Skip to content
18 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • मन की बात
  • षड़यंत्र

जग्गी वासुदेव की चेतावनी – गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से हमें सीखना ही होगा, वरना…

admin 20 April 2021
Jaggi Vasudev
Spread the love

अजय सिंह चौहान  || सद्गुरु जग्गी वासुदेव, एक ऐसी शख्सियत है जिनको हमारे अपने ही देश के हिन्दीभाषी क्षेत्रों के बहुत कम लोग जानते होंगे, लेकिन, भारत के बाहर के लोग जितना उन्हें जानते हैं और जितना चाहते हैं या जितना उनके प्रवचनों को वे लोग सूनते हैं या फिर यूं कहें कि विदेशी मूल के लोग जितने उत्सूक रहते हैं उनके कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए, उनकी संख्या किसी से छूपी नहीं है।

सीधे-सीधे कहें तो जग्गी वासुदेव, हिन्दू धर्म के लिए एक ऐसे धार्मिक गुरु हैं जो किसी भी प्रश्न का जवाब बेबाक फिलासफीकल अंदाज में देने की क्षमता रखते हैं। लेकिन, शायद ये भी एक बदकिस्मती है कि जिस धर्म या जिस समुदाय के वे धर्मगुरु हैं, खुद वही समुदाय उनके बारे में बहुत कम जानता है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी के बारे में कहा जाता है कि कुछ साल पहले तक वे सिर्फ धार्मिक प्रवचनों और योग प्रचारक के तौर पर ही सीमित थे। लेकिन, अब वे खुल कर समाज और सामाजिक कार्यों के लिए सामने आ रहे हैं।

यहां ये भी ध्यान रखना होगा कि जग्गी वासुदेव अपने धर्म और अपने कर्म के बल पर अब एक बड़ी सख्सियत बन चुके हैं। इसलिए उन पर ऊंगनी उठाना आसान नहीं होगा, लेकिन, ये भी सच है कि उंगली उठाने वालों को कोई रोक भी तो नहीं सकता, ऐसे में उंगली तो उठेगी ही। फिर चाहे वो किसी राजनैतिक पार्टी की तरफ से हो या फिर किसी धर्म विशेष की तरफ से। जग्गी वासुदेव भी अब किसी अच्छे दाग से बच तो नहीं सकते।

लेकिन, इसमें ध्यान रखने वाली बात ये होती है कि वो कौन लोग हैं जो किसी पर उंगली उठा रहे हैं और किस पर उंगली उठा रहे हैं? और आखिर, ऐसा क्या हुआ कि लोग उन पर उठा रहे हैं? और क्योंकि ‘सद्गुरू’ जग्गी वासुदेव जिस प्रकार का या फिर जिस काम को कर रहे हैं या फिर यूं कहें कि वे जिस धर्म विशेष के लिए ये कार्य कर रहे हैं ऐसे में यहां सब कुछ बताना जरूरी भी नहीं है कि उन पर उंगली कौन उठायेगा और क्यों उठायेगा? लेकिन इतना तो तय है कि बहुत जल्द हमको इसके उदाहण भी देखने और सूनने को मिल ही जायेंगे।

जग्गी वासुदेव यानी कि ‘सद्गुरू’ जी आजकल विशेष तौर पर तमिलनाडु के मंदिरों की आजादी के लिए संषर्घ कर रहे हैं। जी हां, मंदिरों की आजादी के लिए। तो अब जब वे मंदिरों की आजादी के काम कर रहे हैं तो आप समझ ही गये होंगे कि उन पर उंगली कौन उठायेगा और क्यों उठायेगा?

दरअसल भारत के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण के लिए सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी ‘ईशा फाउंडेशन’ के नाम से एक संस्था चला रहे हैं। ये अभियान तो वे काफी लंबे समय से चला रहे हैं। लेकिन, अब इसको वे समाज, सरकार और कानून के सामने सीधे-सीधे लाने की तैयारी में लग गये हैं।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने साफ-साफ कहा है कि वे खुद साल में एक या दो बार ही मंदिर जाते हैं लेकिन, इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि मंदिरों में मेरी आस्थान नहीं है। दरअसल हमारे मंदिर सिर्फ पूजास्थल नहीं है बल्कि स्थापत्य, कला, इतिहास और परंपरागत सांस्कृतिक और सामाजिक समारोह आदि के लिहाज से दुनिया के सबसे अनोखे, अद्भुत और बेहद अलग और पवित्र स्थान हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मंदिर ही हमारी धड़कन हैं और मंदिरों की वजह से ही हमारी पहचान है।

खास तौर पर तमिलनाडु के मंदिरों के बारे में सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी कहते हैं कि यहां के मंदिरों जैसी भव्य और आकर्षक कारीगरी वाली प्राचीन इमारतें पूरी दुनिया में ओर कहीं भी देखने को नहीं मिलती।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी का कहना है कि तमिलनाडु सहीत भारत के हर एक प्राचीन मंदिर को दुनिया के सातों अजूबों से कहीं ज्यादा आकर्षक और अनोखा कहा जा सकता है। बावजूद इसके, सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी का कहना है कि हमारा और हमारे मंदिरों का दुर्भाग्य ये है कि ईस्ट इंडिया कंपनी के राज में भारतीय मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण हो जाने के कारण न सिर्फ उनका अपमान हुआ है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से खोखला भी कर दिया गया। और तो और, सन 1947 में हमारे देश से ईस्ट इंडिया कंपनी के चले जाने के बाद से वह सरकारी नियंत्रण समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन, अफसोस कि बाद की सरकारें तो मंदिरों को लेकर ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार से भी ज्यादा विरोधी साबित हो कर उभरी।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी कहते हैं कि मैंने अपनी मोटर साइकिल पर भारत के कई हिस्सों की यात्राएं की हैं। कई धार्मिक स्थानों पर गया हूं, कई मंदिरों को करीब से देखा है। लेकिन, मैं जब भी तमिलनाडु के मंदिरों में जाता हूं तो, ये मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। ऐसा शायद इसलिए क्योंकि बहुत कम लोग ये बात जानते होंगे कि तमिनलाडु के ज्यादातर मंदिर ग्रेनाइट के पत्थरों को तराश कर बनाये गये हैं। और जिस तरह से इन मंदिरों में नक्काशी की गई है वैसी अद्भुत कलाकारी दुनिया में कहीं भी और किसी भी प्राचीन इमारत में देखने को नहीं मिलती।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव का कहना है कि मैं भारत से बाहर भी तमाम देशों में घूम चुका हूं। मैंने वहां की भी कई प्राचीन कलाओं को बारीकी से देखा है। उसी के आधार पर मैं ये बात कह सकता हूं कि ग्रेनाइट के पत्थरों को तराश कर उन्हें कलात्मक ढंग से आकार देना सिर्फ और सिर्फ प्राचीन भारतीयों के अलावा और कोई नहीं कर सकता था। क्योंकि ये बात सभी जानते हैं कि ग्रेनाइट पर नक्काशी करना एक बेहद मुश्किल कलाकारी का काम है, और तमिलनाडु के तमाम मंदिर तो प्रमाण हैं उस जीवंत प्राचीन कला, परंपरा और इतिहास के।

मंदिरों की दयनीय स्थित के बारे में जग्गी वासुदेव जी मानते हैं कि धर्म, अध्यात्म और समाज के लिए मंदिरों के इतना महत्वपूर्ण होने के बाद भी इनकी दयनीय हालत भविष्य के लिए चिंता में डाल देती है। क्योंकि, मंदिरों का वर्तमान दौर ऐसा चल रहा है जिसमें करीब 44,000 हिंदू मंदिरों की सालाना आय सिर्फ 128 करोड़ तक ही हो पाती है। जबकि इन हजारों मंदिरों की सालाना आय की तुलना अगर हम गुरुद्वारों से करें तो मात्र 85 गुरुद्वारों की सालाना आय से भी यह बहुत कम है।

सद्गुरु का कहना है कि यूनेस्को खुद भी तमिलनाडु के तमाम मंदिरों के ताजा हालत को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। जबकि तमिलनाडु सरकार ने खुद भी जुलाई 2020 में मद्रास हाईकोर्ट में प्रस्तुत होकर बताया था कि राज्य में करीब 11,999 ऐसे मंदिर है जिनमें वित्तीय संकट के चलते एक बार भी पूजा नहीं हो सकी है। जबकि करीब 34 हजार मंदिर ऐसे भी हैं, जिनकी वार्षिक आय मात्र 10,000 से भी कम है। इसके अलावा 37,000 मंदिर ऐसे भी थे जिनमें सिक्योरिटी, केयरटेकिंग, पूजा-पाठ और साफ-सफाई की व्यवस्था का जिम्मा केवल एक ही आदमी पर थ।

सद्गुरु ने गुरुद्वारों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े देते हुए बताया कि हिन्दू मंदिरों को सीखना चाहिए कि कैसे ‘गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी’ अपने समुदाय के लिए कार्य करती है और करीब 85 गुरुद्वारों के माध्यम से जनसेवा के कार्यों का संचालन करती है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी’ हमारे लिए प्रबंधन की एक मिसाल के तौर पर हो सकती है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी कहते हैं कि ये हमारा दूर्भाग्य है कि सरकार की देखरेख में चल रहे इन मंदिरों के इतने स्पष्ट और सटीक आंकड़े होने के बावजूद इन मंदिरों पर से अब तक भी ईस्ट इंडिया कंपनी का वो कानूनी कलंक हटाया नहीं जा रहा है।

About The Author

admin

See author's posts

1,873

Post navigation

Previous: छिन्नमस्तिका के वास्तविक रूप का क्या है अभिप्राय?
Next: जानिए क्यों? अब हर शिवलिंग धीरे-धीरे ‘ज्योतिर्लिंग’ बनता जा रहा है…?

Related Stories

World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026
UP Lucknow food safety news
  • अपराध
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • षड़यंत्र
  • स्वास्थ्य

मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल!

admin 4 March 2026
Shankaracharya Ji asked the government to free the grazing land immediately - Bhagalpur Bihar
  • विशेष
  • षड़यंत्र

साजिशकर्ता और न्यूज़ चैनल के झूठ का पर्दाफाश!

admin 27 February 2026

Trending News

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 1
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 2
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 3
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 4
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 5
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026

Total Visitor

093181
Total views : 171016

Recent Posts

  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.