Saturday, June 20, 2026
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संपूर्ण भारत में की जाएगी “गोध्वज” स्थापना भारत यात्रा – ब्रह्मचारी मुकुंदानंदः

अयोध्या, उत्तर प्रदेश (3 सितंबर)। आने वाली 22 सितम्बर को अयोध्या में “गोध्वज” स्थापित करने आएंगे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानदः सरस्वती जी ‘१००८’ महाराज।

सम्पूर्ण भारत में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने, गौहत्या बंद कराने हेतु गो ध्वज स्थापना भारत यात्रा के क्रम में 22 सितंबर को अयोध्या में गो ध्वज स्थापित करने जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी पहुंचनेवाले हैं। उनके आगमन की पूर्व तैयारी की समीक्षा करने हेतु लिए मंगलवार को स्थानीय शाने अवध होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के प्रतिनिधि व यात्रा की पूर्व तैयारी हेतु पधारे यात्रा के संयोजक ब्रहमचारी मुकुंदानंद संयोजक एवं सह संयोजक विकास पाटनी जी ने दी। ब्रह्मचारी मुकुन्दानंद जी ने बताया कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य जी के निर्देशन व नेतृत्व में संपूर्ण भारत में गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के अंतर्गत गो ध्वजा स्थापना भारत यात्रा 22 सितंबर से 26 अक्टूबर तक होनी निश्वित हुई जो भारत के सभी प्रदेशों की राजधानी तक जाएगी।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज गौ माता को पशु की सूची से निकलवाकर गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित कराने तथा गौहत्या बंद करने के लिए भारत वर्ष की परिक्रमा पर निकले हैं जिसके क्रम में 33 राज्यो की राजधानी में गौ ध्वज की स्थापना भी करेंगे। उनके साथ परम गोभक्त गोपाल मणि जी महाराज भी इस यात्रा में रहेंगे। मुकुन्दानन्द जी ने बताया कि तैयारी जोरों पर चल रही है और इस यात्रा लिए सभी हिंदूवादी संगठन, गौभक्त, अपना पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से धर्म सेना प्रमुख संतोष दूबे, हिंद् महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय, धर्म सेना प्रदेश प्र्मुख रवि शंकर पांडेय, जयप्रकाश मिश्रा, संजय पांडेय, अभिरामाचार्या जी, राकेश तिवारी जी, संजय सती, यश सैनी आदि उपस्थित थे।
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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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