Friday, June 19, 2026
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शंकराचार्य पीठ के सभी प्रतिनिधि चाहते हैं कि…

मान्यताओं के अनुसार आज (12 मई, 2024 रविवार) यानी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ही आदि शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था।शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे शंकराचार्य जी के चारों पीठ आज भी उसी मूल धर्म और संस्कृति को धारण किये हुए हैं जो आज से करीब दो हज़ार वर्ष पूर्व में था। यही कारण है कि हमारा मूल सनातन धर्म आज मात्र इन्हीं शंकराचार्य जी के कारण बचा हुआ है। उनके द्वारा स्थापित चारों पीठों पर उनकी परंपरा भी आज उसी कार्य में लगी है इसलिए हमें भी उनका अनुसरण करते हुए उनके प्रति आस्था और श्रद्धा रखना हम सभी का मूल कर्त्तव्य बनता है।

वर्तमान के इन चारों ही शंकराचार्य पीठों के प्रतिनिधियों को हमें भगवान् का दर्जा न सही लेकिन सनातन के परम गुरु के रूप में मानना हमारा कर्त्तव्य है। लेकिन वर्तमान में हमारे पब्लिक स्कूल और ऑक्सफ़ोर्ड कल्चर के अमेरिकन और यूरोपियन मानसिकता से ग़ुलाम लोगों ने तो पोप और मौलानाओं को ही अपना गुरु मान लिया है।

देखा जाय तो आजकल तो दो कदम आगे चलते हुए वर्तमान हिन्दुओं ने अब राजनीतिक पार्टियों को अपना-अपना मूल धर्म और राजनेताओं को अपने-अपने कुल देवता बनाकर पूजने लगे हैं। चुनावी गणित में फंसे वर्तमान हिन्दू ये भी भूल चुके हैं कि राजनेताओं और उनकी पार्टियों को कैसे हम भी अपने पीछे चला सकते हैं और अपनी बाते मनवा सकते हैं जैसे की अन्य धर्मी आजकल कर रहे हैं।

आज स्वयं हिन्दू राजनेता और उनकी प्रतियां भी चाहतीं हैं कि हिन्दू समाज अब उनका पूरी तरह से ग़ुलाम हो जाय और भारत भूमि पर अन्य धर्मिओं को शासक घोषित कर दिया जाय। क्योंकि हिन्दू राजनेताओं की मूल शिक्षा और दीक्षा भारत भूमि की मूल शिक्षा से नहीं बल्कि अरब और अमेरिकन मानसिकता से हो रही हैं।

शंकराचार्य पीठ के सभी प्रतिनिधि चाहते हैं कि हमारे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया जाय और गाय को राष्ट्र माता घोषिक कर उसे संरक्षित किया जाय तथा भारत की राजनीति में सनातन संस्कृति और धर्म के प्रतिनिधियों को भी विशेष दर्जा दिया जाय ताकि हम धर्म पर आधारित राजनीति को स्थापित कर सकें, किंतु आज के राजनेता और उनकी पार्टियां इसके विरोध में हैं क्योंकि वे अब हिन्दू ही नहीं रहे।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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