकरण पर तो कोई प्रसारण मंत्रालय या NCERT पर। बड़ा परिवार है, कई काम शेष हैं लेकिन नेतृत्व पर भरोसा रखिए। दुर्भेद्य किले जैसा घर बन रहा है, कोई इंदिरा आवास नहीं है। ध्यान दीजिए।

#कुमार. एस.

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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