जहां एक और योगी आदित्यनाथ जी की पुलिस की दुनियाभर में तारीफ हो रही है वहीं उसपर उंगलियां भी उठ रहीं हैं। असल में कुछ अच्छा करने वालों पर अक्सर उंगलियां उठना तो एक आम बात है। समाज में हर प्रकार के लोग होते हैं। अपराधी होते हैं तो उनके द्वारा प्रताड़ित लोग भी होते हैं। सज्जन लोग होते हैं तो दुर्जन भी होते हैं। वहीं अपराध होता है तो अपराधी भी होते हैं। लेकिन ऐसे में यदि कुछ अच्छा करने वाला कोई नेता या प्रशासन खड़ा हो जाय तो उसकी आलोचना मात्र इसलिए भी होती है क्योंकि समाज कुछ अच्छा देखने और अच्छा सहन करने का अपना परंपरागत अधिकार खो चुका होता है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जा रहा है कि प्रदेश आजकल एक ऐसा पुलिस स्टेट बन चुका है फिर भी अपराध नहीं रुक रहे है, इसलिए पुलिस धड़ाधड़ हाफ एनकाउंटर करने में लगी हुई है, ताकि अपराधियों में खौफ हो सके। लेकिन फिर भी अपराध में कमी नहीं दिख रही है। असल में पिछले 24 घंटे के अन्दर अकेले मुजफ्फर नगर में ही 7 एनकाउंटर हो चुके हैं, हालांकि यूपी पुलिस की इस लंगड़ा स्कीम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी कई बार टिप्पणी कर चुका है। संभवतः अपराधी उसी का लाभ लेना चाहते होंगे।
खबरों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ जहां एक और पुलिस का सख्त चेहरा देखने को मिल रहा है, उसके बाद भी अपराधियों में इसका भय नहीं दिख रहा है और खासकर अकेले मुजफ्फरनगर जिले में ही महज 24 घंटे के भीतर 7 पुलिस एनकाउंटरों को अंजाम दिया गया। इन मुठभेड़ों में नौ बदमाशों के पैरों में गोली लगी है, जबकि 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकार के ताबड़तोड़ एनकाउंटर्स ने एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ जी के उस शुरुआती प्रशासन की याद ताजा कर दी है और महज 24 घंटे के भीतर एक के बाद एक हुए इन एनकाउंटरों ने पुराने दौर के चर्चित पुलिस ऑपरेशनों और पूर्व आईपीएस अधिकारी नवनीत सिकेरा (Navniet Sekera) के समय की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब यूपी में एनकाउंटर मॉडल न केवल प्रदेश और देश में बल्कि दुनियाभर में सुर्खियों में रहता था।
प्रदेश की पुलिस के अनुसार, जिला मुज़फ्फरनगर के कई क्षेत्रों में एक के बाद एक ऑपरेशन चलाए गए और उसमें जिन आरोपियों को पकड़ा गया, उन पर लूट, डकैती, हत्या की कोशिश और गैंगस्टर एक्ट के तहत कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। इनमें दो ऐसे बदमाश भी शामिल हैं, जिन पर पहले ही से 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
दरअसल, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये सभी ऑपरेशन उस समय शुरू हुए जब पुलिस को बदमाशों की लोकेशन मिली। पुलिस टीमों ने उनकी घेराबंदी की, हमने उन्हें चेतावनी भी दी, लेकिन आरोपियों ने पुलिस टीमों पर फायरिंग शुरू कर दी, तब हमारी टीमों ने भी इसके बाद जवाबी कार्रवाई में नौ बदमाश घायल हो गए। सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया और बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है की बदमाशों के साथ हुई इन मुठभेड़ों के दौरान पुलिस ने एक पिस्टल, 7 देसी तमंचे, बड़ी संख्या में कारतूस, करीब 400 ग्राम चांदी के जेवर, 6 मोटरसाइकिलें, बिना नंबर प्लेट का स्कूटर और नकदी बरामद की है। पुलिस को शक है कि ये सारा सामान इन्होंने हाल की आपराधिक वारदातों से जुटाया होगा।
मुज़फ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार गिरफ्तार अपराधियों का नेटवर्क सिर्फ पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके खिलाफ पंजाब तक में भी मुकदमे दर्ज हैं। उनका कहना है कि पुलिस अपराधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर लगातार काम कर रही है।
एक अन्य जानकारी के अनुसार, “जीरो टॉलरेंस” कि नीति पर काम करते हुए यूपी पुलिस ने हरदोई में भी बुधवार तड़के एक बड़े ऑपरेशन में 50 हजार रुपये के ईनामी शाहनूर उर्फ महनुद्दीन का एनकाउंटर कर दिया, बाद में अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। उसपर सात साल के बच्चे के अपहरण, यौन उत्पीड़न और हत्या के आरोप थे। आरोपी पर POCSO एक्ट समेत 15 से ज्यादा मामले दर्ज थे। जानकारी के अनुसार, इस मुठभेड़ के दौरान SOG इंचार्ज राजेश कुमार भी गोली लगने से घायल हो गए।
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