Skip to content
28 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • अध्यात्म
  • भाषा-साहित्य
  • लाइफस्टाइल

भगवान के हाथों में भी क्यों नहीं है कर्म का फल

admin 7 April 2023
sunset

अच्छे कर्म यदि व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं तो वहीं उसके बुरे कर्म उसे पतन की ओर ले जाते हैं.

Spread the love

 

भगवान के हाथों में नहीं है कर्म का फल. जी हाँ यही सच है. जबकि सब लोग यही कहते आ रहे हैं कि कर्मों का फल देना भगवान् के हाथों में होता है. क्योंकि कर्मों का फल देना यदि भगवान् के हाथों में होता तो फिर तो भगवान् भी आज के मनुष्य और की भांति निरंकुश हो चूका होता. भगवान् श्रीकृष्ण ने साफ़-साफ़ कहा है कि जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल भी मिलेगा, तो फिर कर्मों का फल देना भगवान के हाथों में कैसे हो गया?

इसका मतलब तो एकदम साफ़ है कि आज जो बीज आप बो रहे हो उसी का तो पौधा उगेगा. वही एक दिन वृक्ष बनेगा और उसी के फल आपको खाने को मिलेंगे. यानी आज जो कर्म आप कर रहे हो उसी का ही फल तो तुम्हें मिलेगा.

गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी ‘रामचरित मानस’ के माध्यम से यही बताने का प्रयास किया है कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भुगतना भी पड़ता है. इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम अपने कर्मों का लेखा-जोखा स्वयं ही रखें. हमारा अगला जन्म किस प्राणी के रूप में होगा, यह सब कुछ हमारे कर्मों पर ही निर्भर करता है.

हमारे पिछले जन्मों में किए हुए अच्छे-बुरे हर प्रकार के कर्म फल  हमारे भीतर ही संग्रहीत रहते हैं. साधारण भाषा में उन्हें संचित कर्म कहा जाता है, यानी आप का मूल धन. अगले जन्म में उस मूलधन का ब्याज यानी आपके उन्हीं कर्मों का फल मिलता है.

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्म को प्रधानता देते हुए यहां तक स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्ति की यात्रा जहां से छूटती है, अगले जन्म में वह वहीं से प्रारंभ होती है. यानी आप अपने कर्मों के फल को भोगने से बच नहीं सकते. चाहे आप कितने ही जन्म क्यों न ले लें.

जो व्यक्ति प्रकृति के नियमों का पालन करता है. वह प्रकृति का सम्मान करता है. जो व्यक्ति परमात्मा का सम्मान करता है वह दूसरों की पीड़ा को समझता है. और वही व्यक्ति परमात्मा के करीब भी रहता है. यहां ध्यान रखने वाली बात ये है कि परमात्मा भी जब धरती पर मनुष्य के रूप में अवतरित होता है तो वह स्वयं भी उन्हीं सारे नियमों का पालन करता है जो एक सामान्य मनुष्य के लिए उसी परमात्मा ने बनाये हैं. वह स्वयं भी अपनी ही पूजा करता है, ताकि मनुष्य ये जान सके कि उसे क्या और कैसे उन  सारे नियमों का पालन करना है जो प्रकृति चाहती है, अर्थात चाहे मनुष्य हो या देवता, अपने कर्मों के द्वारा उस परमात्मा का पूजन तो करना चाहिए.

अच्छे कर्म यदि व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं तो वहीं उसके बुरे कर्म उसे पतन की ओर ले जाते हैं. सनातन धर्म के पुराणों के अनुसार मनुष्य द्वारा किए हुए उसके स्वयं के शुभ या अशुभ कर्मों का फल उसे अवश्य ही भोगना पड़ता है. तभी तो भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है कि कर्म का सिद्धांत अत्यंत कठोर है.

लोग कहते हैं की कर्म हमारे अधीन हैं, किन्तु उसका फल देना तो भगवान के हाथों में है. लेकिन यहाँ भगवान् ये भी तो कहते हैं कि जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा. यानी मतलब साफ़ है कि आप आज जो बीज बो रहे हो उसी का तो पौधा उगेगा. वही एक दिन वृक्ष बनेगा. यानी आज आप जो कर्म कर रहे हो उसकी का फल तो तुम्हें मिलेगा. तो फिर भगवान् तो तुम्हें वही देगा जो तुमने कर्म किया है. अर्थात कर्म हमारे अधीन हैं तो उसका फल भी हमारे ही अधीन है.

एक बार एक व्यक्ति ने किसी संत से पूछा कि आपके जीवन में इतनी प्रसन्नता, शांति और उल्लास और प्रभु के प्रति इतनी शुद्ध भक्ति कैसे है? इस पर संत ने मुस्कराते हुए कहा था कि ये सब तो आप भी पा सकते हो, आप भी कर सकते हो. इसके लिए बस आप अपने कर्मों के प्रति यदि थोड़ा सा भी सजग और सतर्क हो जाते हैं, तो यह सब आप के जीवन में भी आ सकता है, हाँ किसी जीवन के में कम तो किसी के जीवन में अधिक. ये सारा खेल तो कर्मों का है. इसमें कुछ भी छुपा नहीं है.

यानी मनुष्य कर्म तो अच्छा करता नहीं है लेकिन फल बहुत अच्छा चाहता है, यही उसकी समस्या है. महापुरुष और ज्ञानी जन हमेशा से कहते आ रहे हैं कि अच्छे कर्मों को करने और बुरे कर्मों का परित्याग करने में ही हमारी भलाई है.

– अमृति देवी

About The Author

admin

See author's posts

1,722

Post navigation

Previous: जंगलों में भटकते वैज्ञानिकों को मिली मेंढक की एक नई प्रजाति
Next: एक पार्क मे दो बुजुर्ग बातें कर रहे थे…

Related Stories

Battle between Paundraka and Lord Krishna
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

admin 13 March 2026
Narendra Modi drinking charanamrit from a spoon
  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • विशेष

शंकराचार्य जी BJP, RSS, VHP का विरोध क्यों करते है?

admin 2 March 2026
Law & Order in India
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष

हिंसा, मनोविज्ञान और न्यायशास्त्र

admin 25 February 2026

Trending News

रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 1
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026
पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य Purana Qila Delhi 2
  • ऐतिहासिक नगर
  • विशेष

पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य

25 March 2026
‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश Happy Sanatani New Year on 19th March 2026 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति
  • हिन्दू राष्ट्र

‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश

19 March 2026
सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded 4
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

15 March 2026
सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 5
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026

Total Visitor

094465
Total views : 173500

Recent Posts

  • रामायण और वेदों का संबंध
  • पांडवों के पांच गाँव और इंद्रप्रस्थ के साक्ष्य
  • ‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश
  • सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न
  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.