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औरंगज़ेब के इतिहास से जुड़ा ज्ञान घोटाला या शाजिश?

admin 19 September 2023
Aurangzeb
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ऑड्रे ट्रश्के नामक एक विदेशी इतिहासकार है जिसने सन वर्ष 2017 में मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की जीवनी पर एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है “Aurangzeb: The Man and the Myth.” इस पुस्तक में लेखिका ने यह बताने का प्रयास किया है कि औरंगज़ेब एक धर्मांध शासक नहीं अपितु एक बहुत ही दयालु शासक था। इसके बाद यह लेखिका भारत भी आई थी। भयंकर विरोध के कारण हैदराबाद में इनके सम्मान में आयोजित होने वाला एक कार्यक्रम स्थगित हुआ करना पड़ा था।

इससे पहले भी यह लेखिका श्री राम को नारीविरोधी (श्री राम को नारीविरोधी नारे) करार देकर अपने आपको निंदा का पात्र बनवा चुकी हैं। कमाल की बात तो यह है कि इस लेखिका ने औरंगज़ेब पर लिखे गए पूर्व इतिहासकारों जैसे सर यदुनाथ सरकार, विन्सेंट स्मिथ आदि की रचनाओं को अनदेखी कर ऊंट को पहाड़ पर चढ़ाने का प्रयास किया है।

Aurangzeb in Delhi
इतिहास भावनाओं से नहीं प्रमाणों से लिखा जाता हैं। मगर भारतीय इतिहास भावनाओं से भी नहीं अपितु राजनीतिक एजेंडा को पूरा करने के दृष्टीकौन से लिखा जाता है।

फ्रांकोइस गौटिएर (Francois Gautier) द्वारा बीकानेर के संग्राहलय से मिले फारसी भाषा के प्रमाणों को अगर इस लेखिका ने देखा होता तो वह कभी ऐसी गप्प नहीं हाँकती। इतिहास भावनाओं से नहीं प्रमाणों से लिखा जाता हैं। मगर भारतीय इतिहास भावनाओं से भी नहीं अपितु राजनीतिक एजेंडा को पूरा करने के दृष्टीकौन से लिखा जाता है। इस लेख के माध्यम से सिद्ध किया गया है की औरंगज़ेब हिन्दू प्रजा का दमन करने में कितनी रूचि लेता था।

औरंगज़ेब के कारनामे:-

औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए फरमानों का कच्चाचिट्ठा –
1.  13 अक्तूबर,1666- औरंगजेब ने मथुरा के केशव राय मंदिर से नक्काशीदार जालियों को जोकि उसके बड़े भाई दारा शिको द्वारा भेंट की गयी थी को तोड़ने का हुक्म यह कहते हुए दिया की किसी भी मुसलमान के लिए एक मंदिर की तरफ देखने तक की मनाही हैंऔर दारा शिको ने जो किया वह एक मुसलमान के लिए नाजायज हैं।

2. 12 सितम्बर 1667- औरंगजेब के आदेश पर दिल्ली के प्रसिद्द कालकाजी मंदिर को तोड़ दिया गया।

3. 9 अप्रैल 1669 को मिर्जा राजा जय सिंह अम्बेर की मौत के बाद औरंगजेब के हुक्म से उसके पूरे राज्य में जितने भी हिन्दू मंदिर थे उनको तोड़ने का हुक्म दे दिया गया और किसी भी प्रकार की हिन्दू पूजा पर पाबन्दी लगा दी गयी जिसके बाद केशव देव राय के मंदिर को तोड़ दिया गया और उसके स्थान पर मस्जिद बना दी गयी। मंदिर की मूर्तियों को तोड़ कर आगरा लेकर जाया गया और उन्हें मस्जिद की सीढियों में दफ़न कर दिया गया और मथुरा का नाम बदल कर इस्लामाबाद कर दिया गया। इसके बाद औरंगजेब ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर का भी विध्वंश कर दिया।

4. 5 दिसम्बर 1671 औरंगजेब के शरीया को लागु करने के फरमान से गोवर्धन स्थित श्री नाथ जी की मूर्ति को पंडित लोग मेवाड़ राजस्थान के सिहाद गाँव ले गए जहाँ के राणा जी ने उन्हें आश्वासन दिया की औरंगजेब की इस मूर्ति तक पहुँचने से पहले एक लाख वीर राजपूत योद्धाओं को मरना पड़ेगा।

5. 25 मई 1679 को जोधपुर से लूटकर लाई गयी मूर्तियों के बारे में औरंगजेब ने हुकुम दिया की सोने-चाँदी-हीरे से सज्जित मूर्तियों को जिलालखाना में सुसज्जित कर दिया जाये और बाकि मूर्तियों को जमा मस्जिद की सीढियों में गाड़ दिया जाये।

6. 23 दिसम्बर 1679 औरंगजेब के हुक्म से उदयपुर के महाराणा झील के किनारे बनाये गए मंदिरों को तोड़ा गया। महाराणा के महल के सामने बने जगन्नाथ के मंदिर को मुट्ठी भर वीर राजपूत सिपाहियों ने अपनी बहादुरी से बचा लिया।

7. 22 फरवरी 1680 को औरंगजेब ने चित्तोड़ पर आक्रमण कर महाराणा कुम्भा द्वाराबनाएँ गए 63 मंदिरों को तोड़ डाला।

Aurangzeb attacks on Somnath temples
औरंगजेब ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर का भी विध्वंश करवा दिया था।

8. 1 जून 1681 औरंगजेब ने प्रसिद्द पूरी का जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने का हुकुम दिया।

9. 13 अक्टूबर 1681 को बुरहानपुर में स्थित मंदिर को मस्जिद बनाने का हुकुमऔरंगजेब द्वारा दिया गया।

10. 13 सितम्बर 1682 को मथुरा के नन्द माधव मंदिर को तोड़ने का हुकुम औरंगजेब द्वारा दिया गया। इस प्रकार अनेक फरमान औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए।

हिन्दुओं पर औरंगजेब द्वारा अत्याचार करना –
अप्रैल 2, 1679 को औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया गया जिसका हिन्दुओं ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्वक विरोध किया परन्तु उसे बेरहमी से कुचल दिया गया। इसके साथ-साथ मुसलमानों को करों में छूट दे दी गयी जिससे हिन्दू अपनी निर्धनता और कर न चूका पाने की दशा में इस्लाम ग्रहण कर ले।

अप्रैल 16, 1667 को औरंगजेब ने दिवाली के अवसर पर आतिशबाजी चलाने से और त्यौहार बनाने से मना कर दिया गया। इसके बाद सभी सरकारी नौकरियों से हिन्दू क्रमचारियों को निकाल कर उनके स्थान पर मुस्लिम क्रमचारियों की भरती का फरमान भी जारी कर दिया गया। हिन्दुओं को शीतला माता, पीर प्रभु आदि के मेलों में इकठ्ठा न होने का हुकुम दिया गया। साथ ही हिन्दुओं को पालकी, हाथी, घोड़े की सवारी की मनाई कर दी गयी।

साथ ही यह भी आदेश जारी किया गया की कोई हिन्दू अगर इस्लाम ग्रहण करता तो उसे कानूनगो बनाया जाता और हिन्दू पुरुष को इस्लाम ग्रहण करने पर 4 रुपये और हिन्दू स्त्री को 2 रुपये मुसलमान बनने के लिए दिए जाते थे। ऐसे न जाने कितने अत्याचार औरंगजेब ने हिन्दू जनता पर किये और आज उसी द्वारा जबरन मुस्लिम बनाये गए लोगों के वंशज उसका गुण गान करते नहीं थकते हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर विदेशी लेखक कुछ भी परोस कर चले जाते हैं। इसे ही तो इतिहास ज्ञान घोटाला कहते हैं।
– साभार

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