Monday, June 29, 2026
Homeविविधविशेषहिंदुगिरी के चक्कर में हमारे नेताओं ने...

हिंदुगिरी के चक्कर में हमारे नेताओं ने…

अजय चौहान | जरा सोच कर देखिए की किसी भी गैर हिन्दू विचारधारा जैसे की भाजपा, संघ या ऐसे ही किसी के भड़काऊ नेता और विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के द्वारा दिखाए जाने वाले बेवजह के डर के कारण आज हमारे ही समाज के अधिकतर लोग कितने डरपोक होते जा रहे हैं। जबकि ठीक इसी कालखण्ड में हमारा विपक्षी यानी वो मुस्लिम समाज धीरे-धीरे हमसे भी अच्छा धार्मिक स्तर पर निडर होकर तरक्की कर रहा है। जरा सोचकर देखिए कि मुसलमान तो आज से 60-70 वर्ष पहले तक भी जहां-जहां अपनी अधिक जनसँख्या में थे वहां-वहां हावी होते जा रहे थे, तो फिर आज ऐसा क्या नया हो रहा है जो ये नेता लोग हमको डरा रहे हैं?

इन आधुनिक राजनेताओं के चक्कर में फंसकर, मुसलमानों से बैर लेकर सारे हिंदूवाद का ठेका लेना बन्द करो और इनके पीछे चलना छोड़ दो। क्यों बेमतलब हम इनके बहकावे में आकर, हिन्दू-मुस्लिम के झगड़ो में पड़कर उल्टा इन्हीं हिन्दू विरोधी लोगों को ही लाभ दें? यदि हम बहुसंख्यक हिंदुओं की जनसँख्या आज भी सर्वाधिक है तो हम क्यों लड़ें? क्यों न हम इन नेताओं को ही अपने लिए लड़ने पर विवश कर दें? फिर तो ये नेता और संघठन और पार्टिया हमारे वोट के लिए हमारे ही तलवे चाटेंगे। इसलिए हमारी जमीन, हमारे मकान, हमारे व्यवसाय और हमारे संसाधन की रिक्तता के लिए सार्वजनिक रूप से उन नेताओं को ही लड़ने दो। हम क्यों उनसे लड़ें?

सनातन धर्मियों को ऐसे नेताओं और पार्टियों की जड़े उखाड़ने के लिये यूपी से ही आरम्भ कर देना चाहिए। इनके साथ अब सहानुभूति दिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है। वरना हो सकता है कि इन्हीं में कोई से नेता जिसको हम अब भी भविष्य के लिए तैयार मान रहे हैं वो भी आज के नेता जी से हजार गुना घातक सिद्ध हों! इसलिये उचित यही है इन्हें अगली बार वोट न दिया जाय। वैसे भी, उसके बाद तो इन सभी का ग्राफ अपनेआप ही भरभरा कर ढह जायेगा।

फालतू का वक्फ बोर्ड वाला ड्रामा, बुलडोजर का डर और कानून का पालन जैसे इन फालतू के लफड़ो से हम सनातनियों का कोई सरोकार नही होना चाहिए। क्योंकि इसमें पड़कर तो उल्टा हमारी व्यर्थ की ऊर्जा ही नष्ट हो रही है। लाभ तो केवल इन पार्टियों और नेताओं का ही हो रहा है।

वैसे भी अब ये बात तो सच है कि मुसलमान इस देश से बाहर नहीं जाने वाले। लेकिन फिर भी ये राजनीति करने वाले कुछ लोग अपने हित के लिए हम हिंदुओं की भावना भड़का-भड़का कर, हमारा भावनात्मक दोहन करके उसी से फिर हमारा वोट लेते हैं और जब जीत जाते हैं तो बाद में उन्हीं मुसलमानों को 300 योजनाओं से सशक्त बनाते हैं और उल्टा हमको ही चिढ़ाते हैं।

हालांकि ये सच है कि धर्म के आधार पर तो मुसलमान हमारे शत्रु हैं, लेकिन अभी हमारी लड़ाई उनसे नहीं होनी चाहिए और न ही उनसे लड़ने में फिलहाल हमको अपनी ऊर्जा बर्बाद करनी चाहिए। फिलहाल के लिए हमारे शत्रु तो वर्तमान के वे राजनेता और राजनीति है जो धर्म के नाम पर हमारे साथ ही भेदभाव करते हुए पहले हमको मूर्ख बनाते हैं और बाद में हमारा ही उपहास उड़ाते हैं।

जरा सोच कर देखिए कि, पिछले करीब डेढ़ दशक में इसी तरह की हिंदुगिरी के चक्कर में और इस हिन्दू-मुस्लिम के विवाद में पड़ कर न जाने कितने ही हिन्दू वर्ग के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो गया। हम इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि इन तथाकथित हिंदूवादी नेताओं के कारण हमारी क्षमता और हमारी आर्थिक स्थिति दोनों नष्ट होती जा रही है।

दरअसल, हम हिंदुओं को चाहिए कि वास्तव में हमारे विरुद्ध जो वास्तविक मुद्दा है सबसे पहले हम उसपर ध्यान दें और प्राण लें कि किसी नेता की रैली या भाषणों में भाग न लें। घर, दफ्तर या सड़क कहीं पर भी उनपर चर्चा न करें, उनपर ध्यान देना बिल्कुल बंद कर दीजिए। क्योंकि आपको धर्मान्तरण, जिहाद, वक्फ, हिन्दू-हिंदू या मुसलमान-मुसलमान जपने या चर्चा करने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। उल्टा इन्हीं लोगों को बल मिलता है। हां विषय और घटनाओं की आंशिक और सटीक जानकारियों और आंकड़ों के लिए थोड़ा सा ज्ञान हो जाय वहां तक ठीक है। लेकिन हमेशा इनका ही नाम और काम रटते रहो और गुण गाते रहोगे तो हो सकता है कि इनकी दुर्बुद्धी और इनके दुर्गुण भी हमारे अंदर आ जाएं और हम भी नष्ट-भ्रष्ट होकर इनके जैसे महापापी हो जाएं।

इसलिए इनके किसी भी फर्जी मुद्दों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और फिर भी अगर आप इनके धोख़े में पड़ गए हैं तो जान लीजिए कि आप अपने स्वयं के साथ परिवार के भविष्य को भी नर्क में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

admin
adminhttp://dharmwani.com
देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments