Wednesday, June 24, 2026
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कई हफ्तों तक लगातार हवा में उड़ते हुए रह सकता है “ग्रेट फ्रिगेट”

अजय चौहान | समुद्र के आसमान में उड़ने वाला ग्रेट फ्रिगेटबर्ड (Great Frigatebird) एक ऐसा अद्भुत और रहस्यमयी पक्षी है, जिसे इसकी अनूठी आदतों के कारण “समुद्र का डाकू” (Pirate of the Sea) भी कहा जाता है। यह पक्षी अपने विशाल पंखों और नर पक्षी के गले के नीचे मौजूद चमकीले लाल रंग की एक विशेष थैली के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। तो आइए, इस अनोखे पक्षी के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण तथ्यों को विस्तार से जानते हैं।

शारीरिक विशेषताएँ और पहचान –
ग्रेट फ्रिगेटबर्ड पक्षी का शरीर बेहद हल्का लेकिन इसके पंख असाधारण रूप से बड़े होते हैं। इनके शरीर के वजन और पंखों के फैलाव का अनुपात (Wing-to-body-weight ratio) दुनिया के अन्य सभी पक्षियों की तुलना में सबसे अधिक माना गया है।

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड (Great Frigatebird) पक्षियों में नर और मादा के बिच अंतर –
पूर्ण रूप से वयस्क नर पक्षी का पूरा शरीर काले रंग का होता है। प्रजनन काल (Mating season) के दौरान इनके गले के नीचे लटकता हुआ प्राकृतिक गुलर पाउच (Gular Pouch) नामक थैला गुब्बारे की तरह बड़ा और चमकीले लाल रंग का हो जाता है, जिसे देखकर मादाएं इसकी ओर आकर्षित होती हैं। दूसरी ओर, इस प्रजाति में मादा फ्रिगेटबर्ड आकार में थोड़ी बड़ी होती हैं और उनकी छाती व गर्दन का हिस्सा सफेद होता है।

Great Frigatebirds in Hindi

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड (Great Frigatebird) के पंखों का फैलाव –
इन ग्रेट फ्रिगेटबर्ड पक्षियों का वजन मात्र 1 से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है, लेकिन इनके पंखों का फैलाव (Wingspan) लगभग 2 से 2.3 मीटर, यानी करीब 7 से 7.5 फीट तक भी हो सकता है।

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड के कुछ मुख्य वैज्ञानिक तथ्य-
– ग्रेट फ्रिगेटबर्ड का वैज्ञानिक नाम Fregata minor रखा गया है।
– प्राकृतिक आवास यानी जंगल में इसका औसत जीवनकाल लगभग 30 से 34 वर्ष आंका गया है।
– ग्रेट फ्रिगेटबर्ड का आवास (Habitat) मुख्यतः प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के उष्णकटिबंधीय (Tropical) क्षेत्र ही देखा गया है।
– ग्रेट फ्रिगेटबर्ड के मुख्य भोजन में उड़ने वाली मछलियाँ, स्क्विड और कुछ छोटे पक्षियों का शिकार करना प्रमुख है।

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड की कुछ असाधारण आदतें: जो इन्हें सबसे अलग बनाती हैं –
ग्रेट फ्रिगेटबर्ड की एक सबसे विशेष आदत है की ये सोते हुए भी उड़ सकता है और (Flight and Sleep) इस विषय में वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि यह पक्षी कई हफ्तों या महीनों तक लगातार जमीन या पानी पर उतरे बिना हवा में उड़ते हुए रह सकते हैं। असल में सोते समय इनका आधा दिमाग जागता रहता है (Unihemispheric sleep) ताकि ये हवा में अपना संतुलन न खोएं। इसके पंखों का फैलाव बहुत बड़ा होता है, जिससे वे बिना ज़्यादा पंख फड़फड़ाए समुद्र के ऊपर उड़ सकती हैं।

Great Frigatebirds in Hindi

पानी से डर, फिर भी समंदर का सफर –
ग्रेट फ्रिगेट बर्ड पक्षी की ये बात भी हैरान करने वाली है कि यह एक समुद्री पक्षी तो है लेकिन इसको पानी से डर भी लगता है क्योंकि इसे पंख वॉटरप्रूफ (Waterproof) नहीं होते। ऐसे में यदि ये पक्षी पानी की सतह पर बैठ जाएं, तो इनके पंख पानी सोख लेंगे और भीगने से भारी हो जाएंगे, और भारी होने के कारण ये पक्षी डूब भी सकते हैं। इसलिए ये कभी भी पानी पर नहीं बैठते और हवा में ही उड़ते हुए अपनी चोंच से पानी की सतह से मछलियां पकड़ते हुए शिकार करते रहते हैं।

भोजन की डकैती –
चूंकि ग्रेट फ्रिगेट नामक ये पक्षी पानी में तैर नहीं सकते, इसलिए इन्होंने पेट भरने का एक शातिर तरीका निकाला है जिसे वैज्ञानिक भाषा में क्लेप्टोपैरासिटिज़्म (Kleptoparasitism) कहते हैं। इस आदत के अनुसार ये पक्षी हवा में दूसरे समुद्री पक्षियों (जैसे बूबीज़ या गनेट्स) का हवा में तब तक पीछा करते हैं और उन्हें तंग करते रहते हैं, जब तक कि वे डरकर अपने मुंह में दबा शिकार या उल्टी करके खाना बाहर न निकाल दें। इसके बाद फ्रिगेटबर्ड उस गिरते हुए खाने को हवा में ही लपक लेते हैं। इसी वजह से इन्हें “समुद्री डाकू” कहा जाता है।

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड की एक और खासियत ये है की इसके पैर बहुत छोटे और कमजोर होते हैं। इसके कारण ये जमीन पर न तो ठीक से चल सकते हैं और न ही पानी पर बतख की तरह दौड़कर उड़ान भर सकते हैं। इसलिए इन्हें आसमान में उड़ान भरने यानी टेक-ऑफ के लिए किसी ऊंचे पेड़ या चट्टान की जरूरत होती है।

प्रजनन और संरक्षण स्थिति –
मादा फ्रिगेट पक्षी दो साल में केवल एक बार एक ही अंडा देती है। इसके चूजे (Chicks) को पूरी तरह आत्मनिर्भर होने में लगभग 1 से डेढ़ वर्ष का समय लग जाता है, जो कि किसी भी समुद्री पक्षी के लिए सबसे लंबा पैरेंटल केयर अर्थात माता-पिता द्वारा देखभाल किये जाने वाला समय है।

ग्रेट फ्रिगेटबर्ड मुख्य्तः प्रशांत और हिंद महासागरों में पाए जाते हैं, और इनकी कुछ आबादी दक्षिण अटलांटिक में भी देखी जा सकती है। ग्रेट और मैग्निफ़िसेंट फ्रिगेटबर्ड देखने में एक जैसी लगती हैं – इनमें दोनों के पंख काले होते हैं, और दोनों में नर पक्षियों के गले पर लाल रंग की थैली होती है। जबकि, नर ग्रेट फ्रिगेटबर्ड की पीठ के पंखों पर हरे रंग की चमक होती है, जबकि मैग्निफ़िसेंट फ्रिगेटबर्ड में बैंगनी रंग की चमक होती है।

वर्तमान में आईयूसीएन यानी इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की खतरे वाली लिस्ट में इन्हें “कम चिंताजनक” (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, कुछ विशिष्ट द्वीपों पर मानव गतिविधियों, प्रदूषण और चूहों जैसे बाहरी जीवों के खतरों को देखते हुए इनके अंडों और घोंसलों को खतरा रहता है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) एक वैश्विक संस्था है जो प्रकृति के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए समर्पित है। वर्ष 1948 में स्थापित और स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में मुख्यालय वाली यह एकमात्र ऐसी पर्यावरण संस्था है जो सरकारी एजेंसियों और नागरिक समाज, दोनों को एक साथ लाती है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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