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हार्वर्ड का लक्ष्य – मंदिर केवल पर्यटन स्थल बने धार्मिक स्थल नहीं

admin 9 February 2023
Harvard University
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आज जो आप हर तरफ जाति की गूंज सुन रहे हो, हर नेता के मुंह से ब्राह्मणों के प्रति विद्वेष का प्रस्फुटन देख रहे हो, जाति पर आए अदालतों के निर्माण को पलटते देख रहे हो, जातियों के लिए पैनल का गठन करते देख रहे हो, भीम-मीम और नवबौद्धवाद के शोर सुन रहे हो, जाति आधारित सांसदों की अलग से बैठक देख रहे हो; कभी सोचा है यह एकाएक अचानक क्यों बढ़ गया है?

नीचे का स्क्रीन शॉट देखो, और इसका विस्तृत अध्ययन करने के लिए राजीव मल्होत्रा की Snakes in Ganga पुस्तक को पढ़ो।
Snakes in Ganga
अमेरिका का हार्बर्ड विश्वविद्यालय इस सबका केंद्र है। भारत में जातियों की खाई को और चौड़ा करने के लिए वहां थिसिस लिखे जा रहे हैं, दबाव समूह को प्रमोट किया जा रहा है, हमारी नयी शिक्षा नीति तक हार्बर्ड से निकली है! और तो और हमारी सरकार हार्बर्ड सहित विदेशी विश्वविद्यालय को सीधे यहां अपना कैंपस खोलने की अनुमति दे चुकी है। #LGBTQ और Woke मुद्दा भी हार्बर्ड स्पांसर है।

हमारी सरकार, संस्था और नेता सब हार्बर्ड सर्टिफाइड होने के लिए लालायित हैं। इसीलिए महाभारत-पुराण में समलैंगिकता ढूंढी जा रही है और रामचरितमानस में स्त्री और जाति विरोध। यह अभी और बढ़ेगा, क्योंकि अब्राहमिक कल्चर के लिए हिंदू समाज सबसे बड़ी बाधा है, जिसे 1000 साल के शासन के बावजूद वो नष्ट नहीं कर सके हैं।

अब इसे अपने ही लोगों द्वारा नष्ट करवाने का षड्यंत्र चल रहा है। राजा राममोहन राय और गांधी की कड़ी में ही ये आज के नेता और बाबा हैं।

हिंदू समाज चूंकि धर्म की जगह व्यक्ति केंद्रित होता जा रहा है, इसलिए अब्राहिम ताकतें व्यक्तियों को अपने एजेंडे के लिए आगे करती हैं। चूंकि गृहस्थ महिलाएं एवं पुरोहित वर्ग आज भी कर्मकांड, अनुष्ठान, मूर्ति पूजा, मंदिर को पकड़े हुए हैं, इसलिए हिंदू धर्म यह आघात बार-बार झेल लेता है।

मंदिरों के दान पर कब्जा कर पहले पुरोहित वर्ग को समाप्त किया गया। आगे भविष्य में मंदिरों में पारंपरिक पुरोहित की जगह सरकार सर्टिफाइड पुरोहित रखे जाएंगे ताकि अनुष्ठानिक परंपरा की सदियों से चली आ रही चैन तोड़ी जा सके। यह समानता, दलितवाद के नाम से होगा, क्योंकि यह प्रयोग दक्षिण भारत एवं उत्तर भारत के कुछ मंदिरों में पहले भी किया जा चुका है, लेकिन अब बड़े पैमाने पर सरकारी सर्टिफिकेट के जरिए इसे अंजाम दिया जाएगा।

चूंकि इस पर दलितवाद का आवरण चढ़ा होगा तो फिर इसका विरोध बड़े पैमाने पर करना संभव नहीं हो सकेगा! ब्राह्मणों पर हमले और बढ़ जाएंगे। हां दशक-दो दशक बाद इसके परिणाम अवश्य सामने आएंगे, लेकिन तब बचाने को कुछ नहीं बचेगा! वैसे भी हार्बर्ड भारत विखंडन के लिए 2047 तक का लक्ष्य निर्धारित करके चल रहा है!

हार्वर्ड का लक्ष्य सरकार और अदालत के जरिए ही अपने ‘वोक एजेंडे’ को मंदिरों में लागू करना है। मंदिर केवल पर्यटन स्थल बने रहें। धर्म, शुचिता और तीर्थ का भाव वहां से गायब हो जाए ताकि भविष्य में वोकिज्म व धर्मांतरण की राह आसान हो सके।

हिंदू नेता, हिंदू बाबा, हिंदू पार्टी और हिंदू संगठन के जरिए इसे किया जा रहा है ताकि उन पर विश्वास जमा चुका हिंदू समाज इसका खुलकर विरोध न कर सके। इसमें भी उसे भारत व हिंदू कल्याण ही नजर आए! कभी ऐसे ही राजा राममोहन राय, गांधी, आंबेडकर, नेहरू आदि के हर हिंदू विरोधी अभियान में हिंदुओं को अपना कल्याण ही नजर आता था। इन लोगों ने भारत व हिंदू समाज का कितना कल्याण किया, आप अध्ययन कर सकते हैं? लेकिन उस समय इनका विरोध धर्म, देश और प्रगतिशीलता का विरोध माना गया था! जरा सोचिए! आज भी वही तो हो रहा है?

मंदिर के साथ परिवार व्यवस्था को भी टारगेट पर रखा गया है, क्योंकि महिलाएं परिवार में अभी भी धार्मिक अनुष्ठान को जीवित रखे हुए हैं।‌ LGBTQ, समलैंगिकता, वैवाहिक बलात्कार, व्यभिचार को अपराध से बाहर रखना, विवाह से बाहर यौन संबंधों की अदालती स्वीकृति आदि के ‘सुप्रीम फैसले’ लिखने वाले न्यायधीशों पर नजर डालें, वो भी आपको हार्बर्ड विचारधारा वाले ही मिलेंगे! परिवार टूटते ही सदियों पुरानी परंपरा और धर्म का धागा भी टूट जाएगा, फिर हिंदू समाज का विखंडन आसान हो जाएगा!

इस ‘वोक मूवमेंट’ को पहचानने और बचने का आपके पास एक ही रास्ता है कि आप नियमित अध्ययन को अपने जीवन का आधार बनाएं। रामायण, महाभारत या गीता में से किसी एक से अपने अध्ययन को आरंभ करें। वर्तमान खतरे को आगाह करने वाले Snakes in Ganga जैसी पुस्तकें पढ़ने का प्रयास करें।

पूर्ण अवतार परमात्मा की जगह किसी नेता, बाबा, संस्था पर आंख मूंद कर भरोसा न करें। उनके हर निर्णय व बयान को अपनी बुद्धि की तराजू पर तौलें। अन्यथा आपका परिवार टूटेगा, तलाक की दर समाज में बढ़ेगी, विदेशी और अर्थहीन नाम वाले बच्चों की संख्या बढ़ती जाएगी और फिर फिर एक दिन आपकी अगली पीढ़ी आपको ही पहचानने से इनकार कर देगी। आप या तो घुटकर मरेंगे या फिर धर्मांतरण को बाध्य होंगे!

सावधान रहें, आंखें खुली रखें, बुद्धि की धार को अध्ययन-मनन से तराशते रहें और अपने सनातन संस्कार को बचाए रखें।

Snakes in Ganga का लिंक: https://www.kapot.in/product/snakes-in-the-ganga-hb/

#sandeepdeo #book #kapotbooks

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