Skip to content
10 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • भाषा-साहित्य
  • विशेष

संघ का अयोध्या आंदोलन का लक्ष्य मंदिर नहीं था, तो फिर…

admin 8 February 2024
Ayodhya movement is nationalism not temple
Spread the love

संघ के विचारक रहे देवेन्द्र स्वरूप जी विद्वान थे। 2019 में उन्हें पद्मश्री भी मिला था। वह दीनदयाल शोध संस्थान के निदेशक व उपाध्यक्ष रहे और उसके बाद संघ के मुखपत्र पांचजन्य के संपादक भी रहे। उन्होंने अयोध्या आंदोलन के दौरान काफी सारे लेख लिखे जिसे ग्रंथ अकादमी ने ‘अयोध्या का सच’ नाम से बहुत पहले छापा था।

उन्होंने 9 मार्च 2002 में राष्ट्रीय सहारा में एक लेख लिखा था, शीर्षक था, “अयोध्या आंदोलन का लक्ष्य मंदिर नहीं, राष्ट्रवाद।” इस लेख का पेज नीचे संलग्न हैं। आप पढ़ सकते हैं जिसमें वह लिख रहे हैं कि ‘अयोध्या आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ‘राष्ट्रीयता’ रहा है।’

अयोध्या आंदोलन का लक्ष्य मंदिर नहीं राष्ट्रवाद
संघ के विचारक रहे देवेन्द्र स्वरूप जी द्वारा 9 मार्च 2002 में राष्ट्रीय सहारा में लिखा गया एक लेख, जिसका शीर्षक था, “अयोध्या आंदोलन का लक्ष्य मंदिर नहीं, राष्ट्रवाद।” उस लेख का पेज यहां संलग्न है।

अभी भी किरण रिजिजू जैसे भाजपा नेता व मंत्री इसी राष्ट्रीयता के वशीभूत होकर नये बन रहे राम मंदिर को ‘राष्ट्र मंदिर’ कह रहे हैं। शायद यही कारण है कि इस मंदिर निर्माण में बड़े पैमाने पर गो-मांस भक्षी म्लेच्छों को ठेका दिया गया है, जबकि मंदिर पवित्रता और शुचिता की जगह है। संघ-भाजपा हमेशा मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदुओं की धार्मिकता को डायल्यूट करने के लिए राष्ट्रवाद का जुमला उछालने और हिंदुओं को भ्रमित करने में सफल रहे हैं।

असल में 1992 के बाद उस दौर में बाबरी विध्वंस से पिंड छुड़ाने के लिए भाजपा नेताओं (आडवाणी, वाजपेई, रज्जू भैया आदि के बयान उपलब्ध हैं) और संघी विचारकों/लेखकों के ऐसे ही विचार प्रकट होते थे। ये लोग बाबरी विध्वंस को अपने जीवन का काला अध्याय बताते नहीं थकते थे।

वाजपेई के शासनकाल में भी संघ विचारधारा के लोग मंदिर से पल्ला झाड़ने की कोशिश में जुटे रहते थे। हिंदुओं के लिए ‘बहुमत नहीं है’ का ढाल काम आता था, वहीं वामपंथी लेखक/विचारक/इतिहासकार जब भी संघ परिवार पर बाबरी विध्वंस का आरोप लगाता था तो ये जोर-शोर से बोल और लिख कर उससे पल्ला झाड़ने और राष्ट्रवाद का नारा बुलंद करने लगते थे।

भाजपा का 1980-1990 के दशक में यह मानना था कि मंदिर पर अदालत का निर्णय हमें मान्य नहीं होगा, क्योंकि यह आस्था का विषय है। फिर जब बाबरी विध्वंस हुआ और केंद्र में अल्पमत की वाजपेई सरकार बनी तो मंदिर को राष्ट्रवाद की ओर मोड़ा और जब पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार बनी तो कहा न्यायालय जो फैसला देगी, वह हमें मान्य होगा।

अब जब मंदिर बन रहा है तो मुसलमानों को कह रहे हैं कि मंदिर सुप्रीम कोर्ट ने दिया और हिंदुओं को कह रहे हैं कि मोदी जी ने दिया! दोनों हाथों से गेंद उछालने से ‘राष्ट्र मंदिर’ की अवधारणा पूर्ण हो जाती है, इसलिए संघी कभी सनातन धर्म की ‘शास्त्रीयता’ और ‘अनुष्ठान’ की परवाह नहीं करते! उनका चुनावी उद्देश्य सध जाता है, वो इसी में प्रसन्न रहते हैं। यही कारण है कि सनातन संस्कृति और सभ्यता के पुनरुत्थान की दूरदृष्टि उनके एजेंडे में कभी नहीं रहा है!

अब मुझे भय है कि 2014 के बाद पैदा हुआ ‘नव-हिंदू’ कहीं देवेन्द्र स्वरूप जी जैसे संघी विद्वान को भी देशद्रोही न कह दे, क्योंकि उनका साफ मानना था कि जबरदस्ती अयोध्या आंदोलन को विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के खाते में क्यों डाला जा रहा है?(संलग्न पेज-१)

साभार – संदीप देव

About The Author

admin

See author's posts

592

Post navigation

Previous: आइंस्टीन की संगति का असर
Next: ‘Sorry’: सारेगामा ने सिंगर माही का पहला सिंगल किया लॉन्च

Related Stories

bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026
what nonsense is this - let them say
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

admin 31 March 2026
Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

096167
Total views : 176653

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.